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मुंबई का वॉटरफ्रंट: क्रूज़ टूरिज़्म से बदल रही आर्थिक तस्वीर

मुंबई का नया सफर: क्रूज़ टूरिज़्म ने शहर के वॉटरफ्रंट को दी नई रफ़्तार मुंबई, जो लंबे समय से भारत का व्यापार और कॉमर्स का गेटवे माना जाता है, अब अपने वॉटरफ्रंट पर एक नई पहचान बना रहा है।

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मुंबई का नया सफर: क्रूज़ टूरिज़्म ने शहर के वॉटरफ्रंट को दी नई रफ़्तार

मुंबई, जो लंबे समय से भारत का व्यापार और कॉमर्स का गेटवे माना जाता है, अब अपने वॉटरफ्रंट पर एक नई पहचान बना रहा है। जहां पहले यहां कार्गो जहाज और मर्चेंट शिप्स का दबदबा था, अब क्रूज़ लाइनर्स शहर की आर्थिक तस्वीर बदल रहे हैं।

भारत का सबसे बड़ा क्रूज़ पोर्ट, मुंबई, पिछले दशक में क्रूज़ पैसेंजर ट्रैफिक में जबरदस्त बढ़ोतरी देख चुका है। 2013-14 में यहां 36 क्रूज़ जहाज आए थे, जिनमें 32,060 यात्री थे। 2025-26 तक यह आंकड़ा बढ़कर 95 जहाज और 2.4 लाख यात्री हो गया, जिससे मुंबई भारत के बढ़ते क्रूज़ टूरिज़्म का केंद्र बन गया।

इस बढ़ोतरी का असर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। क्रूज़ टूरिज़्म ट्रांसपोर्ट, होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग, गाइडेड टूर और कल्चरल अट्रैक्शन्स पर खर्च को बढ़ावा देता है। इससे शहर के बिज़नेस को बड़ा फायदा हो रहा है।

इस बदलाव का केंद्र मुंबई इंटरनेशनल क्रूज़ टर्मिनल है, जो अब देश की सबसे बड़ी क्रूज़ सुविधा बन चुका है। 4.15 लाख स्क्वायर फीट में फैला यह टर्मिनल हर साल 10 लाख यात्रियों को संभाल सकता है और एक बार में 10,000 यात्रियों की प्रोसेसिंग कर सकता है। यहां 4,500 यात्रियों वाले बड़े क्रूज़ शिप्स को भी जगह दी जा सकती है।

भारत के क्रूज़ सेक्टर में मुंबई का दबदबा साफ है। 2025-26 में मुंबई पोर्ट ने 2,40,346 यात्रियों को संभाला, जो मर्मुगाओ (67,154), कोचीन (43,376) और चेन्नई (41,047) से कहीं ज्यादा है। इनमें से ज्यादातर यात्री घरेलू क्रूज़ पर थे, जबकि आठ इंटरनेशनल क्रूज़ शिप्स से 13,500 से ज्यादा विदेशी यात्री आए।

हालांकि, मुंबई का क्रूज़ सफर चुनौतियों से खाली नहीं रहा। 2013-14 से 2019-20 तक यात्री संख्या लगातार बढ़कर 2.22 लाख तक पहुंची। लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण 2020-21 में यह पूरी तरह से रुक गया। इसके बाद से यह सेक्टर फिर से पटरी पर लौटा है, जिसकी वजह घरेलू मांग, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की मददगार नीतियां हैं।

सागरमाला प्रोग्राम के तहत केंद्र सरकार ने 2029 तक एक मिलियन क्रूज़ यात्रियों का लक्ष्य रखा है। मुंबई से शुरू हुए क्रूज़ भारत मिशन का मकसद क्रूज़ ट्रैफिक बढ़ाना, नए टर्मिनल और मरीना डेवलप करना और देशभर में टूरिज़्म डेस्टिनेशन को प्रमोट करना है। इसके साथ ही 5,000 किलोमीटर की जलमार्गों को विकसित करने की भी योजना है।

