दक्षिण कोरियाई ग्रेजुएट्स की जापान में नौकरी पाने की बढ़ती रुचि
दक्षिण कोरियाई ग्रेजुएट्स को जापान में नौकरी की तलाश, घरेलू जॉब मार्केट में कमी दक्षिण कोरिया के युवा प्रोफेशनल्स जापान में नौकरी के लिए तेजी से जा रहे हैं।
दक्षिण कोरिया के युवा प्रोफेशनल्स जापान में नौकरी के लिए तेजी से जा रहे हैं। पिछले साल 2,257 ग्रेजुएट्स ने जापान में जॉब ली, जो 2024 के मुकाबले 47% ज्यादा है। ये ट्रेंड दिखाता है कि दक्षिण कोरियाई युवाओं के लिए जापान एक पॉपुलर करियर डेस्टिनेशन बनता जा रहा है, खासकर जब उनके अपने देश में मौके सीमित हो रहे हैं।
दो देशों के जॉब मार्केट की कहानी
दक्षिण कोरिया में नए ग्रेजुएट्स के लिए जॉब मार्केट काफी मुश्किल है। बड़ी कंपनियां जैसे सैमसंग ज्यादातर एक्सपीरियंस्ड कैंडिडेट्स को हायर करती हैं, जिससे फ्रेशर्स के लिए मौके कम हो जाते हैं। इसके अलावा, उम्रदराज कर्मचारी लंबे समय तक काम करते रहते हैं, जिससे जॉब मार्केट और टाइट हो जाता है।
दूसरी तरफ, जापान में बूढ़ी होती आबादी ने युवाओं के लिए डिमांड बढ़ा दी है। जापानी कंपनियां फ्रेश ग्रेजुएट्स को हायर कर रही हैं और उनके लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम्स भी चला रही हैं ताकि शुरुआती करियर में उन्हें सपोर्ट मिल सके।
फासला कम करने की कोशिश
इस अंतर को समझते हुए कई इनिशिएटिव्स शुरू हुए हैं जो दक्षिण कोरियाई जॉबसीकर्स को जापानी एम्प्लॉयर्स से जोड़ते हैं। 2019 में शुरू हुई KOREC नाम की एक स्टार्टअप इस काम में आगे है। इसकी फाउंडर ने बताया कि दक्षिण कोरियाई ग्रेजुएट्स काफी स्किल्ड और जापानी भाषा में माहिर होते हैं, जिससे वे जापान में जॉब्स के लिए परफेक्ट कैंडिडेट बनते हैं। उन्होंने सियोल में एक जॉब फेयर के दौरान कहा, "मुझे हैरानी हुई कि इतने स्मार्ट लोग नौकरी नहीं पा रहे थे।"
इस डिमांड ने रिक्रूटमेंट सेक्टर में नए प्लेयर्स को भी बढ़ावा दिया है। दक्षिण कोरिया की Wanted Lab और जापान की LAPRAS ने इस साल सर्विस लॉन्च की है, जो दोनों देशों के बीच टेक टैलेंट को जोड़ती है। इसके अलावा Mynavi जैसी पुरानी कंपनियां पहले से इस फील्ड में काम कर रही हैं।
इसका महत्व
ये बढ़ता माइग्रेशन दोनों देशों के लेबर मार्केट के बीच बड़ा फर्क दिखाता है। जहां दक्षिण कोरिया यंग अनएम्प्लॉयमेंट से जूझ रहा है, वहीं जापान की बूढ़ी होती वर्कफोर्स विदेशी टैलेंट के लिए मौके पैदा कर रही है।
ये ट्रेंड न सिर्फ दक्षिण कोरियाई ग्रेजुएट्स के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, बल्कि जापानी कंपनियों को उनकी लेबर शॉर्टेज से निपटने में मदद कर रहा है। जैसे-जैसे क्रॉस-बॉर्डर रिक्रूटमेंट बढ़ेगा, ये डायनामिक दक्षिण कोरियाई युवाओं के करियर ट्राजेक्टरी को बदल सकता है और इस क्षेत्र में डेमोग्राफिक और इकोनॉमिक चैलेंजेस से निपटने के लिए एक मॉडल पेश कर सकता है।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दक्षिण कोरियाई ग्रेजुएट्स जापान में नौकरी क्यों ढूंढ रहे हैं?
दक्षिण कोरिया में जॉब मार्केट में कमी के कारण, युवा प्रोफेशनल्स जापान में नौकरी की तलाश कर रहे हैं।
जापान में कितने दक्षिण कोरियाई ग्रेजुएट्स ने पिछले साल नौकरी ली?
पिछले साल 2,257 दक्षिण कोरियाई ग्रेजुएट्स ने जापान में नौकरी ली, जो 2024 के मुकाबले 47% ज्यादा है।
दक्षिण कोरिया में जॉब मार्केट की स्थिति क्या है?
दक्षिण कोरिया में नए ग्रेजुएट्स के लिए जॉब मार्केट काफी मुश्किल है, क्योंकि बड़ी कंपनियां ज्यादातर एक्सपीरियंस्ड कैंडिडेट्स को हायर करती हैं।
जापान में युवाओं के लिए नौकरी की डिमांड क्यों बढ़ रही है?
जापान की बूढ़ी होती आबादी के कारण युवाओं के लिए नौकरी की डिमांड बढ़ रही है, और जापानी कंपनियां फ्रेश ग्रेजुएट्स को हायर कर रही हैं।
KOREC स्टार्टअप का क्या काम है?
KOREC स्टार्टअप दक्षिण कोरियाई जॉबसीकर्स को जापानी एम्प्लॉयर्स से जोड़ने का काम करती है।
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