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केरल का अनोखा कैलेंडर, सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है

केरल की विरासत को दिखाने वाला खास कैलेंडर त्रिशूर के ग्रामिका ई.के. दिवाकरण पोट्टी मेमोरियल लाइब्रेरी ने मलयालम कैलेंडर का एक अनोखा संस्करण जारी किया है, जो केरल की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक समय

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केरल की विरासत को दिखाने वाला खास कैलेंडर

त्रिशूर के ग्रामिका ई.के. दिवाकरण पोट्टी मेमोरियल लाइब्रेरी ने मलयालम कैलेंडर का एक अनोखा संस्करण जारी किया है, जो केरल की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक समय गणना प्रणाली को एक साथ जोड़ता है। 16 अगस्त को लॉन्च किए गए इस कैलेंडर में कोल्लवर्षम 1202 के दिनांक प्राचीन वट्टेझुतु लिपि में छपे हैं, जो क्षेत्र की भाषाई इतिहास की झलक पेश करते हैं।

कैलेंडर में छुपा सांस्कृतिक खजाना

यह कैलेंडर सिर्फ तारीखें बताने का साधन नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक संग्रहालय भी है। इसमें 116 प्रमुख हस्तियों की तस्वीरें शामिल हैं, जिनमें स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, लेखक और कलाकार शामिल हैं। साथ ही, 317 व्यक्तित्वों की पुण्यतिथि और अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व स्मारक घटनाओं को भी दर्शाया गया है।

कैलेंडर में भारत के संविधान की प्रस्तावना और उसके निर्माताओं की तस्वीरें भी शामिल हैं, जिससे इसका ऐतिहासिक और शैक्षिक महत्व और बढ़ जाता है। यह कैलेंडर मलयालम वर्ष के चिंगम 1 (17 अगस्त, 2026) से लेकर कार्किडकम 31 (16 अगस्त, 2027) तक के दिनों को कवर करता है, और इसमें अरबी अंकों और ग्रेगोरियन तारीखों को भी शामिल किया गया है ताकि इसे ज्यादा लोगों के लिए उपयोगी बनाया जा सके।

केरल की पारंपरिक समय गणना को बचाने की कोशिश

ग्रामिका के लिए यह पहल कोल्लवर्षम, केरल की पारंपरिक कैलेंडर प्रणाली को आधुनिक जीवन में बनाए रखने और बढ़ावा देने की एक कोशिश है। कवि बालकृष्णन अंचथ ने इस कैलेंडर को औपचारिक रूप से लॉन्च किया और लेखक वल्सलन वथुस्सेरी को इसकी प्रति भेंट की। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्रामिका के अध्यक्ष पी.के. किट्टन ने की।

हर महीने केरल की विरासत को सलाम

पारंपरिक लिपि, ऐतिहासिक घटनाएं, साहित्यिक योगदान, कलात्मक उपलब्धियां और संवैधानिक मूल्यों को शामिल करके यह कैलेंडर हर महीने को उन लोगों और विचारों का उत्सव बनाने की कोशिश करता है जिन्होंने केरल और भारत को आकार दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की समृद्ध विरासत आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहे।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल का अनोखा कैलेंडर कब लॉन्च हुआ?

यह कैलेंडर 16 अगस्त को लॉन्च हुआ।

इस कैलेंडर में क्या खास बातें शामिल हैं?

इसमें 116 प्रमुख हस्तियों की तस्वीरें, 317 व्यक्तित्वों की पुण्यतिथि और भारत के संविधान की प्रस्तावना शामिल हैं।

कैलेंडर का उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य केरल की पारंपरिक समय गणना को बचाना और राज्य की समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना है।

कैलेंडर में कौन सी तारीखें शामिल हैं?

यह कैलेंडर मलयालम वर्ष के चिंगम 1 (17 अगस्त, 2026) से लेकर कार्किडकम 31 (16 अगस्त, 2027) तक के दिनों को कवर करता है।

कैलेंडर को किसने लॉन्च किया?

कवि बालकृष्णन अंचथ ने इस कैलेंडर को औपचारिक रूप से लॉन्च किया।

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