करो संभव ने ज़ेरोधा से जुटाए 56 करोड़, मिनरल रिकवरी बढ़ाने का लक्ष्य
करो संभव ने ज़ेरोधा की रेनमैटर से जुटाए 56 करोड़ रुपये, अहम मिनरल रिकवरी बढ़ाने का लक्ष्य करो संभव ने ज़ेरोधा की रेनमैटर से 56 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह फंडिंग प्री-सीरीज़ ए राउंड में हुई।
करो संभव ने ज़ेरोधा की रेनमैटर से 56 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह फंडिंग प्री-सीरीज़ ए राउंड में हुई। कंपनी इस रकम का इस्तेमाल पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स और वेस्ट से कीमती और अहम मिनरल्स निकालने के लिए अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में करेगी।
2017 में शुरू हुई करो संभव ने पिछले नौ सालों में पूरे भारत में ई-वेस्ट कलेक्शन और रीसाइक्लिंग नेटवर्क तैयार किया है। अब तक यह कंपनी अपने अंदरूनी संसाधनों से ही चल रही थी। फिलहाल इसके पास दो रीसाइक्लिंग प्लांट हैं, 50 से ज्यादा शहरों में कलेक्शन नेटवर्क है और 1,50,000 मीट्रिक टन से ज्यादा वेस्ट को प्रोसेस कर चुकी है।
भारत की सर्कुलर इकोनॉमी को आगे बढ़ाने में योगदान के लिए इस कंपनी को पहचान मिली है। खासकर 2021 में इसे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के श्वाब फाउंडेशन से 'सोशल एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर इंडिया' का अवॉर्ड मिला था।
सोना, चांदी, कॉपर, लिथियम, टिन, इंडियम और प्लेटिनम ग्रुप मेटल जैसे अहम मिनरल्स की डिमांड लगातार बढ़ रही है। ये मिनरल्स इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट, डिफेंस सिस्टम, एयरोस्पेस और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होते हैं। करो संभव का मकसद इन स्ट्रैटेजिक रिसोर्सेज की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
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