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हांगकांग ने गरीबों की पहचान के लिए 21 नए पैमानों का किया इस्तेमाल

हांगकांग अब गरीबों की पहचान के लिए 21 नए पैमानों का इस्तेमाल करेगा, आय आधारित मापदंड हटाया हांगकांग ने गरीबी मापने के लिए एक नया तरीका अपनाया है।

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हांगकांग ने गरीबी मापने के लिए एक नया तरीका अपनाया है। अब तक आय आधारित मापदंड का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब इसे हटाकर 21 नए इंडिकेटर्स का फ्रेमवर्क लागू किया गया है। इसका मकसद गरीब आबादी का ज्यादा सटीक आकलन करना है। सरकार का कहना है कि पहले का तरीका पब्लिक खर्च, जैसे हाउसिंग और हेल्थकेयर पर होने वाले असर को नजरअंदाज कर गरीबी का आंकड़ा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाता था।

गुरुवार को जारी 224 पन्नों की रिपोर्ट में सरकार ने पहली बार "सोशल ट्रांसफर वैल्यू" का कॉन्सेप्ट पेश किया। यह मापदंड उन परिवारों की प्रभावी आय को दर्शाता है, जो सब्सिडी वाले पब्लिक सर्विसेज, जैसे हाउसिंग और हेल्थकेयर का फायदा उठाते हैं, बिना उनकी पूरी मार्केट कीमत चुकाए। चीफ सेक्रेटरी एरिक चान क्वोक-की, जो कमीशन ऑन पॉवर्टी के प्रमुख भी हैं, ने इस रिपोर्ट को हांगकांग की गरीबी से लड़ने की कोशिशों का सार बताया।

चान ने कहा कि गरीबों की बदलती जरूरतों को देखते हुए नीतियों में बदलाव जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले सिर्फ हाउसहोल्ड इनकम पर निर्भर रहने से गरीबी की तस्वीर गलत दिखती थी। इससे सरकार के लिए संसाधनों को सही जगह लगाना और जरूरतमंदों की पहचान करना मुश्किल हो रहा था।

2013 से हांगकांग में गरीबी रेखा को मीडियन हाउसहोल्ड इनकम के 50 प्रतिशत के आधार पर तय किया जाता था, जिसमें पॉलिसी इंटरवेंशन को शामिल नहीं किया जाता था। हर साल इस पर रिपोर्ट जारी होती थी। अब नए फ्रेमवर्क के साथ यह तरीका पूरी तरह बदल दिया गया है, ताकि जरूरतमंदों को बेहतर तरीके से मदद पहुंचाई जा सके और संसाधनों का सही इस्तेमाल हो।

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