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Uttar Pradesh Official source उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन का बेस मैप को मंजूरी मिली

उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन के गठन की दिशा में एक अहम पड़ाव पार कर लिया गया है।

उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन का बेस मैप को मंजूरी मिली
Image credit: News Darpan Team

उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन के गठन की दिशा में एक अहम पड़ाव पार कर लिया गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण के पारिजात सभागार में मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में रिव्यू कमेटी की बैठक हुई, जिसमें UPSCR के बेस मैप को मंजूरी दे दी गई। यह मंजूरी स्टेट कैपिटल रीजन की स्थापना की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अब इस बेस मैप को अनुमोदन के लिए एक्जीक्यूटिव कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। एक्जीक्यूटिव कमेटी से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद UPSCR का GIS आधारित रीजनल प्लान तैयार कराया जाएगा। इस रीजनल प्लान के जरिए पूरे क्षेत्र के विकास का खाका तैयार किया जाएगा।

स्टेट कैपिटल रीजन में कुल छह जिलों को शामिल किया गया है। इनमें लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली शामिल हैं। UPSCR का कुल क्षेत्रफल करीब 26,741 वर्ग किलोमीटर है। इस विशाल क्षेत्र में समन्वित विकास योजना को लागू किया जाएगा।

क्षेत्रीय महायोजना के तहत कई महत्वपूर्ण सेक्टर्स को कवर किया गया है। परिवहन, मोबिलिटी, अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन से जुड़ी कुल 30 प्रमुख परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं। इन परियोजनाओं के जरिए पूरे क्षेत्र में संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाएगा।

UPSCR में शामिल छह जिलों की आपसी कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई बड़ी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें राज्य राजधानी माला यानी रीजनल रोड, एलिवेटेड पेरिफेरल रोड और रोड अपग्रेडेशन जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट नगर, ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर और मेट्रो नेटवर्क विकसित करने की योजनाएं भी इस महायोजना का हिस्सा हैं।

आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी कई बड़ी परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं। इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, लॉजिस्टिक पार्क, फूड पार्क और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे कॉरिडोर ओरिएंटेड डेवलपमेंट जैसी परियोजनाएं इनमें प्रमुख हैं। माना जा रहा है कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से पूरे क्षेत्र में निवेश, रोजगार और कारोबार के नए अवसर बढ़ेंगे।

बेस मैप तैयार करने की प्रक्रिया काफी व्यापक रही है। UPSCR का बेस मैप तैयार करने के लिए कुल 22 संस्थाओं से अभिमत मांगा गया था। इनमें विकास प्राधिकरण, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, रेलवे, वन विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग जैसी प्रमुख संस्थाएं शामिल थीं। सभी विभागों ने बेस मैप का परीक्षण करने के बाद अपनी सहमति दी। इसके बाद ही रिव्यू कमेटी की बैठक में इसका प्रेजेंटेशन किया गया और मंजूरी प्रदान की गई।

बेस मैप की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा अभ्यास किया गया। UPSCR के सभी छह जिलों में ग्राउंड ट्रूथिंग कराई गई। कंसल्टेंट और संबंधित विभागों की टीमों ने सैटेलाइट इमेज और नक्शों से मिले डाटा का मौके पर जाकर मिलान किया। इस पूरी प्रक्रिया में कुल 2,239 स्थानों का स्थलीय सत्यापन किया गया, जिससे बेस मैप की सटीकता सुनिश्चित हो सके।

रिव्यू कमेटी की बैठक में अपर जिलाधिकारी राकेश सिंह, अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव, अपर सचिव सी.पी. त्रिपाठी, मुख्य नगर नियोजक के.के. गौतम समेत अन्य अधिकारी और कंसल्टेंट मौजूद रहे। बैठक में बेस मैप के सभी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा के बाद मंजूरी दी गई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन में कौन-कौन से जिले शामिल हैं?

UPSCR में कुल छह जिले शामिल हैं - लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली। इन सभी जिलों का कुल क्षेत्रफल करीब 26,741 वर्ग किलोमीटर है।

बेस मैप को मंजूरी देने के बाद अगला कदम क्या होगा?

बेस मैप को एक्जीक्यूटिव कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। एक्जीक्यूटिव कमेटी से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद UPSCR का GIS आधारित रीजनल प्लान तैयार किया जाएगा।

स्टेट कैपिटल रीजन में कितनी प्रमुख परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं?

क्षेत्रीय महायोजना के तहत परिवहन, मोबिलिटी, अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन से जुड़ी कुल 30 प्रमुख परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं।

बेस मैप की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए क्या किया गया?

सभी छह जिलों में ग्राउंड ट्रूथिंग कराई गई। कंसल्टेंट और विभागों की टीमों ने सैटेलाइट इमेज और नक्शों के डाटा का मौके पर जाकर मिलान किया। कुल 2,239 स्थानों का स्थलीय सत्यापन किया गया।

बेस मैप तैयार करने के लिए कौन-कौन सी संस्थाओं से सलाह ली गई?

कुल 22 संस्थाओं से अभिमत मांगा गया था, जिनमें विकास प्राधिकरण, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, रेलवे, वन विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग शामिल थीं।

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