भारत टी-90 टैंक और सुखोई विमान देश में ही बनाएगा
भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है। टी-90 टैंक, सुखोई लड़ाकू विमान और युद्धपोत के पुर्जे अब देश में ही बनेंगे।
पिछले पांच साल में भारत की रक्षा निर्माण मुहिम ने 15,700 से ज्यादा सैन्य चीजों को देश में ही बनाने का काम पूरा किया है, जिससे करीब 9,000 करोड़ रुपये के आयात को देसी उत्पादन की तरफ मोड़ा जा सकता है। अब स्थानीय निर्माण के लिए तय किए गए पुर्जों की एक नई लिस्ट जारी की गई है।
अहम सिस्टम में आत्मनिर्भरता का विस्तार
देसी बनाने की इस मुहिम में फ्रंटलाइन सैन्य प्लेटफॉर्म के अहम पुर्जे शामिल हैं, जिनमें टी-90 टैंक, सुखोई लड़ाकू विमान और नौसेना के युद्धपोत हैं। पिछले पांच साल में 15,700 से ज्यादा रक्षा चीजों को देश में बनाना भारत के रक्षा औद्योगिक आधार के बड़े विस्तार को दिखाता है।
9,000 करोड़ रुपये के आयात को बदलने का अनुमान उस विदेशी खरीद के पैमाने को दिखाता है जो अब देसी आपूर्तिकर्ताओं की तरफ शिफ्ट होगी। यह रक्षा खर्च के पैटर्न पर देसी बनाने के प्रोग्राम के मापने लायक आर्थिक असर को दर्शाता है।
एक नई लिस्ट का आना यह बताता है कि रक्षा प्रतिष्ठान उन चीजों के दायरे को सिस्टमैटिक तरीके से बढ़ा रहा है जिन्हें स्थानीय उत्पादन के लिए चुना गया है, और यह पहले से देसी बनाई जा चुकीं 15,700 चीजों से आगे है। इस चरणबद्ध तरीके से पता चलता है कि कई हथियार सिस्टम की कैटेगरी में मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को गहरा करने की कोशिश जारी है।
टी-90 मेन बैटल टैंक, सुखोई फाइटर जेट और युद्धपोत के पुर्जे हजारों सबसिस्टम और पार्ट्स वाले जटिल प्लेटफॉर्म हैं, जिससे इन्हें देसी बनाना तकनीकी रूप से मुश्किल काम है। इन सिस्टम के पुर्जों को देसी बनाने में कामयाबी धातु विज्ञान से लेकर सटीक इंजीनियरिंग तक के क्षेत्रों में बढ़ती औद्योगिक परिपक्वता को दिखाती है।
स्रोत: Live Hindustan
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत पिछले पांच साल में रक्षा सामान में क्या हासिल किया है?
भारत ने पिछले पांच साल में 15,700 से ज्यादा सैन्य चीजों को देश में ही बनाने काम पूरा किया है। इससे करीब 9,000 करोड़ रुपये के आयात को देसी उत्पादन की तरफ मोड़ा जा सका है।
कौन से बड़े हथियार सिस्टम अब देश में ही बनेंगे?
टी-90 मेन बैटल टैंक, सुखोई लड़ाकू विमान और नौसेना के युद्धपोत के पुर्जे अब देश में ही बनाए जाएंगे।
इन जटिल प्लेटफॉर्म्स को देश में बनाना क्यों मुश्किल है?
ये टैंक, विमान और युद्धपोत हजारों सबसिस्टम और पार्ट्स वाले बहुत जटिल प्लेटफॉर्म हैं, जिन्हें बनाने के लिए धातु विज्ञान से लेकर सटीक इंजीनियरिंग तक में बेहतरीन तकनीक की जरूरत होती है।
यह पहल भारत के लिए क्यों जरूरी है?
इन सैन्य चीजों को देश में बनाने से भारत विदेशों पर कम निर्भर हो जाता है और अपनी रक्षा क्षेत्र की औद्योगिक ताकत को मजबूत करता है। साथ ही, लाखों करोड़ रुपये की बचत भी होती है।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
बहराइच के स्कूल में पेड़ काटने की तैयारी, पर्यावरण नीति पर सवाल
- 2
आयुष्मान कार्ड में गलतियां सुधारना हुआ आसान, नया पोर्टल शुरू
- 3
बहराइच में एसपी ने जनता दर्शन के दौरान सुनीं सभी शिकायतें
- 4
बहराइच में 90 हजार क्विंटल चीनी के स्टॉक की जांच, कालाबाजारी पर सरकार सख्त
- 5
बहराइच की बाढ़ से प्रभावित इलाकों का जायजा लेने पहुंचे मंत्री दिनेश प्रताप सिंह
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।