बहराइच में बच्चे पर हमला करने वाली मादा तेंदुई पकड़ी गई
बहराइच के कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में एक मादा तेंदुए को पिंजरे में पकड़ लिया गया है। वन विभाग की टीमों को कई दिनों की मेहनत के बाद यह सफलता मिली है।
बहराइच के कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में एक मादा तेंदुए को पिंजरे में पकड़ लिया गया है। वन विभाग की टीमों को कई दिनों की मेहनत के बाद यह सफलता मिली है।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के निशानगाढ़ा रेंज के अंतर्गत मटेही गांव में 6 सितंबर को एक बच्चे पर तेंदुए के हमले की घटना हुई थी। इस घटना के बाद वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए इलाके में पिंजरा लगाया था।
घटना के बाद से वन विभाग की टीमें लगातार सक्रिय थीं और लोगों के लिए खतरा बने इस तेंदुए को पकड़ने की पूरी कोशिश कर रही थीं। टीमें इलाके में लगातार गश्त कर रही थीं और तेंदुए पर नज़र रखे हुए थीं। बीती रात टीम को आखिरकार सफलता मिल गई। तेंदुआ पिंजरे में कैद हो गया और उसे तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया।
पशुचिकित्सक ने तेंदुए के स्वास्थ्य की पूरी जांच की। जांच में सामने आया कि यह एक मादा तेंदुआ है, जिसकी प्रजाति पैंथेरा पार्डस है। इसकी उम्र लगभग 6 से 7 साल है और वजन करीब 45 से 50 किलोग्राम है। स्वास्थ्य की जांच में यह पाया गया कि मादा तेंदुआ पूरी तरह से स्वस्थ, सक्रिय है और प्राकृतिक व्यवहार दिखा रही है।
चिकित्सक डॉ. दीपक वर्मा के मुताबिक यह तेंदुआ परिवहन और सुरक्षित क्षेत्र में छोड़े जाने के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है। उच्चाधिकारियों से और नियमों के मुताबिक जरूरी स्वीकृतियां मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पूरी की जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बहराइच में तेंदुए को पकड़ने का कारण क्या था?
6 सितंबर को मटेही गांव में इसी मादा तेंदुए ने एक बच्चे पर हमला किया था। इसके बाद वन विभाग ने इलाके में खतरा बने इस तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए थे।
पकड़ी गई मादा तेंदुई की क्या खास बातें हैं?
यह तेंदुई पैंथेरा पार्डस प्रजाति की है। इसकी उम्र करीब 6 से 7 साल है और वजन 45 से 50 किलोग्राम है। पशुचिकित्सक की जांच में यह पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय पाई गई है।
तेंदुए को पकड़ने में वन विभाग को कितना समय लगा?
हमले की घटना 6 सितंबर को हुई थी। वन विभाग की टीमें कई दिनों तक लगातार गश्त और निगरानी करती रहीं, और आखिरकार बीती रात तेंदुए को पिंजरे में पकड़ा जा सका।
अब तेंदुए के साथ क्या होगा?
पशुचिकित्सक डॉ. दीपक वर्मा के अनुसार यह तेंदुआ परिवहन और सुरक्षित क्षेत्र में छोड़े जाने के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। उच्चाधिकारियों से जरूरी स्वीकृतियां मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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