20 साल बाद सनस्क्रीन में बेमोट्रिजिनॉल की नई खोज हुई है
20 साल बाद सनस्क्रीन में बड़ी खोज, डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताया क्या है नया 20 साल बाद सनस्क्रीन में बड़ी खोज: बेमोट्रिजिनॉल क्यों है खास?
20 साल बाद सनस्क्रीन में बड़ी खोज, डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताया क्या है नया
20 साल बाद सनस्क्रीन में बड़ी खोज: बेमोट्रिजिनॉल क्यों है खास?
अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने बेमोट्रिजिनॉल को मंजूरी दी है। ये पिछले दो दशकों में पहली बार किसी नए सनस्क्रीन एक्टिव इंग्रीडिएंट को क्लियर किया गया है। हालांकि ये पूरी तरह नया मॉलिक्यूल नहीं है, लेकिन इस डेवलपमेंट ने दुनियाभर के डर्मेटोलॉजिस्ट्स में उत्साह पैदा कर दिया है क्योंकि ये इंग्रीडिएंट अमेरिका के बाहर कई देशों में पहले से ही अपनी पहचान बना चुका है।
बेमोट्रिजिनॉल क्या है और ये क्यों है खास?
बेमोट्रिजिनॉल को उसकी ब्रॉड-स्पेक्ट्रम प्रोटेक्शन के लिए सराहा जाता है। ये UVA और UVB दोनों किरणों को ब्लॉक करता है। UVB किरणें सनबर्न का कारण बनती हैं, जबकि UVA किरणें त्वचा के अंदर गहराई तक जाकर समय से पहले एजिंग, पिगमेंटेशन, त्वचा की इलास्टिसिटी खत्म होने और स्किन कैंसर के खतरे को बढ़ाती हैं। मौजूदा सनस्क्रीन इंग्रीडिएंट्स की तुलना में बेमोट्रिजिनॉल UVA प्रोटेक्शन में ज्यादा प्रभावी है, जो इसे खास बनाता है।
मौजूदा सनस्क्रीन से कैसे अलग है?
ज्यादातर सनस्क्रीन कई फिल्टर्स पर निर्भर करते हैं क्योंकि हर इंग्रीडिएंट या तो UVB या UVA प्रोटेक्शन में विशेषज्ञ होता है। लेकिन बेमोट्रिजिनॉल दोनों तरह की किरणों के खिलाफ प्रभावी है। इसकी एक और बड़ी खासियत है इसकी हाई फोटोस्टेबिलिटी, यानी ये सूरज की रोशनी में जल्दी खराब नहीं होता। इससे लंबे समय तक भरोसेमंद प्रोटेक्शन मिलता है। इसके अलावा, बेमोट्रिजिनॉल अन्य सनस्क्रीन फिल्टर्स को भी स्टेबल करता है, जिससे उनकी प्रभावशीलता बढ़ जाती है।
क्या ये बेहतर स्किन प्रोटेक्शन देता है?
हां, खासकर UVA किरणों के खिलाफ, जो फोटोएजिंग के लिए जिम्मेदार होती हैं। ये किरणें त्वचा के कोलेजन और इलास्टिन को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे झुर्रियां, त्वचा का लटकना और असमान पिगमेंटेशन होता है। लंबे समय तक UVA किरणों का असर स्किन कैंसर से भी जुड़ा है। हालांकि बेमोट्रिजिनॉल पहले से हुए नुकसान को ठीक नहीं कर सकता, लेकिन ये भविष्य में होने वाले नुकसान को रोकने के लिए अहम है।
सनस्क्रीन से जुड़ी आम शिकायतों का समाधान
कई लोग सनस्क्रीन का इस्तेमाल नहीं करते क्योंकि उन्हें इसकी ग्रीसी, चिपचिपी टेक्सचर या सफेद परत पसंद नहीं आती। बेमोट्रिजिनॉल की मदद से मैन्युफैक्चरर्स हल्के और ज्यादा आकर्षक सनस्क्रीन बना सकते हैं, जो प्रोटेक्शन से समझौता किए बिना बेहतर अनुभव देंगे। इससे लोग नियमित रूप से सनस्क्रीन इस्तेमाल करने लगेंगे और उनकी स्किन ज्यादा सुरक्षित रहेगी।
क्या बेमोट्रिजिनॉल सुरक्षित है?
हां, उपलब्ध डेटा के अनुसार। बेमोट्रिजिनॉल यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कई हिस्सों में सालों से सुरक्षित रूप से इस्तेमाल हो रहा है। इसके बड़े मॉलिक्यूलर साइज के कारण ये ब्लडस्ट्रीम में कम एब्जॉर्ब होता है, और स्टडीज में इसके शरीर में जमा होने का कोई बड़ा सबूत नहीं मिला है। FDA ने इसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता, फोटोस्टेबिलिटी और पर्यावरण पर असर की गहन समीक्षा की है, जिससे इसकी मजबूत सुरक्षा प्रोफाइल साबित होती है।
मिनरल सनस्क्रीन से तुलना
जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे मिनरल सनस्क्रीन अभी भी संवेदनशील त्वचा के लिए बेहतरीन ऑप्शन हैं। बेमोट्रिजिनॉल, एक केमिकल सनस्क्रीन के रूप में, उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प देता है। इसका मकसद मिनरल सनस्क्रीन को रिप्लेस करना नहीं है, बल्कि लोगों को ज्यादा विकल्प देना है ताकि वे नियमित रूप से सनस्क्रीन इस्तेमाल करें।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी बातें
सनस्क्रीन चुनते वक्त SPF 30 या उससे ज्यादा वाले ब्रॉड-स्पेक्ट्रम प्रोटेक्शन पर ध्यान दें, न कि किसी एक इंग्रीडिएंट पर। पर्याप्त मात्रा में लगाएं और हर दो-तीन घंटे में दोबारा लगाएं, खासकर पसीना आने या स्विमिंग के बाद। याद रखें, सनस्क्रीन सिर्फ सन प्रोटेक्शन का एक हिस्सा है—टोपी, सनग्लासेस, प्रोटेक्टिव कपड़े और छांव में रहने की कोशिश भी उतनी ही जरूरी है।
सनस्क्रीन टेक्नोलॉजी में ये नई खोज ज्यादा प्रभावी और यूजर-फ्रेंडली फॉर्मुलेशन ला सकती है, जिससे दुनियाभर में बेहतर सन प्रोटेक्शन आदतें बनेंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बेमोट्रिजिनॉल क्या है?
बेमोट्रिजिनॉल एक नया सनस्क्रीन इंग्रीडिएंट है जो UVA और UVB दोनों किरणों को ब्लॉक करता है।
बेमोट्रिजिनॉल की खासियत क्या है?
इसकी ब्रॉड-स्पेक्ट्रम प्रोटेक्शन और हाई फोटोस्टेबिलिटी इसे खास बनाती है।
क्या बेमोट्रिजिनॉल सुरक्षित है?
हां, बेमोट्रिजिनॉल सुरक्षित है और इसे कई देशों में सालों से इस्तेमाल किया जा रहा है।
बेमोट्रिजिनॉल मौजूदा सनस्क्रीन से कैसे अलग है?
यह दोनों UVA और UVB किरणों के खिलाफ प्रभावी है और जल्दी खराब नहीं होता।
क्या बेमोट्रिजिनॉल स्किन प्रोटेक्शन में बेहतर है?
हां, यह खासकर UVA किरणों के खिलाफ बेहतर प्रोटेक्शन देता है।
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