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दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक सेवाओं को सरल बनाने की योजना बनाई

दिल्ली सरकार जल्द ही सार्वजनिक सेवाओं को आसान और तेज़ बनाने के लिए बड़ा बदलाव करने जा रही है।

दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक सेवाओं को सरल बनाने की योजना बनाई
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दिल्ली सरकार जल्द ही सार्वजनिक सेवाओं को आसान और तेज़ बनाने के लिए बड़ा बदलाव करने जा रही है। लाइसेंस, सर्टिफिकेट, पानी के कनेक्शन और नगर निगम की मंजूरी जैसी सेवाओं को सरल और तेज़ बनाने के लिए ये कदम उठाए जा रहे हैं। इसका मकसद सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की ज़रूरत को कम करना, प्रक्रिया को आसान बनाना और समय बचाना है।

तमिलनाडु के सफल 'सिंपलगव' प्रोग्राम से प्रेरित होकर, दिल्ली सरकार ने "डिजिटाइजेशन से पहले सरलीकरण" को प्राथमिकता दी है। इसका मतलब है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाने से पहले सेवाओं को फिर से डिज़ाइन किया जाएगा ताकि अनावश्यक प्रक्रिया और अप्रूवल हटाए जा सकें।

दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली जल बोर्ड (DJB), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और ट्रांसपोर्ट विभाग समेत सभी सरकारी विभागों को अपनी सेवाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें सरकारी से नागरिक (G2C), सरकारी से व्यवसाय (G2B) और सरकारी से सरकारी (G2G) सेवाओं को शामिल किया गया है। मौजूदा प्रक्रियाओं का नक्शा तैयार कर, समस्याओं की पहचान की जाएगी और सरल वर्कफ्लो डिज़ाइन किए जाएंगे।

MCD में लाइसेंस, सर्टिफिकेट, परमिशन और अन्य मंजूरी जैसी सेवाओं को सरल बनाने पर जोर दिया जाएगा। अधिकारी मौजूदा प्रक्रियाओं का विश्लेषण करेंगे और उन्हें अधिक प्रभावी बनाने के सुझाव देंगे।

इसी तरह, DJB पानी और सीवर कनेक्शन, बिलिंग प्रक्रिया, शिकायत निवारण, नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) और अन्य मंजूरी सेवाओं की समीक्षा करेगा। इन सेवाओं को सरल, तेज़ और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

इन सुधारों को लागू करने के लिए हर विभाग को वरिष्ठ अधिकारियों की अगुवाई में आंतरिक कमेटियां बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें प्रशासनिक, कानूनी और आईटी विंग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। हर विभाग एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा जो प्रक्रिया की निगरानी और उच्च स्तरीय कमेटियों के साथ समन्वय करेगा।

दिल्ली सरकार ने एक विस्तृत कार्य योजना बनाई है जिसमें विभागों को अपनी सभी सेवाओं की सूची तैयार करने, मौजूदा "जैसी है" प्रक्रियाओं को डॉक्यूमेंट करने, सरल "जैसी होनी चाहिए" वर्कफ्लो डिज़ाइन करने, कानूनी प्रावधानों में संशोधन की पहचान करने और डिजिटल इंटीग्रेशन के लिए आईटी टीमों के साथ काम करने को कहा गया है।

प्रस्तावित फ्रेमवर्क में सेल्फ-सर्टिफिकेशन, ई-केवाईसी, QR कोड वाले सर्टिफिकेट, इंटीग्रेटेड डिजिटल पेमेंट्स, OTP आधारित ऑथेंटिकेशन, ऑटोमेटेड वेलिडेशन और API आधारित इंटरडिपार्टमेंटल इंटीग्रेशन जैसे उपाय शामिल हैं। इनसे नागरिकों को सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन मिल सकेंगी, बिना बार-बार दस्तावेज़ जमा करने या सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के।

पहले चरण में, विभागों को तीन से पांच हाई-डिमांड सेवाओं को प्राथमिकता देने को कहा गया है। रियल-टाइम परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स के साथ डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम प्रगति को ट्रैक करेगा। एक सशक्त कमेटी प्रमुख परफॉर्मेंस मेट्रिक्स की समीक्षा करेगी ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

अधिकारियों को उम्मीद है कि इन सुधारों से सेवाओं की डिलीवरी तेज़ होगी, कागजी कार्रवाई कम होगी, फिजिकल इंस्पेक्शन घटेगा, डिजिटल रूप से वेरिफाइबल सर्टिफिकेट के जरिए पारदर्शिता बढ़ेगी और रियल-टाइम मॉनिटरिंग व पब्लिक डैशबोर्ड के जरिए जवाबदेही बेहतर होगी।

"यह एक बड़ा बदलाव है जो सरकारी सेवाओं को आसान, तेज़ और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए किया जा रहा है," एक MCD अधिकारी ने कहा।

तमिलनाडु के सफल मॉडल को अपनाकर, दिल्ली प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली सरकार सार्वजनिक सेवाओं को सरल बनाने के लिए क्या कर रही है?

दिल्ली सरकार लाइसेंस, सर्टिफिकेट, पानी के कनेक्शन और नगर निगम की मंजूरी जैसी सेवाओं को आसान और तेज़ बनाने के लिए 'डिजिटाइजेशन से पहले सरलीकरण' की योजना बना रही है। इसका मकसद सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की ज़रूरत को कम करना और प्रक्रिया को सरल बनाना है।

यह योजना किन विभागों को कवर करती है?

यह योजना दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली जल बोर्ड (DJB), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और ट्रांसपोर्ट विभाग सहित सभी सरकारी विभागों को कवर करती है। इसमें सरकारी से नागरिक (G2C), सरकारी से व्यवसाय (G2B) और सरकारी से सरकारी (G2G) सेवाएं शामिल हैं।

पहले चरण में कौन सी सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है?

पहले चरण में विभागों को तीन से पांच हाई-डिमांड सेवाओं को प्राथमिकता देने को कहा गया है। MCD में लाइसेंस और परमिशन पर जोर दिया जा रहा है, जबकि DJB पानी-सीवर कनेक्शन और बिलिंग सेवाओं पर ध्यान दे रहा है।

इस योजना में कौन सी डिजिटल तकनीकें शामिल की जा रही हैं?

इस योजना में सेल्फ-सर्टिफिकेशन, ई-केवाईसी, QR कोड वाले सर्टिफिकेट, इंटीग्रेटेड डिजिटल पेमेंट्स, OTP आधारित ऑथेंटिकेशन, ऑटोमेटेड वेलिडेशन और API आधारित इंटरडिपार्टमेंटल इंटीग्रेशन जैसे उपाय शामिल हैं।

इन सुधारों से नागरिकों को क्या फायदे मिलेंगे?

इन सुधारों से सेवाओं की डिलीवरी तेज़ होगी, कागजी कार्रवाई कम होगी, और नागरिकों को सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन मिल सकेंगी। बार-बार दस्तावेज़ जमा करने या सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

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