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असम के राज्यपाल ने संस्कृत को विरासत और आधुनिकता का पुल बताया

असम के राज्यपाल ने संस्कृत को विरासत और आधुनिकता के बीच कड़ी बताया असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने रविवार को नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी (NSU) में प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान पट्टाभिराम शास्त्री

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असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने रविवार को नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी (NSU) में प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान पट्टाभिराम शास्त्री की स्मृति में व्याख्यान श्रृंखला का उद्घाटन किया। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने संस्कृत की स्थायी प्रासंगिकता पर जोर दिया और इसे भारत की प्राचीन विरासत और आधुनिक पीढ़ी के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि NSU अतीत और वर्तमान को जोड़ने का काम जारी रखेगा।

संस्कृत के वैज्ञानिक पहलुओं को समझने की अपील

श्री आचार्य ने छात्रों से संस्कृत ग्रंथों में छिपे वैज्ञानिक ज्ञान को समझने और इसे भविष्य की पीढ़ियों के साथ साझा करने की अपील की। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को प्राचीन विषयों को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम बताया, जिससे इनकी वैश्विक स्तर पर प्रासंगिकता बढ़ सके।

पट्टाभिराम शास्त्री को श्रद्धांजलि

पट्टाभिराम शास्त्री को श्रद्धांजलि देते हुए राज्यपाल ने उनकी देशभर में प्रसिद्धि की सराहना की और कहा कि उनकी संस्कृत अध्ययन में योगदान को वाराणसी जैसे दूरस्थ शैक्षणिक केंद्रों में भी मान्यता मिली। कार्यक्रम की शुरुआत ‘पूर्णकुंभ स्वागत’ से हुई, जिसका नेतृत्व NSU के कुलपति जी.एस.आर. कृष्णमूर्ति, रजिस्ट्रार के.वी. नारायण राव और अकादमिक डीन रजनिकांत शुक्ला ने किया।

यह व्याख्यान श्रृंखला विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वह संस्कृत को एक जीवंत परंपरा के रूप में संरक्षित और बढ़ावा देने के साथ-साथ इसे आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक प्रगति के साथ जोड़ने का काम कर रहा है।

स्रोत: The Hindu

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