बुलेट ट्रेन अब यूपी और बिहार तक, दिल्ली-लखनऊ दो घंटे में
रेलवे मिनिस्टर ने बुलेट ट्रेन को उत्तर प्रदेश और बिहार तक बढ़ाने की घोषणा की। दिल्ली-लखनऊ सफर दो घंटे में पूरा होगा।
यूपी और बिहार तक जाएगी बुलेट ट्रेन, ये होंगे स्टेशन; चुनाव से पहले बड़ा ऐलान
रेलवे मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने ऐलान किया है कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को उत्तर प्रदेश और बिहार तक बढ़ाने काम चल रहा है, जिसमें दिल्ली से लखनऊ का सफर करीब दो घंटे में और दिल्ली से पटना का सफर साढ़े चार घंटे में पूरा होगा।
सोमवार को बोलते हुए वैष्णव ने कहा कि दोनों राज्यों तक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर ले जाने की तैयारी चल रही है, लेकिन उन्होंने काम पूरा होने की कोई तारीख नहीं बताई। इस प्लान के तहत दिल्ली से वाराणसी का सफर करीब तीन घंटे 33 मिनट में पूरा होगा।
यह ऐलान उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आया है।
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर ट्रैक पर
भारत का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, गुजरात में सूरत और बिलीमोरा के बीच 50 किलोमीटर के सेक्शन पर अगले साल 15 अगस्त तक सर्विस शुरू करने का टारगेट रख रहा है। इस सेक्शन को पहले फेज के तौर पर बनाया जा रहा है और यह ट्रायल और शुरुआती ऑपरेशन वाले हिस्से के रूप में काम करेगा, जो पूरे कॉरिडोर के लिए बड़ा माइलस्टोन माना जा रहा है।
508 किलोमीटर के मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर की कुल लागत 1.08 लाख करोड़ रुपये है। जापान 88,000 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र और गुजरात सरकारें 5,000-5,000 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार 10,000 करोड़ रुपये दे रही है।
टेक्निकल स्पेसिफिकेशन और स्टेशन
जापानी टेक्नोलॉजी पर आधारित बुलेट ट्रेन की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा है और ऑपरेशनल स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। इस कॉरिडोर में 12 स्टेशन होंगे, महाराष्ट्र में चार और गुजरात में आठ।
महाराष्ट्र के स्टेशन में बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC), ठाणे, विरार और बोईसर शामिल होंगे। गुजरात में वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती में स्टेशन बनाए जा रहे हैं। प्लानर्स इन स्टेशनों को बड़े इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेंटर्स से जोड़ने पर फोकस कर रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल करें।
कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा एलिवेटेड ट्रैक पर बनाया जा रहा है। मुंबई के पास प्रोजेक्ट में सात किलोमीटर लंबी अंडरसी रेल टनल भी शामिल है, भारत की पहली ऐसी टनल जो हाई-स्पीड रेल ऑपरेशन के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है।
बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्टेशन में छह प्लेटफॉर्म होंगे और इसे महाराष्ट्र सरकार के साथ कोऑर्डिनेशन करके पास की मेट्रो सर्विस से जोड़ा जा रहा है, जो अब आखिरी चरण में है। स्टेशन को भविष्य में 30 मंजिला बिल्डिंग सपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है और इसकी लागत 3,680 करोड़ रुपये है। जमीन की खुदाई 98 फीसदी पूरी हो चुकी है और स्ट्रक्चर कंक्रीट के स्टेज तक पहुंच गया है।
स्रोत: Live Hindustan
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बुलेट ट्रेन दिल्ली से लखनऊ तक कितने समय में पहुंचेगी?
रेलवे मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव के अनुसार, दिल्ली से लखनऊ का सफर बुलेट ट्रेन से करीब दो घंटे में पूरा होगा।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की स्पीड क्या है?
जापानी टेक्नोलॉजी पर आधारित इस बुलेट ट्रेन की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा है और ऑपरेशनल स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है।
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर में कितने स्टेशन होंगे?
इस कॉरिडोर में कुल 12 स्टेशन होंगे: महाराष्ट्र में चार (BKC, ठाणे, विरार और बोईसर) और गुजरात में आठ (वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती)।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की कुल लागत कितनी है?
इस 508 किलोमीटर के कॉरिडोर की कुल लागत 1.08 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें जापान 88,000 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र और गुजरात सरकारें 5,000-5,000 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार 10,000 करोड़ रुपये दे रही है।
सूरत-बिलीमोरा सेक्शन पर बुलेट ट्रेन सेवा कब शुरू होगी?
50 किलोमीटर के सूरत-बिलीमोरा सेक्शन पर बुलेट ट्रेन सेवा अगले साल 15 अगस्त तक शुरू करने का टारगेट रखा गया है।
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