जिंदा शशिकला तीन साल से सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज, पेंशन-राशन बंद
मध्यप्रदेश में सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज शशिकला ने मांगी मदद तीन साल से खुद को जिंदा साबित करने की लड़ाई “कलेक्टर साहब...
मध्यप्रदेश में सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज शशिकला ने मांगी मदद
तीन साल से खुद को जिंदा साबित करने की लड़ाई
“कलेक्टर साहब... मुझे जिंदा कर दो!” मध्यप्रदेश के खंडवा में एक बुजुर्ग कुष्ठ रोगी महिला शशिकला इसी गुहार के साथ जनसुनवाई में पहुंचीं। उनके हाथों में एक तख्ती थी, जिस पर लिखा था- “कलेक्टर साहब मुझे जिंदा कर दो।”
शिकला का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें तीन साल से मृत दर्ज किया गया है। इसी वजह से उनकी पेंशन बंद हो गई और सरकारी राशन भी मिलना बंद हो गया। वह अपनी पेंशन और राशन को दोबारा शुरू कराने के लिए तीन साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं।
शिकला निर्मल धाम कुष्ठ आश्रम में रहती हैं। नगर निगम के रिकॉर्ड और समग्र आईडी में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया। एक तरफ वह जिंदा हैं और अपनी जरूरतों के लिए सरकारी मदद पर निर्भर हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी कागजों में उन्हें मृत माना जा रहा है। इसी गलती ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
शिकला कुष्ठ रोग से पीड़ित हैं। उनके हाथों में उंगलियां नहीं हैं और आंखों से भी ठीक से दिखाई नहीं देता। उनकी परेशानी इस वजह से और बढ़ गई है कि सरकारी रिकॉर्ड में खुद को जिंदा साबित करने के लिए उन्हें लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पेंशन और राशन बंद होने से बढ़ी परेशानी
शिकला के पति दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर है। ऐसे में तीन साल से पेंशन और राशन बंद होने के कारण उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की मुश्किल और बढ़ गई है।
जिस महिला को अपनी जिंदगी चलाने के लिए सरकारी मदद की जरूरत है, उसी महिला को सरकारी रिकॉर्ड में अपनी जिंदगी साबित करनी पड़ रही है। शशिकला इसी परेशानी को लेकर आखिरकार हाथों में तख्ती लेकर जनसुनवाई में पहुंचीं।
वहां अपनी बात रखने से पहले ही उन्हें अधिकारियों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने पहले उनकी समस्या सुनने और सरकारी रिकॉर्ड में हुई गलती पर कार्रवाई करने के बजाय उनके पोस्टर पर नाराजगी जताई। बाद में प्रशासन ने उनकी समस्या जल्द दूर करने का भरोसा दिया।
शिकला की दिक्कत सिर्फ रिकॉर्ड में गलत प्रविष्टि तक सीमित नहीं है। कुष्ठ रोग के कारण उनके हाथों की उंगलियां नहीं हैं और आंखों में भी परेशानी है। ऐसे में आधार अपडेट कराने के लिए जरूरी फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन नहीं हो पा रहे हैं।
यानी उनके सामने दोहरी परेशानी है। एक तरफ सरकारी रिकॉर्ड में उनकी मृत्यु की प्रविष्टि दर्ज है और दूसरी तरफ आधार अपडेट कराने की तकनीकी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही। इसी वजह से वह अपनी पहचान और सरकारी सुविधाओं को बहाल कराने के लिए लगातार परेशान हो रही हैं।
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल
महिला के समर्थन में नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष दीपक उर्फ मुल्लू राठौड़ भी पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाए।
दीपक उर्फ मुल्लू राठौड़ का कहना है कि तीन साल से एक असहाय महिला सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रही है, लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने मांग की कि शशिकला को तीन साल का बकाया राशन और पेंशन एकमुश्त दिया जाए।
उन्होंने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की। उनका कहना है कि शशिकला जैसी महिला को अपनी जिंदगी साबित करने के लिए इस तरह परेशान नहीं होना चाहिए था।
प्रशासन ने गलती सुधारने का दिया भरोसा
मामले ने तूल पकड़ा तो प्रशासन ने अपनी सफाई दी। जिला पंचायत सीईओ ऐश्वर्य वर्मा के मुताबिक, शशिकला की समग्र आईडी में गलती से मृत्यु की प्रविष्टि हो गई थी।
ऐश्वर्य वर्मा के मुताबिक, इस गलती को सुधारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन का दावा है कि एक-दो दिन में तकनीकी खामी दूर कर दी जाएगी और शशिकला की पेंशन स्वीकृत कर दी जाएगी।
प्रशासन ने यह भी कहा है कि जिन बुजुर्गों और कुष्ठ रोगियों के फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन नहीं हो पाते, उनके लिए चेहरे की पहचान यानी फेस रिकॉग्निशन तकनीक से पंजीयन की व्यवस्था की जाएगी।
शिकला की शिकायत ने खंडवा के सरकारी सिस्टम की उस गलती को सामने ला दिया है, जिसमें एक जिंदा महिला को तीन साल तक सरकारी कागजों में मृत दर्ज रखा गया। अब प्रशासन ने रिकॉर्ड सुधारने, पेंशन स्वीकृत करने और तकनीकी खामी दूर करने का भरोसा दिया है.
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