बहराइच जेल में स्वतंत्रता दिवस पर अधिकारियों को मिले स्वर्ण-रजत पदक
बहराइच की जेल में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें तीन अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके उत्कृष्ट कार्य और योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
बहराइच की जेल में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें तीन अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके उत्कृष्ट कार्य और योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश के महानिदेशक कारागार ने इन अधिकारियों को 1 स्वर्ण पदक और 2 रजत पदक देकर उनकी मेहनत और समर्पण की सराहना की।
कार्यक्रम में प्रभारी जेल अधीक्षक अजय कुमार झा ने उप कारापाल रंजीत सिंह को स्वर्ण पदक प्रदान किया। इसके साथ ही उर्दू अनुवादक मोहम्मद शुऐब और हेड जेल वार्डन प्रभाकर त्रिपाठी को रजत पदक से सम्मानित किया गया। इस मौके पर जेल के सभी स्टाफ और बंदी भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस विशेष समारोह का हिस्सा बनकर इसे और यादगार बनाया।
यह सम्मान उन अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया गया जिन्होंने जेल प्रशासन में अपनी जिम्मेदारियों को न केवल पूरी ईमानदारी से निभाया बल्कि अपने काम से मिसाल भी पेश की। स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण दिन पर यह सम्मान समारोह आयोजित करना उनके योगदान को और भी खास बनाता है।
जेल प्रशासन का कहना है कि ऐसे कार्यक्रम न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि उन्हें और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित भी करते हैं। सम्मानित अधिकारियों ने भी इस मौके पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है और वे आगे भी इसी तरह अपनी जिम्मेदारियों को निभाते रहेंगे।
इस प्रकार, बहराइच जेल में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल अधिकारियों के योगदान को मान्यता देने का मौका बना, बल्कि स्वतंत्रता दिवस के जश्न को भी खास बना दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बहराइच जेल में स्वतंत्रता दिवस पर किन अधिकारियों को पदक मिले?
उप कारापाल रंजीत सिंह को स्वर्ण पदक मिला। उर्दू अनुवादक मोहम्मद शुऐब और हेड जेल वार्डन प्रभाकर त्रिपाठी को रजत पदक से सम्मानित किया गया।
ये पदक किस वजह से दिए गए?
ये पदक उन अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके उत्कृष्ट कार्य, योगदान, ईमानदारी और जेल प्रशासन में अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए दिए गए।
इस समारोह में किसने पदक प्रदान किए?
प्रभारी जेल अधीक्षक अजय कुमार झा ने इन अधिकारियों को पदक प्रदान किए। पदक उत्तर प्रदेश के महानिदेशक कारागार की ओर से दिए गए थे।
जेल प्रशासन के अनुसार ऐसे कार्यक्रम क्यों जरूरी हैं?
जेल प्रशासन का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाते हैं और उन्हें और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करते हैं।
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