सुप्रीम कोर्ट ने यूपी गैंगस्टर एक्ट को असंवैधानिक करार दिया
उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को असंवैधानिक करार देते हुए "मृतप्राय" घोषित कर दिया है।
उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को असंवैधानिक करार देते हुए "मृतप्राय" घोषित कर दिया है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1986 कोई अलग या स्वतंत्र आपराधिक अपराध नहीं बनाता है। इस फैसले के तहत अदालत ने दो वकीलों शिव प्रताप सिंह और हिमांशु श्रीवास्तव के खिलाफ इस कानून के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
दरअसल गाजियाबाद में प्रैक्टिस करने वाले वकील हिमांशु श्रीवास्तव के बड़े भाई एडवोकेट मयंक श्रीवास्तव ने तत्कालीन सीओ लोनी के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। इसकी वजह से पुलिस थाना लोनी बॉर्डर ने उनके और उनके भाई के खिलाफ यूपी गैंगस्टर एक्ट में एफआईआर दर्ज कर दी थी। गिरफ्तारी पर स्टे मिलने के बाद चार्जशीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई जिसमें रिटायर्ड जस्टिस श्री अटाऊ रहमान मसूदी ने पक्ष रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह कानून केवल एक गैंग चार्ट के आधार पर किसी व्यक्ति को गैंगस्टर का दर्जा देता है, लेकिन बिना किसी साफ अपराध के सजा तय करता है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 20(1) का हवाला देते हुए कहा कि बिना कानून में साफ अपराध बताए सजा नहीं दी जा सकती। पीठ ने जॉर्ज ऑरवेल के कथन का जिक्र करते हुए कहा कि हिंसा रोकने के बहाने यह कानून असल में सीधे-साधे नागरिकों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देता है।
अदालत ने इस कानून की तुलना अंग्रेजी कहावत "एक कुत्ते को बुरा नाम दो और उसे फांसी पर लटका दो" से की। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसने इस कानून की पूरी संवैधानिक वैधता पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। इस फैसले से आरोपियों पर अन्य दंड संहिताओं के तहत लगे आरोपों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वे मामले नियमानुसार चलते रहेंगे। पीठ ने यूपी के इस कानून की तुलना गुजरात और महाराष्ट्र के समान कानूनों से की और बताया कि उन राज्यों के कानून एक अलग अपराध बनाते हैं जो यूपी के कानून में पूरी तरह गायब है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी गैंगस्टर एक्ट के बारे में क्या फैसला दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1986 को असंवैधानिक करार दिया है और इसे "मृतप्राय" घोषित कर दिया है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि यह कानून कोई अलग या स्वतंत्र आपराधिक अपराध नहीं बनाता।
यूपी गैंगस्टर एक्ट में सुप्रीम कोर्ट को क्या समस्या मिली?
अदालत ने कहा कि यह कानून केवल गैंग चार्ट के आधार पर किसी को गैंगस्टर का दर्जा देता है, लेकिन बिना किसी साफ अपराध के सजा तय करता है। संविधान के अनुच्छेद 20(1) के अनुसार बिना कानून में साफ अपराध बताए सजा नहीं दी जा सकती।
यह फैसला किन लोगों के मामले में आया?
यह फैसला गाजियाबाद के दो वकीलों - शिव प्रताप सिंह और हिमांशु श्रीवास्तव के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के बाद आया। हिमांशु श्रीवास्तव के भाई एडवोकेट मयंक श्रीवास्तव ने एक पूर्व सीओ के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी, जिसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ यूपी गैंगस्टर एक्ट में एफआईआर दर्ज कर दी थी।
क्या इस फैसले से अन्य आरोपों पर असर पड़ेगा?
नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस फैसले से आरोपियों पर अन्य दंड संहिताओं के तहत लगे आरोपों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वे मामले नियमानुसार चलते रहेंगे।
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