जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने संभाला जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट का मुखिया पद
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली, और
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली, और लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर वी.के. सक्सेना ने श्रीनगर में हुए एक समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस शपथ ग्रहण ने परंपरा से एक ऐतिहासिक बदलाव को चिह्नित किया, क्योंकि अगस्त 2019 में लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यह पहली बार था जब लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर ने साझा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को शपथ दिलाई।
शपथ समारोह शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (SKUAST) के शालीमार ऑडिटोरियम में हुआ। सक्सेना फिलहाल जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, क्योंकि मौजूदा लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा छुट्टी पर हैं।
राष्ट्रपति की नियुक्ति और नोटिफिकेशन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राजस्थान हाई कोर्ट के बैठे हुए जज जस्टिस भाटी को 5 सितंबर को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया। केंद्र सरकार ने 5 सितंबर को चीफ जस्टिस के तौर पर जस्टिस भाटी की नियुक्ति का नोटिफिकेशन जारी किया, और उनकी नियुक्ति उस तारीख से लागू हुई जब उन्होंने पदभार संभाला।
औपचारिक न्यायिक कार्यवाही तब शुरू हुई जब हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल शहज़ाद अज़ीम ने कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 5 सितंबर 2026 को जारी नियुक्ति वारंट को पढ़ा।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त को इस पद के लिए जस्टिस भाटी के नाम की सिफारिश की थी। चीफ जस्टिस के पद पर उनकी नियुक्ति प्रमोशन के रूप में आई, 31 अगस्त 2026 को कॉलेजियम की आधिकारिक सिफारिश के बाद।
जस्टिस भाटी ने जस्टिस संजीव कुमार की जगह ली, जो 2 जून से कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में काम कर रहे थे। उनकी नियुक्ति ने दोनों केंद्र शासित प्रदेशों की सेवा करने वाले हाई कोर्ट के शीर्ष पर रिक्त पद को भरा।
लद्दाख के लिए ऐतिहासिक पहली बार
लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर द्वारा शपथ दिलाने का फैसला स्थापित प्रथा से एक अहम बदलाव था। आमतौर पर, जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को शपथ दिलाते हैं। परंपरा से यह विचलन पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के बाद विकसित हो रहे संवैधानिक व्यवस्थाओं को रेखांकित करता है।
अगस्त 2019 ने एक महत्वपूर्ण मोड़ को चिह्नित किया जब लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में बनाया गया। उस पुनर्गठन के बाद से, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों एक साझा हाई कोर्ट को जारी रखते हैं, लेकिन लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर द्वारा शपथ ग्रहण इस नए संवैधानिक ढांचे में अभूतपूर्व था।
समारोह में प्रतिष्ठित उपस्थित लोग
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया, हाई कोर्ट और अधीनस्थ अदालतों के जजों के साथ। इस महत्वपूर्ण न्यायिक कार्यक्रम में हाई कोर्ट के मौजूदा और पूर्व जजों, निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों, एडवोकेट जनरल डी.सी. रैना और वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने भी भागीदारी की।
यह समारोह, जो श्रीनगर के कन्वेंशन सेंटर में सुबह 11 बजे निर्धारित था, केंद्र शासित प्रदेश के न्यायिक, कार्यकारी और कानूनी बिरादरी को एक साथ लाया।
जस्टिस भाटी का न्यायिक करियर और विशेषज्ञता
जस्टिस भाटी ने राजस्थान हाई कोर्ट के एक वरिष्ठ जज के रूप में एक प्रतिष्ठित न्यायिक प्रतिष्ठा बनाई है। उन्हें 16 नवंबर 2016 को राजस्थान हाई कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त किया गया था और उनके पास न्यायिक काम में काफी अनुभव है।
अपने करियर के दौरान, उन्होंने सेवा और विविध मामलों दोनों को कवर करने वाले रिट क्षेत्राधिकार, जनहित याचिका (PIL), राजस्व कानून, चुनावी विवाद, खनन और शैक्षिक बुनियादी ढांचे से संबंधित मामलों में विशेष विशेषज्ञता विकसित की। उनका विशेष ज्ञान कानून के विभिन्न क्षेत्रों में फैला हुआ है जो भारत में हाई कोर्ट के सामने नियमित रूप से आते हैं।
जस्टिस भाटी ने राजस्थान राज्य के लिए एडिशनल एडवोकेट जनरल के रूप में भी कई बार काम किया। राज्य की कानूनी टीम में इस अनुभव ने उन्हें सरकारी कानूनी मामलों और सार्वजनिक नीति के मुद्दों में अंतर्दृष्टि प्रदान की जो संवैधानिक मुकदमेबाजी में अक्सर उठते हैं।
प्रशासनिक संदर्भ
नियुक्ति और शपथ ग्रहण मनोज सिन्हा की आधिकारिक छुट्टी के दौरान हुआ, जिसके कारण वी.के. सक्सेना को जम्मू-कश्मीर के प्रशासन का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ा। इस प्रशासनिक व्यवस्था का मतलब था कि सक्सेना शपथ ग्रहण समारोह के समय दोनों केंद्र शासित प्रदेशों की देखरेख कर रहे थे, जिससे वे शपथ दिलाने के लिए उपयुक्त संवैधानिक अधिकारी बन गए।
अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट को जल्द ही अपना नया चीफ जस्टिस मिल जाएगा। यह वाक्यांश शपथ समारोह से पहले नियुक्ति को लेकर प्रत्याशा को दर्शाता है।
हाई कोर्ट के लिए निहितार्थ
जस्टिस भाटी का पदभार संभालना जस्टिस संजीव कुमार के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के कार्यकाल के बाद हाई कोर्ट में स्थिरता लाता है। एक स्थायी चीफ जस्टिस की नियुक्ति से दोनों केंद्र शासित प्रदेशों की सेवा करने वाली शीर्ष न्यायिक संस्था में न्यायिक प्रशासन और निर्णय लेने में निरंतरता प्रदान करने की उम्मीद है।
हाई कोर्ट, जो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों के लिए संवैधानिक अदालत के रूप में काम करता है, संवैधानिक चुनौतियों, सेवा मामलों, आपराधिक और सिविल अपील और जनहित याचिका सहित मामलों की एक विस्तृत श्रृंखला को संभालता है। कानून के कई डोमेन में जस्टिस भाटी की विशेषज्ञता उन्हें क्षेत्र के जटिल कानूनी परिदृश्य के माध्यम से अदालत का मार्गदर्शन करने के लिए स्थित करती है।
दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के बीच साझा हाई कोर्ट व्यवस्था का मतलब है कि चीफ जस्टिस कश्मीर घाटी से लेकर लद्दाख के ऊंचाई वाले रेगिस्तान तक विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक संदर्भों में न्यायिक प्रशासन की देखरेख करते हैं। इस विस्तृत क्षेत्राधिकार में न्यायिक मानकों और न्याय तक पहुंच को बनाए रखने में उनके नेतृत्व का परीक्षण होगा।
ऐतिहासिक उदाहरण और संवैधानिक अभ्यास
श्रीनगर में शपथ समारोह के लिए स्थान का चयन पूर्व राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी में इस तरह के महत्वपूर्ण न्यायिक कार्यक्रम आयोजित करने की परंपरा को बनाए रखता है। केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठन के बाद भी, हाई कोर्ट दरबार मूव परंपरा का पालन करते हुए, रोटेशनल आधार पर श्रीनगर और जम्मू दोनों से काम करना जारी रखता है।
जस्टिस भाटी की नियुक्ति अच्छी तरह से स्थापित संवैधानिक तंत्र के माध्यम से आती है जहां सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पदों के लिए केंद्र सरकार को उम्मीदवारों की सिफारिश करता है। फिर राष्ट्रपति औपचारिक नियुक्ति करते हैं, जिसके बाद लेफ्टिनेंट गवर्नर द्वारा शपथ ग्रहण समारोह होता है।
31 अगस्त को कॉलेजियम की सिफारिश से लेकर 5 सितंबर को राष्ट्रपति की अधिसूचना और शपथ ग्रहण तक की प्रक्रिया न्यायिक नियुक्तियों पर सहमति बनने के बाद त्वरित कार्यान्वयन को दर्शाती है। चीफ जस्टिस के पद को भरने में यह दक्षता संवैधानिक अदालतों में नेतृत्व निरंतरता बनाए रखने के लिए दिए गए महत्व को दर्शाती है।
2016 से राजस्थान हाई कोर्ट में अपने व्यापक अनुभव और कई कानूनी क्षेत्रों में अपने विशेष ज्ञान के साथ, जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के प्रमुख के रूप में अपनी नई भूमिका में मूल्यवान विशेषज्ञता लाते हैं। उनके कार्यकाल को करीब से देखा जाएगा क्योंकि हाई कोर्ट इन केंद्र शासित प्रदेशों के पुनर्गठन के बाद के युग में उठने वाले कानूनी और संवैधानिक सवालों को नेविगेट करना जारी रखता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने किस कोर्ट का चीफ जस्टिस बनने की शपथ ली?
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह श्रीनगर के SKUAST के शालीमार ऑडिटोरियम में हुआ।
लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर द्वारा शपथ दिलाना क्या नया था?
यह पहली बार था जब लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर ने साझा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को शपथ दिलाई। अगस्त 2019 में लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यह बदलाव संवैधानिक व्यवस्थाओं को दर्शाता है।
जस्टिस भाटी की नियुक्ति की सिफारिश किसने की थी?
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त को जस्टिस भाटी के नाम की सिफारिश की थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 सितंबर को उन्हें चीफ जस्टिस नियुक्त किया।
जस्टिस भाटी राजस्थान हाई कोर्ट में क्या थे?
जस्टिस भाटी राजस्थान हाई कोर्ट के बैठे हुए जज थे। इस नई नियुक्ति को उनके लिए प्रमोशन माना गया है।
शपथ ग्रहण समारोह में कौन-कौन शामिल थे?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, हाई कोर्ट और अधीनस्थ अदालतों के जज, एडवोकेट जनरल डी.सी. रैना और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
बहराइच में महिला की अश्लील तस्वीरों से ब्लैकमेल कर पांच लाख रुपये वसूलने वाला …
- 2
भाजपा ने निष्कासित नेता की सपा एंट्री पर अखिलेश यादव को घेरा
- 3
गणेश प्रतिमा विसर्जन से पहले बहराइच में डीएम-एसपी ने सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा
- 4
बहराइच: भावुक सुसाइड नोट लिखकर की युवक ने की आत्महत्या
- 5
थाना रुपईडीहा क्षेत्र में शातिर अपराधियों से हुई रूपईडीहा पुलिस की मुठभेड़।
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।