अमेरिकी परमाणु इंडस्ट्री भारत के SHANTI नियमों पर देगी विस्तृत सुझाव
अमेरिकी परमाणु उद्योग भारत के SHANTI ड्राफ्ट नियमों पर सितंबर से पहले विस्तृत सुझाव तैयार कर रहा है। निजी क्षेत्र की एंट्री पर असर का विश्लेषण।
अमेरिकी परमाणु उद्योग भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग को 4 सितंबर की डेडलाइन से पहले एक संयुक्त सुझाव तैयार कर रहा है। यह SHANTI एक्ट को लागू करने वाले ड्राफ्ट नियमों पर होगा, जिसने निजी कंपनियों के लिए परमाणु ऊर्जा के दरवाजे खोल दिए हैं।
यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) इस व्यापक उद्योग जवाब को समन्वित कर रहा है। गुरुवार को इसने भारत के कानूनी विशेषज्ञों और वॉशिंगटन स्थित न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट के साथ चर्चा की। इस फोरम ने इस साल की शुरुआत में अमेरिकी परमाणु उद्योग के प्रतिनिधियों को भारत में सिविल न्यूक्लियर मौकों का जायजा लेने के लिए लाया था। इसने अपनी न्यूक्लियर इंडस्ट्री कमेटी को वर्चुअली ड्राफ्ट नियमों की जानकारी भी दी।
उद्योग ने लाइसेंसिंग और देनदारी ढांचे की जांच की
इस वर्चुअल सत्र में परमाणु वैल्यू चेन के सीनियर लीडर्स शामिल हुए। उन्होंने ड्राफ्ट SHANTI नियमों और रेगुलेशन के मुख्य प्रावधानों की जांच की, निजी क्षेत्र की एंट्री पर इनके असर, लाइसेंसिंग की जरूरतें, देनदारी के ढांचे और प्रोजेक्ट फ्रेमवर्क को परखा। USISPF के मुताबिक, दिल्ली के PLR चैंबर्स के सुहान मुखर्जी और न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट में नेशनल सिक्योरिटी और इंटरनेशनल प्रोग्राम्स के सीनियर डायरेक्टर टेड जोन्स ने ब्रीफिंग में बात की।
परमाणु ऊर्जा विभाग ने पिछले हफ्ते ड्राफ्ट नियम और रेगुलेशन जारी किए। यह भारत की तरफ से परमाणु सेक्टर में निजी खिलाड़ियों को शामिल करने की पहली विस्तृत कोशिश है। यह फ्रेमवर्क लाइसेंसिंग, इंश्योरेंस और मंजूरी की प्रक्रियाओं को तय करता है, जबकि संवेदनशील गतिविधियां सरकार के नियंत्रण में रहेंगी।
100 GW लक्ष्य के लिए निजी भागीदारी जरूरी
SHANTI एक्ट निजी कंपनियों और जॉइंट वेंचर्स को परमाणु प्लांट बनाने, उनकी मालिकाना हक रखने और चलाने की इजाजत देता है। इसके अलावा वे डीकमीशनिंग और परमाणु रिसर्च और डेवलपमेंट का काम भी कर सकते हैं। निजी संस्थाएं परमाणु ईंधन बना सकती हैं और दवाओं और खेती समेत बिजली के अलावा दूसरे कामों के लिए आयनाइजिंग रेडिएशन का इस्तेमाल कर सकती हैं।
भारत ने 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर बनाने का लक्ष्य है—ये एडवांस्ड न्यूक्लियर फिशन प्लांट हैं जो 300 मेगावॉट तक बिजली बना सकते हैं।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
SHANTI एक्ट क्या है और इससे भारत में क्या बदलाव आएगा?
SHANTI एक्ट निजी कंपनियों और जॉइंट वेंचर्स को परमाणु प्लांट बनाने, उनकी मालिकाना हक रखने और चलाने की इजाजत देता है। इसके अलावा वे डीकमीशनिंग, परमाणु रिसर्च, ईंधन बनाना और दवाओं, खेती समेत दूसरे कामों के लिए रेडिएशन का इस्तेमाल भी कर सकती हैं। यह भारत की तरफ से परमाणु सेक्टर में निजी खिलाड़ियों को शामिल करने की पहली विस्तृत कोशिश है।
अमेरिकी परमाणु उद्योग भारत को क्या सुझाव दे रहा है?
अमेरिकी परमाणु उद्योग 4 सितंबर की डेडलाइन से पहले SHANTI एक्ट को लागू करने वाले ड्राफ्ट नियमों पर संयुक्त सुझाव तैयार कर रहा है। यह USISPF के माध्यम से समन्वित किया जा रहा है और इसमें लाइसेंसिंग, लायबिलिटी के ढांचे और प्रोजेक्ट फ्रेमवर्क जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जा रहा है।
भारत ने परमाणु ऊर्जा के लिए क्या लक्ष्य रखे हैं?
भारत ने 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर बनाने का लक्ष्य है, जो 300 मेगावॉट तक बिजली बना सकते हैं।
SHANTI नियमों में सरकार का क्या नियंत्रण रहेगा?
यह फ्रेमवर्क लाइसेंसिंग, इंश्योरेंस और मंजूरी की प्रक्रियाओं को तय करता है, जबकि संवेदनशील गतिविधियां सरकार के नियंत्रण में रहेंगी। मतलब निजी कंपनियों को आजादी है पर कुछ संवेदनशील कामों में सरकार का नियंत्रण बना रहेगा।
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