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भारत का यूपीआई 10 साल में 13,000 गुना बढ़ा, अब रोज 66 करोड़ लेनदेन

यूपीआई अब रोज 66 करोड़ लेनदेन करता है। 2016 से 2026 तक ट्रांजैक्शन में 13,000 गुना इजाफा, विश्व में सबसे बड़ा रीयल टाइम पेमेंट सिस्टम।

भारत का यूपीआई 10 साल में 13,000 गुना बढ़ा, अब रोज 66 करोड़ लेनदेन
AI से बनाई गई सांकेतिक संपादकीय तस्वीर; यह असली घटना की फोटो नहीं है। · News Darpan AI image

यूपीआई ने पूरे किए 10 साल, ट्रांजैक्शन की संख्या में करीब 13,000 गुना इजाफा

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस अब हर दिन 66 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है, जो प्लेटफॉर्म के लाइव होने के एक दशक बाद इंस्टेंट डिजिटल पेमेंट में भारत की दुनिया में अव्वल पोजीशन को पक्का करता है।

सालाना यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 2016-17 में 1.78 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 24,162 करोड़ से ज्यादा हो गई, जो 25 अगस्त 2016 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की देखरेख में नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा सर्विस शुरू करने के बाद से करीब 13,000 गुना बढ़ोतरी है, फाइनेंस मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा। इसी दौरान ट्रांजैक्शन वैल्यू ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर करीब ₹314 लाख करोड़ हो गई, जो 4,000 गुना से ज्यादा का इजाफा है।

रिकॉर्ड मासिक संख्या ने दिखाया नया स्केल

साल 2026 एक अहम मुकाम रहा, जब मई 2026 में मासिक ट्रांजैक्शन की संख्या पहली बार 2,300 करोड़ के पार गई और 2,320 करोड़ ट्रांजैक्शन दर्ज हुए। जुलाई 2026 में 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड हुए, जो यूपीआई के दस साल के सफर में सबसे ज्यादा मासिक संख्या है, बयान में कहा गया।

संस्थागत भागीदारी लगातार बढ़ी, यूपीआई पर लाइव बैंकों की संख्या 2016-17 में 44 से बढ़कर 2025-26 तक 703 हो गई। यह प्लेटफॉर्म भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के एक अहम स्तंभ के रूप में उभरा है, जो एक ही इंटरफेस के जरिए सहज पीयर-टू-पीयर और पीयर-टू-मर्चेंट पेमेंट के लिए इंटरऑपरेबल, रियल-टाइम सिस्टम मुहैया कराता है।

वैश्विक पहचान और सीमा पार पहुंच

इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड ने यूपीआई को ट्रांजैक्शन की संख्या के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना है। 2025 तक यूपीआई वैश्विक रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन की संख्या का करीब 49 फीसदी हिस्सा है, आईएमएफ के मुताबिक।

यह प्लेटफॉर्म घरेलू इस्तेमाल से आगे बढ़ चुका है और अब 11 देशों—यूएई, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव में चालू है।

इस प्लेटफॉर्म ने डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेज तक पहुंच बढ़ाई है, डिजिटल डिवाइड को पाटने में मदद की है और देशभर में लोगों, बिजनेस और व्यापारियों को फॉर्मल डिजिटल इकोनॉमी में हिस्सा लेने का मौका देकर फाइनेंशियल इन्क्लूजन को मजबूत किया है, बयान में कहा गया। ट्रांजैक्शन की संख्या और वैल्यू दोनों में एक साथ बढ़ोतरी भारत के हाई-फ्रीक्वेंसी रिटेल पेमेंट्स इकोसिस्टम में यूपीआई की गहराती भूमिका को दिखाती है।

"यूपीआई इकोसिस्टम में नए यूजर और व्यापारियों को लाकर, भारत सरकार यूपीआई के नेतृत्व वाले इनोवेशन के अगले चरण को सक्षम बनाने और लगातार पॉलिसी सपोर्ट, टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट और ज्यादा फाइनेंशियल इन्क्लूजन के जरिए भारत के डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है," बयान में कहा गया।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई ने 10 साल में कितना बढ़ोतरी की है?

यूपीआई ने 10 सालों में ट्रांजैक्शन की संख्या में करीब 13,000 गुना बढ़ोतरी की है। 2016-17 में सालाना 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन से बढ़कर 2025-26 में 24,162 करोड़ से ज्यादा हो गई है। वहीं ट्रांजैक्शन की वैल्यू ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर करीब ₹314 लाख करोड़ हो गई।

अभी यूपीआई प्रतिदिन कितने लेनदेन करता है?

अभी यूपीआई हर दिन 66 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है। जुलाई 2026 में रिकॉर्ड 2,366 करोड़ मासिक ट्रांजैक्शन दर्ज हुए, जो यूपीआई के दस साल के इतिहास में सबसे ज्यादा है।

यूपीआई दुनिया में कहां-कहां काम कर रहा है?

यूपीआई अब 11 देशों में चालू है—यूएई, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव। इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड ने यूपीआई को ट्रांजैक्शन संख्या के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना है।

यूपीआई से कितने बैंक जुड़े हैं?

यूपीआई पर लाइव बैंकों की संख्या 2016-17 में 44 से बढ़कर 2025-26 तक 703 हो गई है। यह प्लेटफॉर्म भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के एक अहम स्तंभ बन गया है।

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