कानपुर देहात में यमुना का जलस्तर बढ़ा, बाढ़ का खतरा
कानपुर देहात में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। मूसानगर थाना क्षेत्र के चपरघटा और आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
कानपुर देहात में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। मूसानगर थाना क्षेत्र के चपरघटा और आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। यमुना के साथ-साथ सेंगुर नदी के जलस्तर पर भी प्रशासन लगातार नजर रख रहा है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 20 अगस्त को कानपुर देहात में यमुना का जलस्तर 118.69 मीटर और औरैया में 105.340 मीटर रिकॉर्ड किया गया था।
हर साल बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ने से आढ़न, पथार, मुसरिया, पड़ाव, कुंभापुर, नयापुरवा और भुंडा समेत कई गांवों के रास्ते प्रभावित हो जाते हैं। कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि गांव वालों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। खेतों में पानी भर जाने से फसलों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है।
कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने गांव वालों से अपील की है कि वे बाढ़ का खतरा दरवाजे तक पहुंचने से पहले ही अपनी तैयारियां मजबूत कर लें। उनका कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी बाढ़ का खतरा अचानक लोगों के घरों तक पहुंचने से पहले गांव वालों और प्रशासन दोनों को पूरी तरह तैयार रहना होगा।
फिलहाल यमुना के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है। तटवर्ती गांवों में भी लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। प्रशासन की ओर से संभावित बाढ़ को देखते हुए निगरानी और तैयारियों पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कानपुर देहात में बाढ़ का खतरा क्यों बढ़ गया है?
कानपुर देहात में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। 20 अगस्त को यमुना का जलस्तर 118.69 मीटर दर्ज किया गया था। इसी तरह सेंगुर नदी के जलस्तर में भी इजाफा हुआ है, जिससे तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
बाढ़ से कौन-कौन से गांव प्रभावित हो रहे हैं?
मूसानगर थाना क्षेत्र के चपरघटा और आसपास के गांवों समेत आढ़न, पथार, मुसरिया, पड़ाव, कुंभापुर, नयापुरवा और भुंडा को बाढ़ का खतरा है। हर साल बारिश के मौसम में इन गांवों के रास्ते पानी से भर जाते हैं।
बाढ़ आने से स्थानीय लोगों को किस तरह की परेशानी होती है?
बाढ़ आने से गांवों के रास्ते कट जाते हैं और लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। खेतों में पानी भर जाने से फसलों को भी भारी नुकसान होता है।
प्रशासन और मंत्री क्या कह रहे हैं?
कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने गांव वालों से अपील की है कि बाढ़ का खतरा पूरी तरह से सामने आने से पहले ही अपनी तैयारियां मजबूत कर लें। प्रशासन फिलहाल अलर्ट मोड में है और निगरानी व तैयारियों पर जोर दे रहा है।
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