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एक्सोलोटल: मेक्सिको का जादुई सैलामैंडर जो अंग फिर से बनाता है

मेक्सिको सिटी की झील ज़ोचिमिल्को में एक ऐसा जीव रहता है जो जैविक नियमों को चुनौती देता है। इसे "एक्सोलोटल" (Ambystoma mexicanum) कहते हैं।

The smiling salamander that can regrow its brain, heart and limbs; scientists think its secrets could help transform human medicine

मेक्सिको सिटी की झील ज़ोचिमिल्को में एक ऐसा जीव रहता है जो जैविक नियमों को चुनौती देता है। इसे "एक्सोलोटल" (Ambystoma mexicanum) कहते हैं। ये एक ऐसा सैलामैंडर है जो अपने खोए हुए अंग, रीढ़ की हड्डी, दिल और यहां तक कि दिमाग के हिस्सों को भी बिना किसी निशान या नुकसान के फिर से बना सकता है। इसके अद्भुत पुनर्जनन (रीजनरेशन) की क्षमता ने इसे वैज्ञानिकों के लिए एक अहम मॉडल बना दिया है, जो टिशू रिपेयर और रीजनरेशन पर रिसर्च कर रहे हैं।

एक्सोलोटल क्यों है खास?

एक्सोलोटल एक "पेडोमॉर्फिक" सैलामैंडर है, यानी ये अपनी पूरी जिंदगी अपने बचपन की विशेषताओं को बनाए रखता है। जहां ज्यादातर सैलामैंडर जमीन पर रहने वाले वयस्क बन जाते हैं, वहीं एक्सोलोटल पानी में रहता है और अपने बाहरी गिल्स और लार्वा जैसी संरचना को बनाए रखता है। इसे "नियोटनी" कहते हैं, और यही इसकी रीजनरेट करने की शक्ति का कारण है।

जब एक्सोलोटल का कोई अंग कट जाता है, तो चोट के पास की कोशिकाएं (सेल्स) अपने शुरुआती विकास के स्तर पर लौट आती हैं और "ब्लास्टेमा" नाम की संरचना बनाती हैं। ये ब्लास्टेमा फिर से हड्डी, मांसपेशी, नस और त्वचा को उनकी सही जगह पर बनाती है। यही क्षमता इसे रीढ़ की हड्डी, दिल और दिमाग तक को फिर से बनाने में मदद करती है।

इंसानों में रीजनरेशन का unlocking

हाल की जेनेटिक रिसर्च से पता चला है कि एक्सोलोटल की रीजनरेट करने की क्षमता पूरी तरह से अनोखी नहीं है। वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में SP8 नाम का एक जीन पाया गया है, जो एक्सोलोटल, ज़ेब्राफिश और चूहों में अंगों के रीजनरेशन के लिए जिम्मेदार है। CRISPR जीन-एडिटिंग तकनीक से जब एक्सोलोटल से SP8 जीन हटाया गया, तो उसके अंगों की हड्डियां सही से नहीं बनीं। यही नतीजा चूहों में भी देखा गया, जिनमें ये जीन नहीं था।

आगे की रिसर्च में ज़ेब्राफिश से जीन थेरेपी का इस्तेमाल करके चूहों में अंगों के रीजनरेशन को आंशिक रूप से बहाल किया गया। इससे ये उम्मीद जगी है कि इंसानों समेत स्तनधारियों (मेमल्स) में भी रीजनरेशन के लिए जरूरी जेनेटिक निर्देश पहले से मौजूद हो सकते हैं, लेकिन वे निष्क्रिय हैं। एक्सोलोटल की बायोलॉजी को समझने से इंसान में टिशू रिपेयर और अंगों के रीजनरेशन में बड़ी सफलता मिल सकती है।

खतरे में है ये प्रजाति

भले ही एक्सोलोटल की बायोलॉजी विज्ञान के लिए वरदान है, लेकिन इसका जंगली जीवन संकट में है। झील ज़ोचिमिल्को में रहने वाली ये प्रजाति अपने प्राकृतिक आवास के नुकसान, प्रदूषण और तिलापिया व कार्प जैसी आक्रामक मछलियों की वजह से खतरे में है। ये मछलियां एक्सोलोटल के अंडों को खा जाती हैं और उनके खाने के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। 1998 में झील में प्रति वर्ग किलोमीटर 6,000 एक्सोलोटल थे, लेकिन 2014 तक ये संख्या घटकर सिर्फ 36 रह गई।

एक्सोलोटल को बचाने की कोशिशें

झील ज़ोचिमिल्को, जो एक यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है, में एक्सोलोटल को बचाने के लिए काम चल रहा है। मेक्सिको की नेशनल ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी के बायोलॉजिस्ट लुइस ज़ामब्रानो की टीम ने "चिनाम्पा-रिफ्यूज" नहरें बनाई हैं। ये पारंपरिक तैरते खेतों को बायोफिल्टर और बैरियर के साथ जोड़ती हैं, ताकि प्रजाति को आक्रामक शिकारियों से बचाया जा सके। संरक्षणकर्ता पर्यावरणीय डीएनए सैंपलिंग और पारंपरिक मछली पकड़ने के तरीकों का इस्तेमाल करके एक्सोलोटल की आबादी पर नजर रख रहे हैं।

हालांकि जंगली एक्सोलोटल का भविष्य अनिश्चित है, लेकिन इन प्रयासों से उम्मीद है कि इस अद्भुत जीव को बचाया जा सकेगा। वैज्ञानिकों के लिए इसके रहस्यों को सुलझाना न सिर्फ इसे बचाने में मदद करेगा, बल्कि इंसानी चिकित्सा को भी बदल सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एक्सोलोटल क्या है?

एक्सोलोटल एक ऐसा सैलामैंडर है जो अपने खोए हुए अंगों, रीढ़ की हड्डी, दिल और दिमाग के हिस्सों को बिना किसी निशान के फिर से बना सकता है।

एक्सोलोटल की खासियत क्या है?

एक्सोलोटल एक 'पेडोमॉर्फिक' सैलामैंडर है, जो अपनी पूरी जिंदगी बचपन की विशेषताओं को बनाए रखता है और पानी में रहता है।

एक्सोलोटल की रीजनरेशन क्षमता कैसे काम करती है?

जब एक्सोलोटल का कोई अंग कट जाता है, तो चोट के पास की कोशिकाएं अपने शुरुआती विकास के स्तर पर लौटकर 'ब्लास्टेमा' बनाती हैं, जो फिर से अंगों को बनाती हैं।

एक्सोलोटल की प्रजाति को क्या खतरा है?

एक्सोलोटल की प्रजाति अपने प्राकृतिक आवास के नुकसान, प्रदूषण और आक्रामक मछलियों के कारण खतरे में है।

एक्सोलोटल को बचाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

झील ज़ोचिमिल्को में एक्सोलोटल को बचाने के लिए 'चिनाम्पा-रिफ्यूज' नहरें बनाई गई हैं और आबादी पर नजर रखने के लिए पर्यावरणीय डीएनए सैंपलिंग का उपयोग किया जा रहा है।

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