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जम्मू-कश्मीर के नेता डॉ. मुस्तफा कमाल का निधन, उम्र 84 वर्ष

डॉ. मुस्तफा कमाल, जो जम्मू-कश्मीर के 1953 से पहले की स्वायत्तता के समर्थक थे, का श्रीनगर में निधन जम्मू-कश्मीर की राजनीति के प्रमुख चेहरे और 1953 से पहले की स्वायत्तता के प्रबल समर्थक डॉ.

जम्मू-कश्मीर के नेता डॉ. मुस्तफा कमाल का निधन, उम्र 84 वर्ष
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डॉ. मुस्तफा कमाल, जो जम्मू-कश्मीर के 1953 से पहले की स्वायत्तता के समर्थक थे, का श्रीनगर में निधन

जम्मू-कश्मीर की राजनीति के प्रमुख चेहरे और 1953 से पहले की स्वायत्तता के प्रबल समर्थक डॉ. शेख मुस्तफा कमाल का मंगलवार को श्रीनगर में 84 साल की उम्र में निधन हो गया। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के छोटे भाई और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के चाचा कमाल पिछले कुछ महीनों से बीमार थे। एनसी के प्रवक्ता के मुताबिक, उनकी हालत चार दिन पहले और बिगड़ गई थी। उनका इलाज श्रीनगर के एक प्राइवेट अस्पताल में चल रहा था।

जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता के लिए आजीवन संघर्ष

कमाल नेशनल कॉन्फ्रेंस के उन गिने-चुने नेताओं में से थे, जिन्होंने हमेशा जम्मू-कश्मीर के 1953 से पहले की स्थिति बहाल करने की मांग की। उनका कहना था कि यह स्थिति बहाल करना ही क्षेत्र की राजनीतिक अनिश्चितता का समाधान है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी की 1953 में उनके पिता शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की गिरफ्तारी में भूमिका की कड़ी आलोचना की थी। इसे वह "काला दिन" कहते थे।

अपने इंटरव्यू में कमाल ने 1989 में जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद की शुरुआत के लिए 1953 के बाद क्षेत्र की विशेष स्थिति में "एकतरफा और असंवैधानिक कटौती" को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने 1953 से पहले की व्यवस्था की बहाली की मांग की, जिसमें जम्मू-कश्मीर को संचार, विदेश मामलों और रक्षा को छोड़कर सभी मामलों में स्वायत्तता प्राप्त थी। उन्होंने कहा था, "1952 का दिल्ली समझौता और संविधान का अनुच्छेद 370, जो महाराजा हरि सिंह के विलय पत्र पर आधारित था, केंद्र और जम्मू-कश्मीर के रिश्ते की नींव थे।"

विवादों और सेवा से भरा राजनीतिक करियर

कमाल का राजनीतिक करियर विवादों से अछूता नहीं रहा। सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) के खिलाफ उनके बयान अक्सर भारतीय सेना के साथ टकराव का कारण बने। उन्होंने कांग्रेस नेता माखन लाल फोटेदार को "आस्तीन का सांप" कहा था, जिससे एनसी ने खुद को उनसे दूर कर लिया था। 2012 में राहुल गांधी की आलोचना करने पर भी एनसी और कांग्रेस के बीच रिश्ते खराब हो गए थे, जिसके बाद उन्हें पार्टी के प्रवक्ता पद से हटा दिया गया था।

इन विवादों के बावजूद, कमाल जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक सम्मानित चेहरा थे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने तंगमार्ग में, जो उनकी मां का पैतृक स्थान था, बतौर जनरल फिजिशियन काम किया। उन्होंने मंत्री पद संभाले और एनसी के अतिरिक्त महासचिव के रूप में भी सेवा दी। सार्वजनिक सेवा और एनसी की विरासत में उनके योगदान को व्यापक रूप से सराहा गया। पार्टी ने उनके निधन को "अपूरणीय क्षति" बताया।

श्रद्धांजलियों का दौर

राजनीतिक जगत के कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक भावुक पोस्ट में अपने चाचा की अंतिम दिनों की मजबूती की सराहना की और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने लिखा, "अल्लाह चाचा मुस्तफा को जन्नत में आला मुकाम दे।"

विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और कश्मीर के प्रमुख मौलवी मीरवाइज उमर फारूक ने भी श्रद्धांजलि दी। मीरवाइज ने कहा, "डॉ. फारूक अब्दुल्ला साहब, उमर अब्दुल्ला साहब और शोक संतप्त परिवार के सभी सदस्यों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।"

डॉ. मुस्तफा कमाल का निधन अब्दुल्ला परिवार और नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक युग का अंत है। साथ ही, जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता के लिए संघर्ष करने वाली एक मुखर आवाज भी खामोश हो गई। लेकिन उनकी विरासत क्षेत्र की राजनीतिक इतिहास में हमेशा दर्ज रहेगी।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. मुस्तफा कमाल का निधन कब हुआ?

डॉ. मुस्तफा कमाल का निधन मंगलवार को हुआ।

डॉ. मुस्तफा कमाल की उम्र कितनी थी?

उनकी उम्र 84 वर्ष थी।

डॉ. मुस्तफा कमाल ने किस चीज के लिए संघर्ष किया?

उन्होंने जम्मू-कश्मीर की 1953 से पहले की स्वायत्तता के लिए संघर्ष किया।

डॉ. मुस्तफा कमाल का राजनीतिक करियर कैसा था?

उनका राजनीतिक करियर विवादों से भरा हुआ था, लेकिन वे जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक सम्मानित चेहरा थे।

उनके निधन पर किसने श्रद्धांजलि दी?

उमर अब्दुल्ला और मीरवाइज उमर फारूक ने उनके निधन पर श्रद्धांजलि दी।

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