News Darpan भारत का डिजिटल दर्पण
ताज़ा
मुरैना में खेत की मेड़ विवाद के बाद युवक की मौत, चार घायलमधुबनी में गड्ढे में जाने के बाद बोलेरो पलटी, पुलिस चालक की मौतसीवान में चाय विवाद में 75 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या की खबरबच्चों के विवाद में युवक की हत्या, आरोपी गिरफ्तार; कुल्हाड़ी बरामदशामली में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो पलटी, चालक समेत दो युवकों की मौतशामली में विवाद सुलझाने पहुंची डायल 112 गाड़ी पर पथराव, चालक घायलग्वालियर GRMC में कथित मारपीट के विरोध में जूनियर डॉक्टरों की हड़तालबेटी के इलाज को तीन दिन भटके पिता, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप
Weather Explainer

रेड-वॉटल्ड लैपविंग: मानसून का भविष्यवक्ता पक्षी किसानों के लिए मददगार

कौन सा पक्षी है 'मानसून भविष्यवक्ता', जो किसानों को बारिश का अंदाजा लगाने में मदद करता है?

रेड-वॉटल्ड लैपविंग: मानसून का भविष्यवक्ता पक्षी किसानों के लिए मददगार
News Darpan AI image

कौन सा पक्षी है 'मानसून भविष्यवक्ता', जो किसानों को बारिश का अंदाजा लगाने में मदद करता है?

खबर:

मौसम ऐप्स और सैटेलाइट इमेजरी के आने से पहले, भारत के किसान मौसम का अंदाजा लगाने के लिए प्राकृतिक संकेतों पर निर्भर रहते थे। बादल, हवा, कीड़े, फूलों वाले पौधे और पक्षियों के व्यवहार को देखकर वे मौसम में बदलाव का अनुमान लगाते थे। इन्हीं पारंपरिक तरीकों में से एक है पश्चिमी भारत में पाए जाने वाले 'रेड-वॉटल्ड लैपविंग' पक्षी का व्यवहार, जिसे मानसून आने का संकेत देने वाला माना जाता है।

रेड-वॉटल्ड लैपविंग: एक प्राकृतिक बारिश का भविष्यवक्ता

रेड-वॉटल्ड लैपविंग, जो खेतों और जलाशयों के पास जमीन पर घोंसला बनाता है, को लंबे समय से बारिश आने का संकेत देने वाला पक्षी माना जाता है। किसान इसके घोंसले बनाने के तरीके, घोंसले की जगह, अंडों की स्थिति और घोंसले में इस्तेमाल सामग्री को ध्यान से देखते हैं। ये सिर्फ लोककथाएं नहीं हैं, बल्कि इनसे जुड़ी जानकारी किसानों को मानसून से पहले बुवाई, फसल चयन और पानी प्रबंधन जैसे अहम फैसले लेने में मदद करती है।

इस पक्षी की पहचान उसके लाल चेहरे के वॉटल्स और तेज आवाज वाले अलार्म कॉल्स से होती है। यह खुले खेतों, सूखी जमीन और इंसानी बस्तियों के पास घोंसला बनाता है। भारतीय उपमहाद्वीप में इसकी व्यापक मौजूदगी इसे ग्रामीण समुदायों के लिए एक आसान संकेतक बनाती है।

पारंपरिक ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण

अमेरिकन मेटियोरोलॉजिकल सोसाइटी में प्रकाशित एक हालिया स्टडी ने लैपविंग के बारिश का अनुमान लगाने की क्षमता से जुड़े पारंपरिक विश्वासों का अध्ययन किया। यह शोध दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान में आठ साल तक चला, जिसमें 200 आदिवासी किसान, पक्षी विशेषज्ञ, कृषि वैज्ञानिक और लैपविंग के घोंसलों का निरीक्षण शामिल था। स्टडी में पाया गया कि पुराने किसानों के पास इस पक्षी के व्यवहार, जैसे घोंसले की जगह, अंडों की स्थिति और अंडे देने के पैटर्न की गहरी जानकारी थी, जो आधुनिक मौसम विज्ञान के आंकड़ों से मेल खाती थी।

लैपविंग के घोंसले और अंडे कैसे बताते हैं बारिश का अनुमान

शोध में शामिल किसानों ने लैपविंग के व्यवहार के कुछ खास पहलुओं को बारिश का संकेतक बताया। घोंसले की जगह को सबसे अहम माना गया। ऊंची जगह पर बने घोंसले को भारी बारिश का संकेत माना जाता है, जबकि सूखी नदियों के तल या निचले इलाकों में बने घोंसले कमजोर बारिश या सूखे का संकेत देते हैं।

अंडों की स्थिति और उनका तरीका भी संकेत देता है। खड़े रखे गए अंडे ज्यादा या लंबे समय तक बारिश का संकेत देते हैं, जबकि क्षैतिज रखे अंडे कम बारिश का। इसी तरह, पास-पास रखे अंडे अच्छी बारिश का संकेत देते हैं, जबकि दूर-दूर रखे अंडे बिखरी हुई बारिश का। शोधकर्ताओं ने देखा कि पारंपरिक तौर पर किए गए ये अनुमान उनके फील्ड डेटा के बारिश के पैटर्न से मेल खाते थे।

