सुप्रीम कोर्ट ने 20 तृणमूल सांसदों को जारी किया नोटिस, दल-बदल मामले में उठी कानूनी लड़ाई
सुप्रीम कोर्ट ने 20 तृणमूल कांग्रेस सांसदों को नोटिस जारी किया, जो NCPAI में शामिल हुए। दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता का मामला।
सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा की एक पार्टी में शामिल होने के आरोप में 20 तृणमूल कांग्रेस सांसदों को नोटिस जारी किया है। टीएमसी के जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी ने याचिका दायर की थी, जिसमें लोकसभा स्पीकर पर इन सांसदों की अयोग्यता के मामले में फैसला लेने में देरी करने का आरोप लगाया गया है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खोसला, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने बागी सांसदों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, लेकिन बनर्जी की यह मांग खारिज कर दी कि लोकसभा स्पीकर के ऑफिस और लोकसभा सेक्रेटरी जनरल को भी नोटिस जारी किया जाए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन ऑफिसों की तरफ से कोर्ट में पेशी की।
त्रिपुरा की पार्टी में शामिल होने से कानूनी लड़ाई शुरू
लोकसभा के 20 टीएमसी सांसदों ने ऐलान किया था कि वे नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीएआई) में शामिल हो रहे हैं या इसमें मिल रहे हैं। यह त्रिपुरा की एक राजनीतिक संस्था है। इन सांसदों ने लोकसभा में अलग ग्रुप की मान्यता की मांग की थी। इस लिस्ट में क्रिकेटर से नेता बने युसुफ पठान, एक्ट्रेस सयोनी घोष और सांसद काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदार और खलीलुर रहमान समेत अन्य शामिल हैं।
बनर्जी ने 20 सांसदों में से हर एक के खिलाफ अलग-अलग याचिका दायर की और बाद में स्पीकर से जल्द फैसला लेने की मांग की। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 27 जुलाई को लिखित रिमाइंडर भेजा और 12 अगस्त को इस मामले में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से खुद मुलाकात की।
टीएमसी के तर्क के केंद्र में दल-बदल विरोधी कानून
तृणमूल का कहना है कि चूंकि ये सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीते थे, इसलिए किसी दूसरी राजनीतिक संस्था से जुड़ने का उनका फैसला अपनी मर्जी से पार्टी की सदस्यता छोड़ने के बराबर है। इसके चलते दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत वे अयोग्य ठहराए जाने के हकदार हैं। बनर्जी की याचिका में कोर्ट से निर्देश मांगा गया है कि स्पीकर संविधान के दल-बदल विरोधी ढांचे के मुताबिक अयोग्यता की याचिकाओं पर फैसला लें।
सुप्रीम कोर्ट में एक समानांतर मामला शिवसेना (यूबीटी) की ओर से भी चल रहा है। उनके छह सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल हो गए थे। जस्टिस पीए नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आरधे की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।
स्रोत: Live Hindustan
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सुप्रीम कोर्ट ने 20 तृणमूल सांसदों को नोटिस क्यों जारी किया?
सुप्रीम कोर्ट ने इन सांसदों को नोटिस जारी किया क्योंकि वे Nationalist Citizens Party of India (NCPAI) में शामिल हो गए हैं, जो त्रिपुरा की एक राजनीतिक पार्टी है। तृणमूल के नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि ये सांसद दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन कर रहे हैं क्योंकि वे तृणमूल के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीते थे।
इन सांसदों के नाम क्या हैं?
इस लिस्ट में क्रिकेटर से नेता बने युसुफ पठान, एक्ट्रेस सयोनी घोष, सांसद काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदार और खलीलुर रहमान समेत अन्य शामिल हैं।
दल-बदल विरोधी कानून क्या है?
यह कानून संविधान में है और राजनेताओं को पार्टी बदलने से रोकता है। तृणमूल का तर्क है कि अगर कोई सांसद अपनी पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीता है और फिर दूसरी पार्टी में शामिल होता है, तो वह अयोग्य ठहराया जा सकता है।
लोकसभा स्पीकर को इस मामले में क्या करना है?
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को इन 20 सांसदों की अयोग्यता के बारे में फैसला लेना है। अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर से जल्दी फैसला लेने की मांग की है, और कोर्ट ने भी निर्देश दिया है कि स्पीकर संविधान के दल-बदल विरोधी ढांचे के मुताबिक फैसला लें।
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