सेक्टर को मजबूती देने के लिए कई सुधार किए गए हैं, जैसे गारंटीड बर्थिंग अरेंजमेंट, डिजिटल कस्टम्स क्लियरेंस, क्यूआर कोड बेस्ड इमिग्रेशन सिस्टम, कंसेशनल टैरिफ और पैसेंजर वेसल्स के लिए कैबोटेज रिलैक्सेशन को फरवरी 2029 तक बढ़ाना। इन कदमों का मकसद भारत को ग्लोबल क्रूज़ ऑपरेटर्स के लिए और आकर्षक बनाना है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर काफी नहीं है। पैसेंजर एक्सपीरियंस को स्मूद बनाना, शोर एक्सकर्शन्स को आकर्षक बनाना और पोर्ट ऑपरेशन्स को एफिशिएंट करना भी जरूरी है। मुंबई के लिए यह एक मौका है कि वह अपने हेरिटेज साइट्स, कल्चरल अट्रैक्शन्स, फूड ट्रेल्स और नजदीकी टूरिज़्म सर्किट्स को क्रूज़ एक्सपीरियंस में शामिल करे।

हालांकि, ग्लोबल लेवल पर मुंबई अभी छोटा खिलाड़ी है। मियामी, पोर्ट कैनावेरल और बार्सिलोना जैसे इंटरनेशनल हब्स हर साल लाखों क्रूज़ यात्रियों को संभालते हैं, जबकि मुंबई का आंकड़ा 2.4 लाख है। लेकिन यह अंतर मुंबई की ग्रोथ पोटेंशियल को भी दिखाता है।

मुंबई पोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन डॉ. एम अंगमुथु ने भविष्य को लेकर उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि नया टर्मिनल और बढ़ता पैसेंजर ट्रैफिक ग्रोथ के लिए मजबूत आधार है। फोकस पैसेंजर्स की सहूलियत बढ़ाने, डेस्टिनेशन्स को डेवलप करने और स्टेकहोल्डर्स के बीच तालमेल पर रहेगा।

अब चुनौती यह है कि मुंबई को क्रूज़ पैसेंजर्स के लिए एक आसान और यादगार डेस्टिनेशन बनाया जाए। अगर यह सफल होता है, तो क्रूज़ टूरिज़्म सिर्फ आंकड़ों को बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मुंबई के वॉटरफ्रंट के साथ उसके रिश्ते को भी पूरी तरह से बदल सकता है और शहर को एशिया के प्रमुख क्रूज़ गेटवे में से एक बना सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई का वॉटरफ्रंट क्यों बदल रहा है?

मुंबई का वॉटरफ्रंट क्रूज़ टूरिज़्म के कारण बदल रहा है, जिससे शहर की आर्थिक तस्वीर में सुधार हो रहा है।

क्रूज़ टूरिज़्म से मुंबई को क्या फायदा हो रहा है?

क्रूज़ टूरिज़्म से ट्रांसपोर्ट, होटल, रेस्टोरेंट और शॉपिंग में खर्च बढ़ रहा है, जिससे शहर के बिज़नेस को बड़ा फायदा हो रहा है।

मुंबई का क्रूज़ पोर्ट किस तरह का है?

मुंबई का क्रूज़ पोर्ट भारत का सबसे बड़ा है, जो हर साल 10 लाख यात्रियों को संभाल सकता है।

क्या मुंबई में क्रूज़ टूरिज़्म में कोई चुनौतियाँ हैं?

हाँ, कोविड-19 महामारी के कारण 2020-21 में यात्री संख्या में गिरावट आई थी, लेकिन अब यह सेक्टर फिर से पटरी पर लौट रहा है।

सरकार ने क्रूज़ टूरिज़्म को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए हैं?

सरकार ने गारंटीड बर्थिंग अरेंजमेंट, डिजिटल कस्टम्स क्लियरेंस और कैबोटेज रिलैक्सेशन जैसे कई सुधार किए हैं।

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