बहराइच में आदमी को मारने वाले तेंदुए को 24 घंटे में पकड़ा गया
बहराइच के कतरनियाघाट वन्यजीव प्रभाग ने महबूबनगर गांव में हुई घातक हमले की घटना में शामिल तेंदुए को 24 घंटे के अंदर पकड़ लिया है।
बहराइच के कतरनियाघाट वन्यजीव प्रभाग ने महबूबनगर गांव में हुई घातक हमले की घटना में शामिल तेंदुए को 24 घंटे के अंदर पकड़ लिया है। ग्राम पंचायत महबूबनगर, ककराहा रेंज में 1 सितंबर 2026 को जंगल की सीमा से करीब 200 मीटर दूर 28 साल के राम सिंह की एक हिंसक जानवर के हमले में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद वन विभाग ने तेजी से कार्रवाई करते हुए हमले में शामिल व्यस्क नर तेंदुए को ट्रैक कर सुरक्षित पकड़ लिया।
घटना के बाद बेहद तनावपूर्ण माहौल के बीच मौके पर पहुंचे वन कर्मियों ने पारदर्शिता और बातचीत के जरिए गुस्साए ग्रामीणों को शांत कराया। मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और स्थानीय लोगों को तुरंत मदद और सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया।
उग्र भीड़ के दबाव के बावजूद उप-क्षेत्रीय वनाधिकारी (डिप्टी रेंजर) सत्यप्रकाश वर्मा ने पीड़ित के आंगन में मिले पगमार्क का सही और वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया। पगमार्क की नाप से पुष्टि हुई कि हमलावर एक व्यस्क तेंदुआ है, जिसके आधार पर तुरंत और सटीक कार्रवाई शुरू की गई।
लगातार भारी बारिश के बावजूद आगे कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए मैदानी टीम ने घटना स्थल के पास रणनीतिक तरीके से पिंजरा लगाया। 24 घंटे से भी कम समय में वैज्ञानिक आकलन से मेल खाता एक व्यस्क नर तेंदुआ पिंजरे में सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया।
इस मुश्किल ऑपरेशन की कामयाबी का श्रेय उप-क्षेत्रीय वनाधिकारी सत्यप्रकाश, वन दरोगा रविंद्र राव, वन रक्षक कपिल कुमार और उनकी पूरी मैदानी टीम के हौसले और संयम को जाता है। टीम ने बेहद गुस्साई और आक्रोशित भीड़ को कुशलता से संभाला, खराब मौसम में पिंजरा लगाया और बिना किसी रुकावट के पकड़े गए तेंदुए को गांव से सुरक्षित बाहर निकाला। इस पूरे ऑपरेशन की रणनीतिक देखरेख क्षेत्रीय वनाधिकारी ककराहा ने की, जिनकी अगुवाई में तेंदुए को सुरक्षित निकालने तक का काम सुचारू रूप से पूरा हुआ।
तेंदुए को पकड़ लेने के बावजूद वन विभाग ने जंगल के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले सभी ग्रामीणों से सतर्क रहने और सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन करने की अपील की है। विभाग ने खुले में सोने से बचने, रात के समय घरों के बाहर, खुले बरामदों या आंगन में सोने से पूरी तरह परहेज करने की सलाह दी है।
वन्यजीवों को दूर रखने के लिए रात के समय आंगन और घर के आसपास टॉर्च, सोलर लाइट या बल्ब से पर्याप्त रोशनी रखने को कहा गया है। वन विभाग चिन्हित हॉटस्पॉट गांव में रोशनी की व्यवस्था कर रहा है।
सुबह, शाम या रात के समय जंगल की सीमा, खेतों या घनी झाड़ियों के पास अकेले जाने से बचने की सलाह दी गई है। हमेशा समूह में निकलें और हाथ में डंडा या टॉर्च रखें। बच्चों का खास ध्यान रखने को कहा गया है।
पालतू पशुओं को रात में मजबूत और पूरी तरह से ढके हुए बाड़ों में बांधने की सलाह दी गई है, क्योंकि खुले मवेशी हिंसक जानवरों को आकर्षित कर सकते हैं। वन्यजीवों के छिपने की जगहों को खत्म करने के लिए घरों के आसपास की घनी झाड़ियों और खरपतवार की नियमित सफाई करने को कहा गया है।
यदि रिहायशी इलाकों के आसपास किसी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत नजदीकी वन कर्मी या रेंज ऑफिस को सूचित करने की अपील की गई है।
वन विभाग ने कहा कि मानव जीवन की हानि एक अपूरणीय नुकसान है, फिर भी 24 घंटे के अंदर तेज वैज्ञानिक कार्रवाई, सामुदायिक समन्वय और तेंदुए के सफल रेस्क्यू से कतरनियाघाट प्रभाग ने जनसुरक्षा और वन्यजीव प्रबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित की है। पकड़े गए तेंदुए का अभी पशुचिकित्सकीय जांच और मानक प्रोटोकॉल के तहत निरीक्षण किया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बहराइच में तेंदुए ने किसे मारा और यह कब की घटना है?
28 साल के राम सिंह को तेंदुए ने महबूबनगर गांव में 1 सितंबर 2026 को मारा था। यह घटना जंगल की सीमा से करीब 200 मीटर दूर हुई थी।
तेंदुए को पकड़ने में कितना समय लगा?
वन विभाग ने तेंदुए को 24 घंटे के अंदर ही पकड़ लिया था। पगमार्क के वैज्ञानिक आकलन से पुष्टि की गई कि हमलावर एक व्यस्क नर तेंदुआ है।
तेंदुए को पकड़ने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
वन कर्मियों को गुस्साई भीड़ को संभालना पड़ा, भारी बारिश का सामना करना पड़ा, और रणनीतिक तरीके से पिंजरा लगाना पड़ा। इसके बावजूद टीम को 24 घंटे से भी कम समय में कामयाबी मिली।
तेंदुए के हमले से बचने के लिए गांववासियों को क्या सलाह दी गई?
रात में खुले में सोने से बचें, आंगन और घर के आसपास रोशनी रखें, जंगल के पास अकेले न जाएं, समूह में निकलें, पालतू पशुओं को ढके हुए बाड़ों में बांधें, और घनी झाड़ियों की सफाई नियमित करें।
तेंदुए को पकड़ने का श्रेय किसे दिया गया?
उप-क्षेत्रीय वनाधिकारी सत्यप्रकाश वर्मा, वन दरोगा रविंद्र राव, वन रक्षक कपिल कुमार और पूरी मैदानी टीम को इस सफल ऑपरेशन का श्रेय दिया गया। क्षेत्रीय वनाधिकारी ककराहा ने इसकी रणनीतिक देखरेख की।
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