लक्ज़मबर्ग की फर्म कर्नाटक में ₹83,480 करोड़ का ग्रीन प्रोजेक्ट लाएगी
iPC ने कर्नाटक में ग्रीन हाइड्रोजन और डेटा सेंटर के लिए ₹83,480 करोड़ निवेश की घोषणा की। 2,250 मेगावाट डेटा सेंटर और 1,000 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन।
लक्ज़मबर्ग की कंपनी इनोवेशन प्लेटफॉर्म कैपिटल (iPC) ने कर्नाटक में ग्रीन हाइड्रोजन और डेटा सेंटर कॉम्प्लेक्स के लिए 1,000 एकड़ ज़मीन मांगी है जिसकी कीमत ₹83,480 करोड़ है और यह तीन चरणों में बनेगा। राज्य सरकार इस प्रस्ताव की ज़मीन और पानी की ज़रूरतों की जांच कर रही है।
iPC ग्लोबल के मैनेजिंग पार्टनर और चेयरमैन गुरशरण सिंह कुंदन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को बड़े और मध्यम उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल को बेंगलुरु-तुमकुरु प्लेटफॉर्म का पूरा ब्लूप्रिंट दिखाया। यह फर्म डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में काम करती है। इसका प्लान 2,250 मेगावाट आईटी लोड यानी 2,250,000,000 वाट बिजली खींचने वाले कंप्यूटिंग इक्विपमेंट को सपोर्ट करना है और साथ ही पूरे प्रोजेक्ट में 1,000 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन कैपेसिटी बनाना है।
पहले चरण में ₹17,114 करोड़ का निवेश
मंत्री पाटिल ने कहा कि सिर्फ शुरुआती चरण में ही ₹17,114 करोड़ का निवेश होगा। इस हिस्से में 400 मेगावाट की डेटा सेंटर कैपेसिटी होगी जो दो 200 मेगावाट के कैंपस में बंटी होगी और साथ ही 500 मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन और पावर कॉम्प्लेक्स भी होगा।
कंपनी ने जिन 1,000 एकड़ ज़मीन की मांग की है, उसमें से लगभग 400-400 एकड़ में डेटा सेंटर और ग्रीन पावर कॉम्प्लेक्स बनेंगे। मंत्री के मुताबिक, बाकी 200 एकड़ सेफ्टी और एनवायरनमेंट बफर के लिए रखे जाएंगे, जिसमें हाइड्रोजन फैसिलिटी के लिए अनिवार्य सेपरेशन ज़ोन भी शामिल है।
पानी की ज़रूरत और रीसाइक्लिंग
प्रोजेक्ट में हर दिन करीब 1 करोड़ 30 लाख लीटर पानी की ज़रूरत होगी, जिसे iPC मुख्य रूप से ट्रीटेड इंडस्ट्रियल या कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) के एफ्लुएंट से लेने का इरादा रखती है। कंपनी ने इस पानी का 80-85 फीसदी हिस्सा रीसाइकल करने का प्रस्ताव दिया है और सिर्फ बैकअप के तौर पर बोरवेल से कम पानी निकालेगी।
कर्नाटक हाइपरस्केल डेटा सेंटर और क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए पसंदीदा जगह बन गया है और iPC का यह प्रस्ताव अगर आगे बढ़ता है तो राज्य की इंडस्ट्रियल पाइपलाइन में किसी एक कंपनी का सबसे बड़े कमिटमेंट में से एक होगा। हाइड्रोजन प्रोडक्शन और हाई डेंसिटी कंप्यूटिंग पर दोहरा फोकस यह दिखाता है कि निवेश प्लानिंग में एनर्जी ट्रांजिशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे एक साथ आ रहे हैं।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लक्ज़मबर्ग की कंपनी iPC कर्नाटक में कितना निवेश करेगी?
iPC कर्नाटक में ग्रीन हाइड्रोजन और डेटा सेंटर प्रोजेक्ट में कुल ₹83,480 करोड़ का निवेश करेगी। पहले चरण में ही ₹17,114 करोड़ खर्च होंगे।
इस प्रोजेक्ट के लिए कितनी ज़मीन चाहिए और कहाँ बनेगा?
iPC को 1,000 एकड़ ज़मीन की ज़रूरत है। यह प्रोजेक्ट बेंगलुरु-तुमकुरु प्लेटफॉर्म में बनेगा और इसे तीन चरणों में बनाया जाएगा।
डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन की क्षमता कितनी होगी?
पूरे प्रोजेक्ट में 2,250 मेगावाट आईटी लोड के साथ 1,000 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन कैपेसिटी होगी। पहले चरण में 400 मेगावाट डेटा सेंटर और 500 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन बनेगा।
इस प्रोजेक्ट को हर दिन कितना पानी चाहिए?
प्रोजेक्ट को हर दिन करीब 1 करोड़ 30 लाख लीटर पानी की ज़रूरत होगी। iPC इसका 80-85 फीसदी रीसाइकल करेगी और मुख्यतः ट्रीटेड इंडस्ट्रियल एफ्लुएंट से पानी लेगी।
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