जेएनटीयू-मियापुर-रायदुर्ग का 8.5 किमी हिस्सा पूरी तरह बदलेगा
जेएनटीयू-मियापुर-रायदुर्ग के साथ 8.5-किमी हिस्से का शुरू से अंत तक मोबिलिटी आकलन होगा जेएनटीयू-मियापुर-रायदुर्ग के साथ 8.5-किमी हिस्से का शुरू से अंत तक…
जेएनटीयू-मियापुर-रायदुर्ग के साथ 8.5-किमी हिस्से का शुरू से अंत तक मोबिलिटी आकलन होगा
हैदराबाद में अधिकारी जेएनटीयू-मियापुर-रायदुर्ग मेट्रो कॉरिडोर के साथ करीब 8.5-किमी लंबे हिस्से का शुरू से अंत तक मोबिलिटी आकलन करेंगे। इसमें पैदल चलने वालों की पहुंच, फीडर ट्रांसपोर्ट, ट्रैफिक की रुकावटें और मेट्रो स्टेशनों के आसपास सुरक्षा को शामिल किया जाएगा।
प्रस्तावित ट्रैफिक मोबिलिटी और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी स्टडी पर बुधवार को साइबराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में हुई एक बैठक में चर्चा की गई। यह बैठक स्पेशल चीफ सेक्रेटरी जयेश रंजन की अध्यक्षता में हुई।
पैदल पहुंच और मेट्रो कनेक्टिविटी पर फोकस
यह स्टडी पूरे कॉरिडोर को शुरू से अंत तक जांचेगी। इसमें खास जोर पैदल लोगों की आवाजाही, पब्लिक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी, ट्रैफिक मैनेजमेंट और मेट्रो स्टेशनों तथा आसपास के इलाकों तक सुरक्षित पहुंच पर रहेगा।
अधिकारी करीब 8.5-किमी लंबे कॉरिडोर के साथ फुटपाथ कनेक्टिविटी में कमियां, पैदल पार करने की जगहें, अतिक्रमण और असुरक्षित हिस्सों की पहचान करेंगे।
यह आकलन इस हिस्से पर लगातार और ज्यादा सुरक्षित पैदल पहुंच देने के लिए जरूरी उपायों को भी देखेगा।
अधिकारियों से उम्मीद है कि वे कॉरिडोर पर मोबिलिटी की कमियों के बड़े आकलन के हिस्से के तौर पर गायब फुटपाथों और असुरक्षित पैदल क्रॉसिंग की समीक्षा करेंगे।
कॉरिडोर की समीक्षा में ट्रैफिक की रुकावटें, फीडर सेवाएं और मेट्रो स्टेशनों तक पहुंच भी शामिल होगी।
फीडर ऑटो, पिक-अप बे और ट्रैफिक रेगुलेशन
साइबराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने कहा कि ऑटो-रिक्शा और फीडर कनेक्टिविटी आकलन का अलग हिस्सा होगी।
अधिकारी मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख जंक्शनों पर सही पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ बे के साथ-साथ तय फीडर ऑटो स्टैंड की पहचान करेंगे।
यह स्टडी इस हिस्से पर ट्रैफिक जाम वाली जगहों और हादसे के लिहाज से जोखिम वाली जगहों की जांच करेगी।
यह पैदल क्रॉसिंग, साइनज, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक रेगुलेशन की जरूरतों की भी समीक्षा करेगी।
प्रस्तावित स्टडी आगे यह भी देखेगी कि पैदल चलने और साइकिल चलाने की सुविधाओं को फीडर ऑटो और ई-ऑटो के साथ कैसे जोड़ा जाए।
इस जोड़ को स्कूलों, ऑफिसों, रिहायशी इलाकों और कमर्शियल संस्थानों के संदर्भ में देखा जाएगा।
बताया गया मकसद फीडर नेटवर्क को मजबूत करना और मेट्रो स्टेशनों तक लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है।
स्कूल ट्रैफिक की समीक्षा होगी
स्कूल से जुड़ा ट्रैफिक इस स्टडी का एक और हिस्सा होगा।
अधिकारी कॉरिडोर पर स्कूल बसों और वैन की आवाजाही का आकलन करेंगे।
वे पीक ऑवर्स के दौरान माता-पिता द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों से होने वाले जाम की भी जांच करेंगे।
मुख्य कैरिजवे से दूर तय पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ जोन शुरू करने की संभावना देखी जाएगी।
अधिकारी सुरक्षा बेहतर करने और स्कूलों के पास ट्रैफिक जाम कम करने के संभावित उपाय के तौर पर स्कूल-चाइल्ड कार-पूलिंग की भी जांच करेंगे।
यह स्टडी क्यों अहम है
बैठक में पेश किए गए मोबिलिटी आकलन ने शहर में निजी ट्रांसपोर्ट साधनों पर बढ़ती निर्भरता को सामने रखा।
प्रेजेंटेशन में दिखाया गया कि हैदराबाद ने 2011 और 2024 के बीच करीब 64 लाख डेली ट्रिप जोड़े।
इस बढ़ोतरी में से करीब 62 लाख डेली ट्रिप को दोपहिया वाहनों, निजी कारों, ऑटो और टैक्सियों से जोड़ा गया।
आकलन में यह भी दिखाया गया कि जीपीएस में दर्ज 63% ट्रिप 5 किमी के भीतर थे।
ये नतीजे उस स्टडी की पृष्ठभूमि देते हैं जिसका फोकस ज्यादा सुरक्षित पैदल पहुंच, बेहतर फीडर लिंक और मेट्रो स्टेशनों तक बेहतर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी पर है।
इसलिए प्रस्तावित कॉरिडोर आकलन उन मुद्दों को एक साथ लाता है जिन्हें आम तौर पर यात्री अलग-अलग रूप में झेलते हैं। इनमें फुटपाथ की कमियां, असुरक्षित क्रॉसिंग, ट्रैफिक जाम, फीडर की उपलब्धता और पब्लिक ट्रांसपोर्ट तक पहुंच शामिल हैं।
यह समीक्षा जेएनटीयू-मियापुर-रायदुर्ग मेट्रो कॉरिडोर पर केंद्रित है और इसमें स्टेशन तक पहुंच के साथ-साथ आसपास के इलाकों में आवाजाही को भी देखा जाएगा।
प्रकाशित - September 23, 2026 08:24 pm IST.
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जेएनटीयू-मियापुर-रायदुर्ग के कितने लंबे हिस्से का मोबिलिटी आकलन किया जाएगा?
अधिकारी इस कॉरिडोर के करीब 8.5-किलोमीटर लंबे हिस्से का शुरू से अंत तक मोबिलिटी आकलन करेंगे।
इस स्टडी में किन मुख्य बातों पर जोर दिया जाएगा?
इस स्टडी में खास तौर पर पैदल चलने वालों की पहुंच, पब्लिक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी, ट्रैफिक मैनेजमेंट और मेट्रो स्टेशनों तक सुरक्षित पहुंच पर जोर रहेगा।
स्कूल ट्रैफिक को लेकर क्या तैयारी की जा रही है?
अधिकारी स्कूल बसों की आवाजाही का आकलन करेंगे और जाम कम करने के लिए मुख्य कैरिजवे से दूर पिक-अप व ड्रॉप-ऑफ जोन शुरू करने की संभावना देखेंगे।
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