कांग्रेस की जीत से डीके शिवकुमार की छवि हुई मजबूत
कांग्रेस की जीत और 11 अतिरिक्त वोटों ने डीके शिवकुमार की छवि को मजबूत किया विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की है।
विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की है। पांचों सीटों पर जीत दर्ज की और भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के सदस्यों की क्रॉस-वोटिंग से 11 अतिरिक्त वोट भी मिले। इस नतीजे से न सिर्फ सत्ताधारी पार्टी को ऊपरी सदन में स्पष्ट बहुमत मिला है, बल्कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कांग्रेस में छवि भी मजबूत हुई है। खासकर भाजपा से हुई क्रॉस-वोटिंग ऐसे समय में हुई है जब देशभर में कई क्षेत्रीय पार्टियां आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
चुनाव से पहले कांग्रेस को 140 वोट तय माने जा रहे थे। इसमें पार्टी के 135 विधायक, दो निर्दलीय, एक सर्वोदय कर्नाटक पक्ष का सदस्य और भाजपा के दो निष्कासित सदस्य शामिल थे। लेकिन अंत में कांग्रेस को एनडीए सहयोगियों से 11 अतिरिक्त वोट भी मिले, जिससे उसकी स्थिति और मजबूत हो गई। मुख्यमंत्री शिवकुमार के लिए यह जीत एक बड़ा राजनीतिक इम्तिहान था, जिसे उन्होंने बखूबी पास किया।
चुनाव नतीजों को जनता दल (सेक्युलर) के लिए एक रणनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। इससे वोक्कालिगा वोट बैंक के शिवकुमार के नेतृत्व में एकजुट होने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस ने इन चुनावों की तैयारी बेहद सटीक तरीके से की थी। विधायकों, खासकर पहली बार चुने गए सदस्यों को ट्रेनिंग देने के लिए तीन राउंड की मॉक वोटिंग करवाई गई। इस अनुशासन का असर यह रहा कि कांग्रेस के भीतर से कोई क्रॉस-वोटिंग नहीं हुई। इसे शिवकुमार की पार्टी पर पकड़ और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के प्रभाव का नतीजा माना जा रहा है।
अब 75 सदस्यीय ऊपरी सदन में कांग्रेस के पास 39 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत है। इससे पार्टी को अहम विधेयकों को बिना किसी बड़ी रुकावट के पास कराने का मौका मिलेगा। इनमें कर्नाटक कोऑपरेटिव सोसाइटीज (संशोधन) बिल, कर्नाटक सौहार्द सहकारी (संशोधन) बिल और कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्त (संशोधन) बिल शामिल हैं, जो पहले अटके हुए थे।
इसके अलावा, इस बहुमत से कांग्रेस को ऊपरी सदन में महत्वपूर्ण पदों पर अपने सदस्यों को नियुक्त करने का मौका भी मिलेगा। इसमें चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन के पद शामिल हैं, जो फिलहाल बसवराज होरट्टी और एमके प्रणेश के पास हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि ये बदलाव अगले मानसून सत्र तक हो सकते हैं, जिससे कांग्रेस को कैबिनेट पदों के लिए दावेदारों को समायोजित करने का मौका मिलेगा।
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