राजस्थान के किसानों के लिए लैपविंग क्यों है खास

राजस्थान के आदिवासी इलाकों में, जहां खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है, वहां आधुनिक मौसम पूर्वानुमान तक पहुंच सीमित है। खासकर नेटवर्क कनेक्टिविटी की कमी के कारण। ऐसे में पुराने किसानों के लिए लैपविंग का व्यवहार खेती की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाता है। फसल चयन, बीजों में निवेश, पानी बचाने और खेत चुनने जैसे फैसले इस पक्षी के घोंसले के पैटर्न पर आधारित होते हैं।

हालांकि, स्टडी में पाया गया कि पारंपरिक ज्ञान पीढ़ियों में असमान रूप से बंटा हुआ है। 50 से 70 साल की उम्र के किसानों को लैपविंग के संकेतों की ज्यादा जानकारी थी, जबकि युवा किसान मौसम विज्ञान पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। यह अंतर इस बात को दिखाता है कि पारंपरिक ज्ञान धीरे-धीरे खत्म हो रहा है क्योंकि इसे अगली पीढ़ी तक कम ही पहुंचाया जा रहा है।

पारंपरिक और आधुनिक पूर्वानुमानों का मेल

शोधकर्ता पारंपरिक ज्ञान की जगह वैज्ञानिक पूर्वानुमान को रखने की बात नहीं करते, बल्कि दोनों को साथ लाने की सलाह देते हैं। उनके निष्कर्षों में पाया गया कि लैपविंग के व्यवहार पर आधारित बारिश के अनुमान अक्सर उनके स्टडी के दौरान जुटाए गए मौसम विज्ञान के आंकड़ों से मेल खाते थे। जहां आधुनिक पूर्वानुमान बड़े पैमाने पर जानकारी देते हैं, वहीं पारंपरिक ज्ञान स्थानीय स्तर पर गहराई से जुड़ा हुआ होता है।

शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि जो किसान पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक पूर्वानुमानों को मिलाकर फैसले लेते हैं, वे बेहतर कृषि निर्णय लेने में सक्षम होते हैं। उन्होंने कहा, "बारिश का पूर्वानुमान पारंपरिक और आधुनिक जानकारी को मिलाकर बेहतर किया जा सकता है।"

पीढ़ियों से चले आ रहे पर्यावरण ज्ञान का प्रमाण

रेड-वॉटल्ड लैपविंग भले ही आधिकारिक मौसम बुलेटिन में न दिखे, लेकिन ग्रामीण समुदायों में इसकी भूमिका पारंपरिक पर्यावरण ज्ञान की महत्ता को दर्शाती है। दुनिया के कई हिस्सों में ऐसा ज्ञान अब भी मौसम बदलने की समझ को आकार देता है। राजस्थान के कई किसानों के लिए मानसून का आगमन सिर्फ मौसम विज्ञान मॉडल से नहीं तय होता, बल्कि यह इस बात से शुरू होता है कि लैपविंग ने अपना घोंसला कहां बनाया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेड-वॉटल्ड लैपविंग पक्षी किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

यह पक्षी मानसून आने का संकेत देता है। किसान इसके घोंसले बनाने का तरीका, घोंसले की जगह और अंडों की स्थिति देखकर बारिश का अनुमान लगाते हैं। यह जानकारी उन्हें बुवाई, फसल चयन और पानी प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण फैसले लेने में मदद करती है।

लैपविंग के घोंसले की जगह से क्या पता चलता है?

ऊंची जगह पर बने घोंसले भारी बारिश का संकेत देते हैं, जबकि सूखी नदियों के तल या निचले इलाकों में बने घोंसले कमजोर बारिश या सूखे का संकेत देते हैं।

अंडों की स्थिति से बारिश का अनुमान कैसे लगाते हैं?

खड़े रखे गए अंडे ज्यादा या लंबे समय तक बारिश का संकेत देते हैं, जबकि क्षैतिज रखे अंडे कम बारिश का संकेत देते हैं। पास-पास रखे अंडे अच्छी बारिश का और दूर-दूर रखे अंडे बिखरी हुई बारिश का संकेत देते हैं।

क्या American Meteorological Society की स्टडी ने इस पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से मान्य किया?

हां, अमेरिकन मेटियोरोलॉजिकल सोसाइटी की स्टडी दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान में 8 साल तक चली। इसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि पारंपरिक तौर पर किए गए किसानों के अनुमान उनके फील्ड डेटा के बारिश के पैटर्न से पूरी तरह मेल खाते थे।

सबसे ज़्यादा पढ़ी गई

  1. 1

    श्रावस्ती में सपा बैठक में हंगामा, नेता का माइक छीनने का आरोप

  2. 2

    शामली में 50 से ज्यादा दुकानों के नाम कथित फर्जी बिल, लाखों भुगतान

  3. 3

    शामली महिला का रिश्तेदारों पर 15 लाख के जेवर ले जाने का आरोप

  4. 4

    हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …

  5. 5

    गन्ने की फसल नुकसान और मारपीट के आरोप, डीएम से जांच की मांग

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।

टिप्पणियाँ समीक्षा के बाद प्रकाशित होती हैं।