तुर्की को ASEAN का डायलॉग पार्टनर बना, वैश्विक राजनीति में बढ़ी भूमिका
तुर्की को ASEAN डायलॉग पार्टनर का दर्जा: एक रणनीतिक कदम 21 जुलाई को तुर्की को एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशन्स (ASEAN) में डायलॉग पार्टनर का दर्जा मिलने से यह साफ हो गया है कि तुर्की अपनी भूमिका को
21 जुलाई को तुर्की को एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशन्स (ASEAN) में डायलॉग पार्टनर का दर्जा मिलने से यह साफ हो गया है कि तुर्की अपनी भूमिका को वैश्विक राजनीति में एक मिडल पावर के तौर पर मजबूत करना चाहता है। यह फैसला ASEAN के नए डायलॉग पार्टनर पर लगी रोक को तोड़ता है, जो 2021 में ब्रिटेन के इस ग्रुप में शामिल होने के बाद लागू हुई थी। अब तुर्की अमेरिका, चीन, रूस और ब्रिटेन जैसे बड़े देशों के साथ इस दर्जे में शामिल हो गया है।
आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को मजबूत करना
तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने सोशल मीडिया पर इस अपग्रेड की अहमियत को बताते हुए कहा कि अंकारा ने 2010 में ASEAN के साथ संस्थागत संबंध बनाने के बाद से लगातार सहयोग बढ़ाया है। इन सालों में तुर्की का ASEAN देशों के साथ व्यापार 6.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 16 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। फिदान ने उम्मीद जताई कि इस क्षेत्र, जिसकी कुल आबादी 700 मिलियन और अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा है, के साथ राजनीतिक और आर्थिक सहयोग और मजबूत होगा।
ASEAN के साथ एक दशक का जुड़ाव
तुर्की और ASEAN के बीच संबंध 2010 में 'ट्रीटी ऑफ एमीटी एंड कोऑपरेशन' पर हस्ताक्षर के साथ शुरू हुए थे, जिसने नजदीकी रिश्तों की नींव रखी। 2017 में तुर्की को सेक्टोरल डायलॉग पार्टनर का दर्जा मिला, जो अब डायलॉग पार्टनर बनने का रास्ता बना। तुर्की ने मलेशिया, वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड और सिंगापुर जैसे ASEAN के अहम देशों के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध बनाए हैं। खासकर मलेशिया, जो ASEAN-तुर्की संबंधों के लिए कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभाता है, बेहद महत्वपूर्ण है।
इसका महत्व क्यों है?
तुर्की का अपग्रेडेड दर्जा यह दिखाता है कि वह दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर रणनीतिक रूप से झुकाव कर रहा है, जो आर्थिक और भू-राजनीतिक रूप से तेजी से बढ़ता क्षेत्र है। ASEAN के साथ नजदीकी बढ़ाकर तुर्की यूरोप और मध्य पूर्व के पारंपरिक सहयोगियों से अलग अपने साझेदारों को विविधता देना चाहता है। यह कदम यह भी दर्शाता है कि ASEAN ऐसे गैर-क्षेत्रीय देशों के साथ जुड़ने के लिए तैयार है, जो उसके आर्थिक और कूटनीतिक लक्ष्यों में योगदान दे सकते हैं।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तुर्की को ASEAN का डायलॉग पार्टनर कब बना?
तुर्की को 21 जुलाई को ASEAN का डायलॉग पार्टनर बना।
तुर्की का ASEAN के साथ व्यापार कितना बढ़ा है?
तुर्की का ASEAN देशों के साथ व्यापार 6.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 16 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।
तुर्की और ASEAN के बीच संबंध कब शुरू हुए थे?
तुर्की और ASEAN के बीच संबंध 2010 में 'ट्रीटी ऑफ एमीटी एंड कोऑपरेशन' पर हस्ताक्षर के साथ शुरू हुए थे।
तुर्की का डायलॉग पार्टनर बनने का महत्व क्या है?
तुर्की का डायलॉग पार्टनर बनना दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर रणनीतिक झुकाव को दर्शाता है और यह आर्थिक और भू-राजनीतिक रूप से तेजी से बढ़ते क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का संकेत है।
ASEAN में तुर्की का क्या लक्ष्य है?
ASEAN में तुर्की का लक्ष्य अपने साझेदारों को विविधता देना और आर्थिक तथा कूटनीतिक लक्ष्यों में योगदान करना है।
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