इसरो प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप्स को प्रतिद्वंद्वी नहीं साथी मानती है
इसरो सीनियर साइंटिस्ट ने कहा कि प्राइवेट स्पेस कंपनियां प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साथी हैं जो स्पेस टेक्नोलॉजी की पहुंच बढ़ाएंगी।
भारत की स्पेस एजेंसी इसरो देश के उभरते प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप्स को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि नए साथी मानती है जो स्पेस टेक्नोलॉजी की पहुंच बढ़ाएंगे, एक सीनियर साइंटिस्ट ने नेशनल स्पेस डे पर कहा।
"इसे कंपटीशन नहीं कहना चाहिए बल्कि नए हाथों का जुड़ना कहना चाहिए," इसरो सेंटर अहमदाबाद के सीनियर साइंटिस्ट निशांत जायसवाल ने राजस्थान पत्रिका को इंटरव्यू में कहा। एजेंसी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए प्राइवेट कंपनियों को बढ़ावा दे रही है, जिससे स्पेस टेक्नोलॉजी का फायदा ज्यादा लोगों तक पहुंचेगा, उन्होंने समझाया।
नेशनल स्पेस डे क्यों अहम है
भारत 23 अगस्त को नेशनल स्पेस डे मनाता है ताकि चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक उपलब्धि को याद किया जा सके। 2023 में इसी तारीख को मिशन का विक्रम लैंडर चांद के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक उतरा था, और तब से हर साल देश यह सालगिरह मनाता है।
सैटेलाइट डेटा नागरिकों और पर्यावरण की सेवा करता है
इसरो की टेक्नोलॉजी सैटेलाइट के जरिए बाढ़, तूफान और मौसम की रियल टाइम जानकारी देती है। इसका इस्तेमाल टेली-मेडिसिन, टेली-एजुकेशन, जंगलों की निगरानी और मिट्टी की नमी और फसलों की हालत का आकलन करने में भी होता है, जो आम नागरिकों और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए बेहद काम का है।
नासा के साथ जॉइंट मिशन और आगे की योजनाएं
निसार मिशन, इसरो और नासा का जॉइंट प्रोजेक्ट, भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, जंगलों के इलाके, खेती, मिट्टी की नमी और ग्लेशियरों में बदलाव पर नजर रखेगा। इसका डेटा बादल और खराब मौसम के दौरान भी काम का रहेगा।
चंद्रयान-4 का लक्ष्य चांद से मिट्टी और पत्थर के नमूने वापस धरती पर लाना है। चंद्रयान-5/लूपेक्स में जापान सहयोगी के तौर पर शामिल होगा। भारत 2040 तक स्पेस स्टेशन बनाने और इंसानों को चांद पर भेजने की दिशा में काम कर रहा है। शुक्रयान मिशन वीनस के वातावरण और सतह का अध्ययन करेगा।
इसरो साइंटिस्ट बनने का रास्ता
युवा साइंस और मैथ्स के साथ 12वीं पूरी करके, फिर बीई/बीटेक या संबंधित एमएससी करके इसरो जॉइन कर सकते हैं। उन्हें नेशनल लेवल की परीक्षा पास करनी होगी, फिर रिटन टेस्ट और इंटरव्यू देकर चयन होता है।
स्रोत: Patrika
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इसरो प्राइवेट स्पेस कंपनियों को किस नजर से देखती है?
इसरो प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप्स को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साथी मानती है। इसरो के सीनियर साइंटिस्ट निशांत जायसवाल ने कहा कि इसे कंपटीशन नहीं बल्कि नए हाथों का जुड़ना कहना चाहिए। एजेंसी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए इन कंपनियों को बढ़ावा दे रही है ताकि स्पेस टेक्नोलॉजी का फायदा ज्यादा लोगों तक पहुंचे।
नेशनल स्पेस डे 23 अगस्त को क्यों मनाया जाता है?
भारत 23 अगस्त को नेशनल स्पेस डे मनाता है ताकि चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक उपलब्धि को याद किया जा सके। 2023 में इसी तारीख को चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर चांद के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक उतरा था।
इसरो की सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कहां-कहां होता है?
इसरो की सैटेलाइट टेक्नोलॉजी बाढ़, तूफान और मौसम की रियल टाइम जानकारी देती है। इसका इस्तेमाल टेली-मेडिसिन, टेली-एजुकेशन, जंगलों की निगरानी और मिट्टी की नमी तथा फसलों की हालत का आकलन करने में भी होता है।
निसार मिशन क्या है और इसमें कौन शामिल है?
निसार मिशन इसरो और नासा का जॉइंट प्रोजेक्ट है। यह मिशन भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, जंगलों के इलाके, खेती, मिट्टी की नमी और ग्लेशियरों में बदलाव पर नजर रखेगा। इसका डेटा बादल और खराब मौसम के दौरान भी काम करेगा।
इसरो साइंटिस्ट बनने के लिए क्या करना होगा?
युवा को साइंस और मैथ्स के साथ 12वीं पास करनी होगी, फिर बीई/बीटेक या संबंधित एमएससी करना होगा। इसके बाद नेशनल लेवल की परीक्षा पास करनी होगी, फिर रिटन टेस्ट और इंटरव्यू देकर चयन होता है।
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