सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में सुधार के लिए कमेटी बनाई
सरकार टेंडर प्रक्रिया में बड़े बदलाव करेगी, पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक ही सिस्टम में लाएगी सरकार टेंडर प्रक्रिया में सुधार करेगी, पारदर्शिता बढ़ाने की योजना राज्य सरकार ने टेंडर प्रक्रिया को एक ही
सरकार टेंडर प्रक्रिया में बड़े बदलाव करेगी, पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक ही सिस्टम में लाएगी
सरकार टेंडर प्रक्रिया में सुधार करेगी, पारदर्शिता बढ़ाने की योजना
राज्य सरकार ने टेंडर प्रक्रिया को एक ही फ्रेमवर्क में लाने और इसे आसान बनाने के लिए बड़े सुधारों की घोषणा की है। हाल ही में हुई कैबिनेट मीटिंग में ये फैसला लिया गया। इसके तहत एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाएगी, जो मौजूदा प्रक्रियाओं की समीक्षा करेगी और पारदर्शिता व निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बदलाव सुझाएगी।
राष्ट्रीय मानकों की समीक्षा करेगी कमेटी
यह कमेटी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया जैसी राष्ट्रीय एजेंसियों की प्रक्रियाओं का अध्ययन करेगी ताकि राज्य की प्रक्रियाओं को बेस्ट प्रैक्टिस के साथ जोड़ा जा सके। इन सुधारों के तहत GO Ms 94, जो टेंडर सिस्टम और इंजीनियरिंग वर्क्स को रेगुलेट करता है, में बदलाव किया जाएगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ योग्य बोलीदाताओं को ही मिले और किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
GO Ms 94 की फिर से समीक्षा
राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने GO Ms 94 को टेंडर प्रक्रिया का "मूल दस्तावेज" बताया। उन्होंने कहा कि यह 2003 से लागू है, लेकिन समय-समय पर इसमें मनमाने बदलाव किए गए हैं। अलग-अलग विभागों और कॉरपोरेशनों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से अलग आदेश जारी किए, जिससे इसमें असंगतियां आ गईं। कैबिनेट ने इन गड़बड़ियों को ठीक कर एक पारदर्शी और एक समान सिस्टम बनाने का फैसला किया है। श्रीनिवास रेड्डी ने कहा, "प्रोजेक्ट्स और कामों के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करना, प्रशासनिक मंजूरी लेना और अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। कैबिनेट ने इन प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए आदेश में सुधार करने का फैसला किया है।"
कैबिनेट के अन्य फैसले
एक अन्य फैसले में, कैबिनेट ने 2018 के पंचायत राज एक्ट में संशोधन को मंजूरी दी है। अब ग्राम पंचायतें अपना रेवेन्यू ट्रेजरी अकाउंट की बजाय नजदीकी बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स में जमा कर सकेंगी। इससे स्थानीय निकायों के वित्तीय कामकाज में आसानी होगी।
इसके अलावा, कैबिनेट ने नगरपालिकाओं और कॉरपोरेशनों में पांच को-ऑप्टेड मेंबर पदों में से एक पद ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए आरक्षित करने का फैसला किया है। यह कदम समावेशिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। साथ ही, कैबिनेट ने धर्मपुरी डिग्री कॉलेज के लिए 29 पदों को मंजूरी दी है। यह फैसला मंत्री अदलुरी लक्ष्मण कुमार के अनुरोध पर लिया गया।
क्यों है यह अहम
टेंडर प्रक्रिया में सुधार का मकसद लंबे समय से चली आ रही पक्षपात और गड़बड़ियों की समस्याओं को खत्म करना है। सरकार चाहती है कि पब्लिक वर्क्स मेरिट और पारदर्शिता के आधार पर दिए जाएं। सिस्टम को एक फ्रेमवर्क में लाकर और पुराने प्रावधानों में बदलाव करके सरकार अपने प्रोक्योरमेंट सिस्टम में लोगों का भरोसा बढ़ाना चाहती है। इसके अलावा, कैबिनेट के अन्य फैसले विकेंद्रीकरण, समावेशिता और लंबित विकास कार्यों को पूरा करने पर फोकस दिखाते हैं।
स्रोत: The Hindu
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