डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की पेरोल
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 21 दिन की पेरोल मिल गई है।
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 21 दिन की पेरोल मिल गई है। मंगलवार की सुबह 6 बजकर 5 मिनट पर वह रोहतक की सुनारिया जेल से रिहा हुए और काफिले के साथ सिरसा स्थित अपने आश्रम के लिए रवाना हो गए। यह लगातार कई बार है जब राम रहीम को पेरोल पर छूट मिली है।
गुरमीत राम रहीम सिंह को 2017 में रेप के दो मामलों में दोषी करार देते हुए 20 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद 2019 में उन्हें एक पत्रकार की हत्या के मामले में भी आजीवन कारावास की सजा मिली थी। तब से वह सुनारिया जेल में बंद हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से उन्हें बार-बार पेरोल और फरलो पर रिहाई मिलती रही है।
राम रहीम को मिलने वाली बार-बार की पेरोल को लेकर विवाद भी खड़े होते रहे हैं। विपक्षी दलों और कई संगठनों ने इस पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि राजनीतिक कारणों से उन्हें बार-बार छूट दी जा रही है। खासकर चुनावी मौसम में उनकी पेरोल को लेकर चर्चा तेज हो जाती है क्योंकि डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयायी पूरे उत्तर भारत में फैले हुए हैं।
हरियाणा में राम रहीम के डेरे का काफी असर माना जाता है और उनके समर्थक बड़ी संख्या में हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में रहते हैं। हर बार जब वह पेरोल पर बाहर आते हैं, तो सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं और उनके काफिले को भारी पुलिस बंदोबस्त के साथ आश्रम तक पहुंचाया जाता है। अब देखना होगा कि इस बार की 21 दिन की पेरोल के दौरान क्या घटनाक्रम होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुरमीत राम रहीम को क्या सजा सुनाई गई है?
गुरमीत राम रहीम को 2017 में रेप के दो मामलों में 20 साल की सजा सुनाई गई। इसके बाद 2019 में एक पत्रकार की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा मिली।
राम रहीम को कब पेरोल मिला है?
मंगलवार की सुबह 6 बजकर 5 मिनट पर रोहतक की सुनारिया जेल से राम रहीम को 21 दिन की पेरोल मिली। वह तब अपने आश्रम के लिए रवाना हो गए।
पेरोल को लेकर क्या विवाद है?
विपक्षी दलों और कई संगठनों का आरोप है कि राम रहीम को राजनीतिक कारणों से बार-बार छूट दी जा रही है। खासकर चुनावी मौसम में इस पर चर्चा बढ़ जाती है।
डेरा सच्चा सौदा का असर कहां है?
डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयायी पूरे उत्तर भारत में फैले हुए हैं। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में इसके समर्थकों की बड़ी संख्या है।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
बहराइच के स्कूल में पेड़ काटने की तैयारी, पर्यावरण नीति पर सवाल
- 2
आयुष्मान कार्ड में गलतियां सुधारना हुआ आसान, नया पोर्टल शुरू
- 3
बहराइच में एसपी ने जनता दर्शन के दौरान सुनीं सभी शिकायतें
- 4
बहराइच में 90 हजार क्विंटल चीनी के स्टॉक की जांच, कालाबाजारी पर सरकार सख्त
- 5
बहराइच की बाढ़ से प्रभावित इलाकों का जायजा लेने पहुंचे मंत्री दिनेश प्रताप सिंह
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।