बिलासपुर में विद्यार्थियों को बाल अधिकार और सुरक्षा कानूनों की जानकारी दी गई
बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत विद्यार्थियों को बाल अधिकारों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी दी गई।
बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत विद्यार्थियों को बाल अधिकारों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी दी गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर की ओर से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बिलासपुर में 30 अक्टूबर को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, शिमला के दिशा-निर्देशों के अनुसार यह अभियान 26 से 31 अक्टूबर, 2026 तक चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, उनकी सुरक्षा और संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी देना रहा।
कार्यक्रम में जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर ज्योत्सना सुमंत डढवाल विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हर बच्चे को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण में शिक्षा पाने तथा अपने सर्वांगीण विकास के लिए समान अवसर मिलना उसका अधिकार है।
ज्योत्सना सुमंत डढवाल ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों को किसी भी तरह के शोषण, उत्पीड़न या दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर बच्चों को संबंधित अधिकारियों से सहायता लेनी चाहिए। विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि किसी भी परेशानी या असुरक्षित स्थिति में चुप रहने के बजाय उपलब्ध सहायता और कानूनी व्यवस्था का सहारा लिया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बाल संरक्षण से जुड़े अलग-अलग कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें बाल विवाह निषेध अधिनियम, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम और बाल एवं किशोर श्रम निषेध से जुड़े कानूनों के बारे में बताया गया।
बच्चों के खिलाफ होने वाले शोषण और अन्य अपराधों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा के उपायों और निःशुल्क विधिक सहायता हासिल करने की प्रक्रिया के बारे में भी अवगत करवाया गया।
कार्यक्रम में बताया गया कि बाल अधिकारों की सुरक्षा केवल प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के हर व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। सभी को मिलकर बच्चों के लिए सुरक्षित, सकारात्मक और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना चाहिए।
कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर नविश भारद्वाज भी उपस्थित रहे। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर एवं वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश-सह-अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रतीक गुप्ता ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिलासपुर में विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम कब आयोजित किया गया?
यह कार्यक्रम 30 अक्टूबर को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बिलासपुर में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना था।
विद्यार्थियों को किन कानूनों के बारे में बताया गया?
विद्यार्थियों को बाल विवाह निषेध अधिनियम, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम और बाल एवं किशोर श्रम निषेध से जुड़े कानूनों की जानकारी दी गई।
असुरक्षित स्थिति में बच्चों को क्या करना चाहिए?
बच्चों को चुप रहने के बजाय संबंधित अधिकारियों से सहायता लेनी चाहिए और उपलब्ध कानूनी व्यवस्था का सहारा लेना चाहिए।
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