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रिचर्ड सटन ने लॉन्च किया ओक लैब, AI में नई क्रांति की कोशिश

ट्यूरिंग अवॉर्ड विजेता रिचर्ड सटन का नया प्रोजेक्ट आज के AI मॉडल्स को चुनौती रिचर्ड सटन ने लॉन्च किया ओक लैब, जो बनाएगा लगातार सीखने वाली AI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ट्यूरिंग अवॉर्ड विजेता और दिग्गज

रिचर्ड सटन ने लॉन्च किया ओक लैब, AI में नई क्रांति की कोशिश
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ट्यूरिंग अवॉर्ड विजेता रिचर्ड सटन का नया प्रोजेक्ट आज के AI मॉडल्स को चुनौती

रिचर्ड सटन ने लॉन्च किया ओक लैब, जो बनाएगा लगातार सीखने वाली AI

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ट्यूरिंग अवॉर्ड विजेता और दिग्गज रिचर्ड सटन ने टोरंटो, कनाडा में अपना नया रिसर्च प्रोजेक्ट 'ओक लैब' शुरू किया है। अपने पूर्व छात्र खुर्रम जावेद के साथ मिलकर शुरू किए गए इस लैब का मकसद ऐसे AI सिस्टम बनाना है जो अपने आसपास के माहौल से लगातार सीख सकें। ये मौजूदा AI मॉडल्स से बिल्कुल अलग होंगे, जो स्थिर डेटा सेट्स पर निर्भर करते हैं।

रीइन्फोर्समेंट लर्निंग पर बड़ा दांव

सटन का ये प्रोजेक्ट उनकी इस सोच पर आधारित है कि रीइन्फोर्समेंट लर्निंग, जहां AI सिस्टम अपने एक्शन के फीडबैक से खुद को बेहतर बनाते हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अगली बड़ी क्रांति लाएगा। उन्होंने डीप लर्निंग और बड़े भाषा मॉडल्स (LLMs) की सीमाओं पर सवाल उठाए हैं, जो फिलहाल AI की दुनिया में हावी हैं। सटन का मानना है कि ये सिस्टम, चाहे जितने ताकतवर हों, पहले से मौजूद डेटा पर निर्भर रहते हैं और खुद को डायनामिक तरीके से विकसित करने में सक्षम नहीं हैं।

ओक लैब का रिसर्च ऐसे एल्गोरिदम बनाने पर फोकस करेगा जो रियल टाइम में सीख सकें, बिना डेटा को स्टोर या रिप्ले किए। इसका मकसद कंप्यूटेशनल खर्च को कम करना और AI की एडाप्टेबिलिटी को बढ़ाना है। लैब ऐसे 'वर्ल्ड' मॉडल्स भी विकसित करेगी जो AI एजेंट्स को वेरिएशन, इवैल्यूएशन और सिलेक्शन को खुद मैनेज करने में मदद करेंगे।

एनर्जी-इफिशिएंट AI के लिए बड़े लक्ष्य

लैब का लॉन्ग-टर्म विजन एक ऐसा AI एजेंट 'ओक' बनाना है, जिसमें ट्रिलियन पैरामीटर्स होंगे और जो सिर्फ 20 वॉट एनर्जी, एक सामान्य बल्ब जितनी बिजली, के साथ रियल टाइम में सीखने और प्लान करने में सक्षम होगा। ये एजेंट अनुभव के जरिए लगातार विकसित होगा और सटन के उस विजन को पूरा करेगा जिसमें AI सिस्टम्स न सिर्फ इफिशिएंट हों, बल्कि असली खोज करने में भी सक्षम हों।

कीन टेक्नोलॉजीज से अलग रास्ता

ओक लैब शुरू करने से पहले सटन ने हाल ही में डलास बेस्ड स्टार्टअप कीन टेक्नोलॉजीज को छोड़ा, जो आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) पर काम कर रही थी। कीन टेक्नोलॉजीज को गेमिंग लीजेंड जॉन कार्मैक ने शुरू किया था और इसमें Shopify के CEO टोबी लुत्के जैसे हाई-प्रोफाइल बैकर्स शामिल हैं। सटन और जावेद ने कंपनी को छोड़कर "थोड़ा अलग रास्ता" अपनाने का फैसला किया, जो डीप लर्निंग की मौजूदा धारणाओं को चुनौती देता है।

