NEET पेपर लीक: बेटी खोने के गम में टूटा परिवार, मां का सवाल- 'पेपर दोबारा करा लोगे, बेटी लौटा पाओगे?'
मऊगंज की आकांक्षा चतुर्वेदी ने नागपुर में पेपर लीक के बाद आत्महत्या कर ली। परिवार पर 15 लाख का कर्ज, पिता अस्पताल में भर्ती। मां ने सिस्टम पर उठाए सवाल।
मध्य प्रदेश के मऊगंज की आकांक्षा चतुर्वेदी, जो NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थीं, ने नागपुर में 20 मई को आत्महत्या कर ली। परिवार का कहना है कि पेपर लीक और परीक्षा दोबारा होने की खबरों ने आकांक्षा को मानसिक तनाव में डाल दिया था। आकांक्षा एक मेधावी छात्रा थीं और उन्हें 650 से अधिक अंक मिलने की उम्मीद थी। लेकिन पेपर लीकी खबरों ने उनके सपनों को तोड़ दिया।
आकांक्षा की मां नीलम चतुर्वेदी का कहना है, "पेपर तो दोबारा करा लोगे, लेकिन मेरी बेटी को लौटा पाओगे?" उन्होंने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस भ्रष्ट व्यवस्था ने उनकी बेटी की जान ले ली। परिवार पर पहले से ही 15 लाख रुपये से अधिका कर्ज है, जो बेटी की पढ़ाई के लिए लिया गया था। आकांक्षा के पिता कृष्णकुमार चतुर्वेदी, जो दिल के मरीज हैं और लकवे का शिकार हो चुके हैं, बेटी की मौत की खबर सुनकर अस्पताल में भर्ती हैं। वह अपनी बेटी का अंतिम संस्कार भी नहीं देख पाए।
आकांक्षा के छोटे भाई राज चतुर्वेदी ने बताया कि दीदी हमेशा डॉक्टर बनने का सपना देखती थीं। पेपर लीकी खबरों के बाद वह चुप-चुप रहने लगीं और सुसाइड से तीन दिन पहले खाना-पीना तक छोड़ दिया था।
परिवार के अनुसार, इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। अब लोग अपनी बेटियों को बाहर पढ़ने भेजने से डरने लगे हैं। विपक्ष के प्रतिनिधियों ने परिवार को ढाई लाख रुपये की आर्थिक मदद दी है, लेकिन यह नुकसान कभी पूरा नहीं हो सकता।
आकांक्षा की 90 वर्षीय दादी यशोदा चतुर्वेदी ने कहा, "इससे अच्छा तो मुझे मौत आ जाती। पोती की मौत देखना किसी शाप से कम नहीं।" वहीं, बड़े पिता हनुमान प्रसाद चतुर्वेदी ने कहा, "जिस उम्र में बेटी की डोली उठानी थी, उस उम्र में उसकी अर्थी उठानी पड़ी।"
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आकांक्षा चतुर्वेदी ने आत्महत्या क्यों की?
आकांक्षा ने NEET पेपर लीक और परीक्षा दोबारा होने की खबरों के कारण मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या की।
आकांक्षा की मां ने क्या सवाल उठाया?
आकांक्षा की मां नीलम चतुर्वेदी ने पूछा, 'पेपर तो दोबारा करा लोगे, लेकिन मेरी बेटी को लौटा पाओगे?'.
परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी थी?
परिवार पर पहले से ही 15 लाख रुपये से अधिक का कर्ज था, जो आकांक्षा की पढ़ाई के लिए लिया गया था.
आकांक्षा के छोटे भाई ने क्या बताया?
आकांक्षा के छोटे भाई राज चतुर्वेदी ने कहा कि दीदी हमेशा डॉक्टर बनने का सपना देखती थीं.
इस घटना का गांव पर क्या असर पड़ा?
इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया है और लोग अपनी बेटियों को बाहर पढ़ने भेजने से डरने लगे हैं.
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में आधार कार्ड सेंटरों पर अवैध वसूली का मामला सामने आया
- 2
गाजियाबाद में स्वतंत्रता दिवस पर भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन
- 3
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में नवाचार कार्यशाला का आयोजन
- 4
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में ‘फ्री थिंकर्स क्लब’ की शुरुआत
- 5
शिक्षक पर शराब पीकर स्कूल आने का आरोप, ग्रामीणों का हंगामा
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।