चीनी के दामों में 20 रुपए की बढ़ोतरी, सरकार ने लगाई स्टॉक लिमिट
एक महीने में चीनी की कीमत 48 से 57 रुपए प्रति किलो हुई। सरकार ने बड़े खरीदारों पर स्टॉक लिमिट लगा दी ताकि त्योहारों में जमाखोरी न हो।
केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर चीनी खरीदने वालों पर स्टॉक लिमिट लगा दी है जो महीने में 10 मीट्रिक टन से ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं, उन्हें सिर्फ 15 दिन की जरूरत के बराबर ही स्टॉक रखने की इजाजत होगी क्योंकि रिटेल कीमतें सिर्फ एक महीने में 20 रुपए प्रति किलो से ज़्यादा बढ़ गई हैं।
तेज बढ़ोतरी से सरकार ने उठाया कदम
देश भर में चीनी की औसत रिटेल कीमत पिछले एक महीने में 48 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 57 रुपए प्रति किलो हो गई, जबकि ज़्यादा से ज़्यादा रिटेल कीमतें 68-70 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गईं—यानी 20 रुपए से ज़्यादा की बढ़ोतरी। त्योहारों के सीज़न से पहले यह तेज उछाल देखकर अधिकारियों ने कदम उठाया ताकि लोगों की डिमांड बढ़ने से पहले काबू पाया जा सके।
दो तरह की स्टॉक पाबंदियां अब लागू
थोक खरीदारों पर नई कैप, जो 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी, एक अगस्त के पुराने आदेश के बाद आई है जिसमें डीलरों को किसी भी वक्त 4,000 क्विंटल से ज़्यादा स्टॉक रखने की मनाही थी और मिलने की तारीख से 30 दिन से ज़्यादा चीनी रखने पर रोक थी। दोनों उपाय 30 नवंबर तक लागू रहेंगे।
GST डेटा से होगी निगरानी
अधिकारी चीनी मिलों से खरीद और इस्तेमाल के डेटा को GST रिटर्न से मिलान करके निगरानी करेंगे, खासकर चीनी से जुड़ी HSN कोड एंट्री को देखकर पता लगाएंगे कि खरीदारों ने कितना खरीदा है और कितना इस्तेमाल किया है। इस सिस्टम से सरकार टैक्स रिकॉर्ड के जरिए स्टॉक जमा करने पर नज़र रख सकेगी।
त्योहारों की डिमांड से जमाखोरी का डर
समय का चुनाव सितंबर-नवंबर की अवधि को देखते हुए किया गया है जब गणेश उत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों में मिठाई, ड्रिंक्स और दूसरी चीज़ों की डिमांड बढ़ जाती है जिनमें चीनी की जरूरत होती है। सरकार को शक है कि बड़े खरीदार पहले से ही चीनी का स्टॉक जमा कर सकते हैं, जिससे मार्केट में सप्लाई कम हो जाएगी और ज़्यादा इस्तेमाल के वक्त कीमतें और बढ़ जाएंगी।
इन पाबंदियों का मकसद त्योहारों से पहले जमाखोरी को रोकना है जो कीमतों पर दबाव बढ़ा सकती है जब घरों में खरीदारी आम तौर पर बढ़ जाती है।
स्रोत: Patrika
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सरकार ने चीनी पर स्टॉक लिमिट क्यों लगाई है?
एक महीने में चीनी की कीमत 48 रुपए से बढ़कर 57 रुपए प्रति किलो हो गई है, कहीं-कहीं 68-70 रुपए तक पहुंच गई है। त्योहारों के सीज़न में जमाखोरी को रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया ताकि कीमतें और न बढ़ें।
बड़े खरीदारों को कितना स्टॉक रखने की इजाजत है?
जो लोग महीने में 10 मीट्रिक टन से ज़्यादा चीनी खरीदते हैं, उन्हें सिर्फ 15 दिन की जरूरत के बराबर ही स्टॉक रखने की इजाजत है। इसके अलावा, डीलरों को किसी भी वक्त 4,000 क्विंटल से ज़्यादा स्टॉक नहीं रखना चाहिए।
ये पाबंदियां कब तक लागू रहेंगी?
स्टॉक लिमिट 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी क्योंकि इस दौरान गणेश उत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं।
सरकार स्टॉक लिमिट की निगरानी कैसे करेगी?
सरकार चीनी मिलों से खरीद और इस्तेमाल के डेटा को GST रिटर्न से मिलान करके निगरानी करेगी। GST में चीनी की HSN कोड एंट्री से पता चल जाएगा कि खरीदारों ने कितना स्टॉक रखा है।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
बहराइच के स्कूल में पेड़ काटने की तैयारी, पर्यावरण नीति पर सवाल
- 2
आयुष्मान कार्ड में गलतियां सुधारना हुआ आसान, नया पोर्टल शुरू
- 3
बहराइच में एसपी ने जनता दर्शन के दौरान सुनीं सभी शिकायतें
- 4
बहराइच में 90 हजार क्विंटल चीनी के स्टॉक की जांच, कालाबाजारी पर सरकार सख्त
- 5
बहराइच की बाढ़ से प्रभावित इलाकों का जायजा लेने पहुंचे मंत्री दिनेश प्रताप सिंह
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।