यूपी में आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों ने 20 हजार वेतन वादे को छलावा बताया
आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों के वेतन आदेश पर संघ का विरोध लखनऊ/अलीगढ़/चंदौसी। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन को लेकर जारी किए गए नए शासनादेश के खिलाफ स्थानीय निकाय सफाई
लखनऊ/अलीगढ़/चंदौसी। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन को लेकर जारी किए गए नए शासनादेश के खिलाफ स्थानीय निकाय सफाई कर्मचारी संघ (उ.प्र.) ने कड़ा विरोध जताया है। संघ का कहना है कि सरकार ने आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों को 20 हजार रुपये महीना देने का वादा किया था, लेकिन नए आदेश के बाद उनके हाथ में इससे काफी कम रकम आएगी। कर्मचारियों ने सरकार के 20 हजार रुपये देने के वादे को छलावा करार दिया है।
उत्तर प्रदेश शासन ने दिनांक 02-11-2026 को शासनादेश संख्या-3/2026/1/151176/2026 जारी किया है। संघ का आरोप है कि इस शासनादेश से सरकार की कथनी और करनी में अंतर साफ हो गया है। संघ के मुताबिक, आदेश में सफाई कर्मचारियों के वेतन और उनकी श्रेणी को लेकर ऐसा प्रावधान किया गया है, जिससे कर्मचारियों के हितों को नुकसान होगा।
संघ के प्रदेश प्रवक्ता अजय कुमार राजवर ने बताया कि प्रान्तीय अध्यक्ष मानिकलाल नागर ने इस आदेश पर नाराजगी जताई है। मानिकलाल नागर ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने बजट सत्र 2025 में सदन के अंदर खड़े होकर घोषणा की थी कि प्रदेश के आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों को 20,000 रुपये महीना दिया जाएगा।
संघ के अनुसार, इसके बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने 19 सितंबर 2025 को संयुक्त प्रेस वार्ता की थी। इस प्रेस वार्ता में भरोसा दिलाया गया था कि आउटसोर्स कंपनियों की तानाशाही खत्म होगी और कर्मचारियों को उनका हक मिलेगा।
वेतन और कटौती को लेकर सवाल
मानिकलाल नागर ने कहा कि नए शासनादेश में सफाई कर्मचारी को अतिविशिष्ट श्रेणी में रखने के बजाय सबसे निचली श्रेणी-4 में डाल दिया गया है। संघ का कहना है कि सफाई कर्मचारी सबसे जोखिम भरा और सम्मानित काम करता है। इसके बावजूद उसे सबसे निचली श्रेणी में रखने का फैसला कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
मानिकलाल नागर के मुताबिक, कागजों पर कुल पारिश्रमिक 17,646 रुपये दिखाया गया है। इसमें से ईपीएफ और ईएसआई के नाम पर 2,249 रुपये काट लिए जाएंगे। कटौती के बाद कर्मचारी के हाथ में सिर्फ 15,396 रुपये आएगा। इस पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “यह कौन सा 20 हजार है? सरकार बताए।”
संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि यह आदेश कर्मचारियों के हित में नहीं, बल्कि अधिकारियों और निगम के हित में है। उन्होंने वेतन से होने वाली कटौती का हिसाब भी बताया। उनके मुताबिक, 17646 रुपये में से ईपीएफ के नाम पर 2117 रुपये, ईएसआई के नाम पर 573 रुपये, सर्विस चार्ज के नाम पर 679 रुपये और यूपीकॉस कमीशन के नाम पर 176 रुपये काटे जा रहे हैं।
मानिकलाल नागर ने जीएसटी के नाम पर होने वाली कटौती को सबसे बड़ी लूट बताया। उन्होंने कहा कि जीएसटी के नाम पर 3814 रुपये काटे जा रहे हैं। उनका आरोप है कि सफाई कर्मचारी की गाढ़ी कमाई पर अफसर, कंपनी और निगम मौज करेंगे, जबकि मेहनत करने वाले कर्मचारी को सबसे कम पैसा मिलेगा।
एरियर और 20 हजार के वादे का मुद्दा
मानिकलाल नागर ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि दिवाली से पहले 20 हजार रुपये और बकाया एरियर दिया जाएगा। संघ का कहना है कि दिवाली सिर पर है, लेकिन एरियर का कहीं पता नहीं है। इसके उलट वेतन 16 हजार से घटाकर 15 हजार कर दिया गया है।
उन्होंने इस आउटसोर्स सेवा निगम को “आउटसोर्स शोषण निगम” की संज्ञा दी। संघ का कहना है कि शासनादेश में कर्मचारियों को राहत देने के बजाय वेतन से अलग-अलग मदों में कटौती का रास्ता बनाया गया है।
7 दिन का अल्टीमेटम
स्थानीय निकाय सफाई कर्मचारी संघ (उ.प्र.) ने सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। संघ ने कहा है कि अगर सरकार ने 7 दिन के अंदर इस काले आदेश को निरस्त नहीं किया, तो आंदोलन किया जाएगा।
संघ की मांग है कि सफाई कर्मचारियों को श्रेणी-1 में रखा जाए और बिना किसी कटौती के पूरे 20,000 रुपये इन हैंड देने का संशोधित आदेश जारी किया जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं होने पर प्रदेश के समस्त नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप कर दी जाएगी।
संघ ने कहा है कि इसके बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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