मौजूदा AI मॉडल्स पर बढ़ती आलोचना

सटन की आलोचना उन AI रिसर्चर्स की बढ़ती सोच के साथ मेल खाती है, जिसमें यान लेकन जैसे दिग्गज शामिल हैं। ये रिसर्चर्स मानते हैं कि स्केलिंग लॉज़, यानी बड़े मॉडल्स से बेहतर नतीजे मिलने का सिद्धांत, अब उतना प्रभावी नहीं है। सटन पहले भी कह चुके हैं कि जनरेटिव AI मॉडल्स, जैसे ChatGPT, सिर्फ अपने ट्रेनिंग डेटा की नकल करते हैं और असली खोज या सेल्फ-इवैल्यूएशन की क्षमता नहीं रखते।

क्यों है ये अहम

सटन का काम पहले ही AI की दुनिया को बदल चुका है, जहां रीइन्फोर्समेंट लर्निंग ने ChatGPT और Claude जैसे LLMs को ट्रेन करने में अहम भूमिका निभाई है। उनका नया प्रोजेक्ट एक संभावित बदलाव का संकेत देता है, जो स्थिर डेटा-ड्रिवन मॉडल्स की जगह ऐसे सिस्टम्स को बढ़ावा देगा जो डायनामिक और एनर्जी-इफिशिएंट तरीके से सीख सकें। अगर ओक लैब का रिसर्च सफल होता है, तो ये AI का भविष्य बदल सकता है, इसे ज्यादा एडाप्टेबल, एनर्जी-सेविंग और असली इनोवेशन करने वाला बना सकता है।

स्रोत: Indian Express

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रिचर्ड सटन ने ओक लैब क्यों शुरू किया?

रिचर्ड सटन ने ओक लैब इसलिए शुरू किया क्योंकि वह ऐसे AI सिस्टम बनाना चाहते हैं जो अपने आसपास के माहौल से लगातार सीख सकें। उन्हें लगता है कि रीइन्फोर्समेंट लर्निंग, जहां AI अपने एक्शन के फीडबैक से खुद को बेहतर बनाते हैं, यही AI की अगली बड़ी क्रांति लाएगी। इससे ChatGPT जैसे LLMs की सीमाओं को दूर किया जा सकेगा।

ओक लैब का लक्ष्य क्या है?

ओक लैब का लॉन्ग-टर्म विजन एक ऐसा AI एजेंट 'ओक' बनाना है जो ट्रिलियन पैरामीटर्स के साथ सिर्फ 20 वॉट एनर्जी (एक सामान्य बल्ब जितनी बिजली) से चल सके। यह एजेंट रियल टाइम में सीखने, प्लान करने और अनुभव से लगातार विकसित होने में सक्षम होगा।

सटन ने कीन टेक्नोलॉजीज को क्यों छोड़ा?

सटन ने कीन टेक्नोलॉजीज को इसलिए छोड़ा क्योंकि वह 'थोड़ा अलग रास्ता' अपनाना चाहते थे, जो डीप लर्निंग की मौजूदा धारणाओं को चुनौती देता है। कीन टेक्नोलॉजीज AGI पर काम कर रही थी, लेकिन सटन का विचार सिर्फ बड़े मॉडल्स बनाने के बजाय एनर्जी-इफिशिएंट और डायनामिक लर्निंग पर ध्यान देना था।

सटन मौजूदा AI मॉडल्स की किन सीमाओं की बात करते हैं?

सटन मानते हैं कि ChatGPT जैसे जनरेटिव AI मॉडल्स सिर्फ अपने ट्रेनिंग डेटा की नकल करते हैं और असली खोज करने की क्षमता नहीं रखते। वह कहते हैं कि ये मॉडल्स स्थिर डेटा सेट्स पर निर्भर हैं और खुद को डायनामिक तरीके से विकसित करने में सक्षम नहीं हैं।

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