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फ्लाइट की विंडो सीट पर बैठने से बढ़ता है रेडिएशन खतरा

Discover if sitting by the window on flights increases radiation exposure. Experts explain the risks of UV and cosmic radiation.

Does a window seat on a flight expose you to more radiation? Here’s what studies say

क्या फ्लाइट की विंडो सीट पर बैठने से ज्यादा रेडिएशन होता है? रिसर्च क्या कहती है

फ्लाइट की विंडो सीट का मजा ही अलग होता है। खूबसूरत नजारे, चाहे शहर की स्काईलाइन हो या पहाड़ों की चोटियां। लेकिन रिसर्च कहती है कि दिन के समय फ्लाइट में विंडो सीट पर बैठने से रेडिएशन का स्तर बढ़ सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स occasional यात्रियों को भरोसा दिलाते हैं कि इसका खतरा बहुत कम है।

फ्लाइट में रेडिएशन क्यों बढ़ता है?

कमर्शियल एयरक्राफ्ट आमतौर पर 30,000 से 40,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं। इतनी ऊंचाई पर पृथ्वी का वातावरण, जो हमें रेडिएशन से बचाता है, काफी पतला हो जाता है। इस वजह से यात्रियों पर अल्ट्रावायलेट (UV) और कॉस्मिक रेडिएशन का असर ज्यादा होता है।

UV रेडिएशन सूरज से आता है और स्किन को प्रभावित करता है, जबकि कॉस्मिक रेडिएशन बाहरी अंतरिक्ष से आने वाले हाई-एनर्जी पार्टिकल्स से होता है। ये दोनों रेडिएशन अलग-अलग तरीके से असर करते हैं।

विंडो सीट का असर

कॉस्मिक रेडिएशन फ्लाइट के कैबिन में घुसता है और सभी यात्रियों को एक जैसा प्रभावित करता है, चाहे उनकी सीट कहीं भी हो। लेकिन विंडो सीट UV रेडिएशन के मामले में अलग चुनौती पेश करती है। एयरक्राफ्ट की खिड़कियां UV-B किरणों को रोकने के लिए डिजाइन की गई हैं, जो सनबर्न का कारण बनती हैं। लेकिन ये UV-A किरणों को रोकने में उतनी असरदार नहीं होतीं। UV-A किरणें ज्यादा गहरी स्किन में जाती हैं और लंबे समय में स्किन एजिंग और स्किन कैंसर का खतरा बढ़ा सकती हैं।

क्रूज़िंग एल्टीट्यूड पर UV रेडिएशन जमीन की तुलना में काफी ज्यादा होता है। *JAMA Dermatology* में छपी एक स्टडी के मुताबिक, 30,000 फीट की ऊंचाई पर सिर्फ एक घंटे तक धूप में बैठने से उतना UV-A रेडिएशन मिलता है जितना 20 मिनट के टैनिंग बेड से।

कॉस्मिक रेडिएशन: "चेस्ट X-रे" तुलना

जब लोग कहते हैं कि फ्लाइट में रेडिएशन "दो चेस्ट X-रे" के बराबर होता है, तो वो कॉस्मिक रेडिएशन की बात कर रहे होते हैं, न कि UV रेडिएशन की। हाई-एनर्जी कॉस्मिक पार्टिकल्स पृथ्वी के वातावरण से टकराकर सेकेंडरी रेडिएशन बनाते हैं, जो फ्लाइट में सभी यात्रियों को प्रभावित करता है।

अगर तुलना करें, तो एक लंबी इंटरकॉन्टिनेंटल फ्लाइट में यात्रियों को 0.10 से 0.15 मिलीसिवर्ट (mSv) कॉस्मिक रेडिएशन मिलता है। ये एक स्टैंडर्ड चेस्ट X-रे (लगभग 0.1 mSv) के बराबर है।

कौन है ज्यादा खतरे में?

Occasional यात्रियों के लिए UV और कॉस्मिक रेडिएशन से हेल्थ रिस्क ना के बराबर है। लेकिन frequent flyers, जैसे फ्लाइट क्रू और बिजनेस ट्रैवलर्स, को ज्यादा cumulative exposure होता है। रिसर्च बताती है कि फ्लाइट क्रू, जो ऊंचाई पर ज्यादा वक्त बिताते हैं, अपने करियर में रेडिएशन की ज्यादा डोज जमा कर लेते हैं। डर्मेटोलॉजिस्ट बार-बार UV-A एक्सपोजर के लॉन्ग-टर्म इफेक्ट्स को लेकर चिंतित हैं, जो स्किन एजिंग और स्किन कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।

रेडिएशन एक्सपोजर कैसे कम करें?

UV रेडिएशन को फ्लाइट में कम करना आसान है:

- विंडो ब्लाइंड नीचे कर लें: सीधी धूप को रोकने का सबसे आसान तरीका।
- आइल सीट चुनें: विंडो से दूर बैठने पर UV एक्सपोजर कम होता है।
- सनस्क्रीन लगाएं: अगर आप विंडो सीट पर हैं और सूरज की रोशनी सीधे आप पर पड़ रही है, तो SPF 30 या उससे ज्यादा का ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाएं।
- खुद को कवर करें: UV-ब्लॉकिंग सनग्लासेस और हल्के, लंबे स्लीव वाले कपड़े पहनें।

अंतिम बात

Occasional यात्रियों को ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है, लेकिन frequent flyers को इन प्रिकॉशन्स पर ध्यान देना चाहिए। अगर आपको विंडो सीट से नजारे देखने का शौक है, तो जरूर देखें। लेकिन 35,000 फीट की ऊंचाई पर थोड़ी सी सन प्रोटेक्शन सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है।

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