आंध्र प्रदेश में खनन सुधार से बढ़ी पारदर्शिता और राजस्व
आंध्र प्रदेश में खनन सुधार से पारदर्शिता और राजस्व में बढ़ोतरी: मंत्री रविंद्र विजयवाड़ा: खनन और भूविज्ञान मंत्री कोल्लू रविंद्र ने आंध्र प्रदेश के खनन क्षेत्र में किए गए बड़े सुधारों को लेकर कहा कि
विजयवाड़ा: खनन और भूविज्ञान मंत्री कोल्लू रविंद्र ने आंध्र प्रदेश के खनन क्षेत्र में किए गए बड़े सुधारों को लेकर कहा कि ये सुधार पारदर्शिता बढ़ाने और आर्थिक मजबूती पर केंद्रित हैं। उन्होंने बताया कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है।
गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने ऐसी नीतियां बनाई हैं जो उद्योगों को बढ़ावा देने और रोजगार के मौके पैदा करने पर जोर देती हैं। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की खनिज संपदा का फायदा पूरे समाज को मिले, न कि कुछ गिने-चुने लोगों तक सीमित रहे।
मंत्री रविंद्र ने बताया कि गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद जारी किए गए एक श्वेत पत्र में खनन क्षेत्र में भारी नुकसान का खुलासा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 से 2024 के बीच राज्य को करीब ₹19,137 करोड़ का नुकसान हुआ। इसकी वजह खराब लीज प्रबंधन, अवैध खनन, नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और राजस्व की कमी जैसे मुद्दे थे।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने एपी माइनर मिनरल पॉलिसी-2025 लागू की, जिसमें कई अहम बदलाव किए गए। इनमें वार्षिक डेड रेंट का बोझ कम करना, लीज अवधि को 20 साल से बढ़ाकर 30 साल करना और नवीनीकरण अवधि को 10 साल से बढ़ाकर 20 साल करना शामिल है। साथ ही, नीलामी आधारित प्रक्रिया को आवेदन आधारित सिस्टम से बदल दिया गया ताकि पारदर्शिता बढ़ाई जा सके।
मंत्री ने बताया कि इन सुधारों के सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं। पिछले दो साल में 1,700 से ज्यादा आवेदन मिले, जिनमें से 172 नई खनन लीज को मंजूरी दी गई। इससे राज्य को ₹172 करोड़ का राजस्व मिला है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आंध्र प्रदेश में खनन सुधार क्यों लाए गए?
सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने, राजस्व में इजाफा करने और पूरे समाज को खनिज संपदा का फायदा पहुंचाने के लिए सुधार लाए। 2019 से 2024 के बीच राज्य को ₹19,137 करोड़ का नुकसान हुआ था, जिसकी वजह खराब प्रबंधन और अवैध खनन थे।
AP माइनर मिनरल पॉलिसी-2025 में क्या बदलाव किए गए?
लीज की अवधि 20 साल से बढ़ाकर 30 साल कर दी गई, नवीनीकरण अवधि 10 साल से 20 साल हुई, वार्षिक डेड रेंट का बोझ कम किया गया, और नीलामी प्रक्रिया को आवेदन आधारित सिस्टम में बदल दिया गया।
इन सुधारों से अब तक क्या नतीजे आए हैं?
पिछले दो साल में 1,700 से ज्यादा आवेदन मिले और 172 नई खनन लीज को मंजूरी दी गई। इससे राज्य को ₹172 करोड़ का राजस्व मिला है।
खनन क्षेत्र में पारदर्शिता कैसे बढ़ाई गई?
सरकार ने तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है और नीलामी आधारित प्रक्रिया को आवेदन आधारित सिस्टम में बदल दिया है ताकि सभी काम पारदर्शी तरीके से हो।
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