गाजियाबाद के किसानों का धरना जारी, 22 साल से मुआवजा लंबित
गाजियाबाद के कनावनी गांव में किसानों का धरना दूसरे दिन भी जारी है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर किसानों ने पहले धरनास्थल पर तिरंगा फहराया और 80वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया।
गाजियाबाद के कनावनी गांव में किसानों का धरना दूसरे दिन भी जारी है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर किसानों ने पहले धरनास्थल पर तिरंगा फहराया और 80वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया। इसके बाद उन्होंने अपनी जमीन और हक की लड़ाई को लेकर फिर से धरना शुरू कर दिया। किसानों की मांग है कि उन्हें उनकी जमीन का उचित मुआवजा दिया जाए, जो पिछले 22 सालों से लंबित है।
किसानों का आरोप है कि उनकी जमीन 22 साल पहले अधिग्रहित की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 1 जनवरी 2020 के सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा देने का आदेश दिया है, लेकिन प्रशासन कनावनी के वास्तविक सर्किल रेट के बजाय आसपास के गांवों के कम सर्किल रेट लागू करने की कोशिश कर रहा है। किसानों का कहना है कि इससे उन्हें उनकी जमीन की सही कीमत नहीं मिल रही है और उनके साथ अन्याय हो रहा है।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि उनकी जमीन को कम कीमत पर खरीदने के बाद विकास के नाम पर लाखों रुपये में बेचने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि उनकी जमीन का नुकसान उन्हें क्यों झेलना पड़े, जबकि मुनाफा कोई और कमाए। किसानों ने साफ कर दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक ही मुआवजा चाहते हैं और कम दर पर मुआवजा किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि कनावनी के वास्तविक सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा दिया जाए और 22 साल से चले आ रहे इस विवाद का न्यायपूर्ण समाधान किया जाए। फिलहाल, धरना जारी है और किसानों ने अपने हक की लड़ाई को लेकर संघर्ष तेज करने का संकेत दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गाजियाबाद के किसानों का धरना कब से जारी है?
गाजियाबाद के कनावनी गांव में किसानों का धरना दूसरे दिन भी जारी है।
किसानों की मुख्य मांग क्या है?
किसानों की मांग है कि उन्हें उनकी जमीन का उचित मुआवजा दिया जाए, जो पिछले 22 सालों से लंबित है।
किसानों का आरोप क्या है?
किसानों का आरोप है कि उनकी जमीन 22 साल पहले अधिग्रहित की गई थी और प्रशासन कम सर्किल रेट लागू करने की कोशिश कर रहा है।
किसानों ने क्या स्पष्ट किया है?
किसानों ने साफ कर दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक ही मुआवजा चाहते हैं और कम दर पर मुआवजा किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे।
किसानों ने प्रशासन से क्या मांग की है?
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि कनावनी के वास्तविक सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा दिया जाए।
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