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100वें जन्मदिन पर मैसूरु में सम्मानित हुए योग गुरु बीएनएस अयंगार

मैसूरु में योग गुरु बीएनएस अयंगार के 100वें जन्मदिन पर सम्मान समारोह हुआ। 'योगी वरेण्य' ग्रंथ जारी किया गया।

100वें जन्मदिन पर मैसूरु में सम्मानित हुए योग गुरु बीएनएस अयंगार
Photo by Akshi Yogashala on Pexels

शतायु योग गुरु बी. एन. एस. अयंगार को मैसूरु में सम्मानित किया गया

शतायु योग गुरु बी. एन. एस. अयंगार को मैसूरु में सम्मानित किया गया

‘गुरुजी’ बी. एन. एस. अयंगार के 100वें जन्मदिन पर उन्हें सम्मानित करने के लिए मैसूरु के संस्कृत कॉलेज में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में शतायु योग साधक के अनुयायी और प्रशंसक एक साथ आए।

यह जुटान योग के अभ्यास और उसके प्रचार-प्रसार को समर्पित एक जीवन को याद करने और सम्मान देने के लिए था। इसमें उनके शिष्य, शुभचिंतक और भारत के साथ-साथ विदेशों से आए प्रशंसक शामिल हुए।

सम्मान ग्रंथ जारी किया गया

कार्यक्रम में ‘गुरुजी’ बी. एन. एस. अयंगार के योगदान और उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए ‘योगी वरेण्य’ नाम से एक सम्मान ग्रंथ जारी किया गया।

सम्मान भाषण देने वाले विद्वान एच. वी. नागराजा राव ने इस बारे में बात की कि योग कैसे भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषाई सीमाओं को पार कर दुनिया भर के लोगों को जोड़ता है।

उन्होंने कहा कि ‘गुरुजी’ योग की बदल देने वाली ताकत और लंबे समय तक बने रहने वाले फायदों के जीते-जागते प्रमाण हैं।

मैसूर योग परंपरा पर फोकस

कार्यक्रम की अध्यक्षता करने वाले डॉ. शंकरनारायण जोइस ने मैसूर योग परंपरा के गहरे पहलुओं पर बात की।

उन्होंने आसन के अनुशासित अभ्यास के फायदों को भी सामने रखा।

कार्यक्रम ने ‘गुरुजी’ को मैसूरु से जुड़ी योग अभ्यास की एक बड़ी परंपरा के भीतर रखा। साथ ही अलग-अलग जगहों से आए छात्रों और प्रशंसकों की मौजूदगी के जरिए उनकी शिक्षा की वैश्विक पहुंच को भी रेखांकित किया गया।

‘योग सिर्फ एक एक्सरसाइज नहीं है’

‘गुरुजी’ बी. एन. एस. अयंगार ने जोर देकर कहा कि योग सिर्फ एक एक्सरसाइज नहीं है, बल्कि एक ऐसा अनुशासन है जो मानसिक और शारीरिक, दोनों तरह की सेहत में योगदान देता है।

उन्होंने कहा कि इसलिए योग का अभ्यास हर किसी को करना चाहिए।

आयोजकों के मुताबिक, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से ‘गुरुजी’ के 100 से ज्यादा छात्रों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

आयोजकों ने कहा कि इस भागीदारी ने कार्यक्रम को योग और उसकी कालातीत परंपरा का एक अंतरराष्ट्रीय उत्सव बना दिया।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बी. एन. एस. अयंगार को मैसूरु में क्यों सम्मानित किया गया?

बी. एन. एस. अयंगार को उनके 100वें जन्मदिन पर योग के अभ्यास और प्रचार-प्रसार में लंबे योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

सम्मान समारोह कहां हुआ था?

यह सम्मान समारोह मैसूरु के संस्कृत कॉलेज में आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम में कौन सा सम्मान ग्रंथ जारी किया गया?

कार्यक्रम में ‘योगी वरेण्य’ नाम का सम्मान ग्रंथ जारी किया गया, जिसमें ‘गुरुजी’ के योगदान और उपलब्धियों को सम्मान दिया गया।

बी. एन. एस. अयंगार ने योग के बारे में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि योग सिर्फ एक्सरसाइज नहीं है, बल्कि ऐसा अनुशासन है जो मानसिक और शारीरिक सेहत में मदद करता है।

इस कार्यक्रम में कितने छात्र शामिल हुए?

आयोजकों के मुताबिक, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से ‘गुरुजी’ के 100 से ज्यादा छात्रों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

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