नासा ने इसरो को मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता दिया
नासा ने इसरो को मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता दिया नासा ने औपचारिक तौर पर इसरो को अपने महत्वाकांक्षी मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता दिया है।
नासा ने औपचारिक तौर पर इसरो को अपने महत्वाकांक्षी मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता दिया है। यह कदम अमेरिका और भारत के बीच अंतरिक्ष सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। यह न्योता हाल ही में बेंगलुरु में इसरो मुख्यालय पर हुई नौवीं इंडिया-अमेरिका सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप (CSJWG) की बैठक के दौरान दिया गया। यह पहल दोनों देशों की मौजूदा पार्टनरशिप, जो आर्टेमिस समझौते के तहत है, को आगे बढ़ाती है।
चांद पर इंसान का पहला स्थायी ठिकाना बनाने की योजना
मून बेस प्रोग्राम का मकसद चांद के साउथ पोल के पास इंसान का पहला स्थायी ठिकाना बनाना है। नासा के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट तीन चरणों में पूरा होगा, जिसमें वैज्ञानिक खोजों को बढ़ावा देने और चांद पर इंसान की मौजूदगी को मजबूत करने पर फोकस होगा। इस साझेदारी से भारत को पृथ्वी की कक्षा से बाहर अंतरिक्ष अन्वेषण के वैश्विक प्रयासों में अहम भूमिका निभाने का मौका मिल सकता है।
अंतरिक्ष सहयोग को और मजबूत करने की कोशिश
CSJWG की बैठक में अंतरिक्ष सहयोग के अन्य पहलुओं पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) मिशन की सफलता और भविष्य में विज्ञान और मानव अंतरिक्ष उड़ान तकनीकों में संभावित सहयोग पर बातचीत की।
इसके अलावा, बैठक में U.S.-India TRUST (Transforming the Relationship Utilizing Strategic Technology) इनिशिएटिव के तहत सिविल और कमर्शियल स्पेस पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। यह फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी जॉइंट लीडर्स स्टेटमेंट में किए गए वादों के अनुरूप है।
सस्टेनेबल स्पेस एक्टिविटीज पर जोर
दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र की कमेटी ऑन द पीसफुल यूजेस ऑफ आउटर स्पेस (COPUOS) के दिशा-निर्देशों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता पर जोर दिया और कमेटी की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए बहुपक्षीय प्रयासों की समीक्षा की।
भारत के लिए ऐतिहासिक मौका
यह न्योता इसरो की वैश्विक स्तर पर बढ़ती क्षमता को मान्यता देने का प्रतीक है। मून बेस प्रोग्राम में शामिल होकर भारत चांद की खोज और वैज्ञानिक ज्ञान को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। बैठक में इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर जैसे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जो इस साझेदारी के प्रति उच्च-स्तरीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह सहयोग अमेरिका-भारत के अंतरिक्ष संबंधों में एक मील का पत्थर है और बाहरी अंतरिक्ष की शांतिपूर्ण और सस्टेनेबल खोज के लिए दोनों देशों की साझा सोच को और मजबूत करता है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नासा ने इसरो को किस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता दिया?
नासा ने इसरो को मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता दिया।
मून बेस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मून बेस प्रोग्राम का मकसद चांद के साउथ पोल के पास इंसान का पहला स्थायी ठिकाना बनाना है।
इसरो और नासा के बीच किस पहल पर चर्चा हुई?
CSJWG की बैठक में नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) मिशन की सफलता पर चर्चा हुई।
भारत के लिए इस न्योते का क्या महत्व है?
यह न्योता इसरो की वैश्विक स्तर पर बढ़ती क्षमता को मान्यता देने का प्रतीक है और भारत को चांद की खोज में अहम भूमिका निभाने का मौका देता है।
दोनों देशों ने किस दिशा-निर्देशों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई?
दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र की कमेटी ऑन द पीसफुल यूजेस ऑफ आउटर स्पेस (COPUOS) के दिशा-निर्देशों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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