बिलासपुर में 323 लोन डिफॉल्ट मामले, 70 करोड़ वसूली को कानूनी कार्रवाई
बिलासपुर में सहकारी ऋण डिफॉल्टरों पर कार्रवाई बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश में सहकारी सभाओं से ऋण लेने के बाद लंबे समय तक बकाया राशि जमा नहीं करवाने वाले डिफॉल्टरों के खिलाफ सहकारिता विभाग ने सख्त
बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश में सहकारी सभाओं से ऋण लेने के बाद लंबे समय तक बकाया राशि जमा नहीं करवाने वाले डिफॉल्टरों के खिलाफ सहकारिता विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बिलासपुर जिला में सहकारी सभाओं से जुड़े लोन डिफॉल्ट के 323 मामले सामने आए हैं। इन मामलों में विभाग की करीब 70 करोड़ रुपये की लेनदारी है।
विभाग अब डिफॉल्टरों से बकाया राशि की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई कर रहा है। कार्रवाई के तहत संपत्ति अटैच करने से लेकर गिरफ्तारी वारंट जारी करने तक के कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग हिमाचल प्रदेश लैंड रेवेन्यू एक्ट, 1954 के तहत निष्पादन कार्रवाई कर रहा है।
बिलासपुर जिला में कुल 90 सहकारी सभाएं कार्यरत हैं। इनमें से 17 सहकारी सभाओं में लोन डिफॉल्ट से जुड़े 323 मामले दर्ज हैं। इन मामलों में बकाया राशि की वसूली के लिए विभाग ने अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़ाई है।
40 मामलों में संपत्ति अटैचमेंट की प्रक्रिया
विभागीय जानकारी के अनुसार, पिछले तीन महीनों के दौरान लोन डिफॉल्ट के 40 मामलों में संपत्ति अटैचमेंट की प्रक्रिया शुरू करने के लिए संबंधित राजस्व अधिकारियों और तहसीलदारों को मामले भेजे गए हैं। संबंधित तहसीलदारों को इन मामलों में आगे की कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई कुछ मामलों में पहले भी की जा चुकी है। विभाग के अनुसार, कई डिफॉल्टरों की संपत्ति अटैच होने के बाद भी बकाया राशि जमा नहीं करवाई गई। ऐसे मामलों में अब संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।
संपत्ति अटैच होने के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं करवाने वाले 20 मामलों में संपत्ति की नीलामी के लिए मंडी के मंडलायुक्त से अनुमति मांगी गई है। इनमें से 8 मामलों में अनुमति मिल चुकी है। शेष मामलों में मंजूरी का इंतजार है।
13 डिफॉल्टरों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
सहकारी सभाएं बिलासपुर के सहायक पंजीयक भास्कर कालिया ने बताया कि सहकारी सभाओं के लोन डिफॉल्टरों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि ऐसे 13 लोन डिफॉल्टरों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं, जिन्होंने ना तो लोन चुकाया है और ना ही जिला पंजीयक (सहकारी सभा) द्वारा आयोजित अदालत में पेशियों के दौरान मौजूद रहे।
पुलिस प्रशासन को 27 नवंबर तक और उससे पहले इन वारंटों की तामील करवाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग के निर्देश के अनुसार पुलिस संबंधित डिफॉल्टरों को गिरफ्तार कर विभाग के समक्ष पेश करेगी। इसके बाद इन मामलों में आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विभाग की ओर से सहकारी सभाओं के बकायेदारों के खिलाफ संपत्ति अटैचमेंट, नीलामी और गिरफ्तारी वारंट जैसी कार्रवाई की जा रही है। 40 मामलों को संपत्ति अटैचमेंट की प्रक्रिया के लिए संबंधित राजस्व अधिकारियों और तहसीलदारों को भेजा गया है, जबकि 20 मामलों में संपत्ति की नीलामी के लिए मंडी के मंडलायुक्त से अनुमति मांगी गई है।
भास्कर कालिया ने कहा कि सहकारी सभाओं में आम लोगों और सदस्यों की जमा पूंजी होती है। ऐसे में ऋण लेने वाले सदस्यों की जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित समय पर अपनी पूरी बकाया राशि जमा करवाएं। उन्होंने कहा कि इससे अन्य सदस्यों की जमा पूंजी सुरक्षित रहेगी और सहकारी सभाओं के माध्यम से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ सभी को मिलता रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
13 गिरफ्तारी वारंटों पर पुलिस को कब तक कार्रवाई करनी है?
पुलिस प्रशासन को इन वारंटों की तामील 27 नवंबर तक या उससे पहले करने के निर्देश दिए गए हैं।
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