थोक महंगाई 10 फीसदी के पास, कांग्रेस ने सरकार को घेरा
अगस्त में WPI महंगाई 9.92% पर पहुंची। खाने-पीने की चीजें, मैन्युफैक्चर्ड गुड्स और ईंधन की कीमतें बढ़ीं।
पीएम कहते हैं सब चंगा सी, लेकिन सब महंगा सी: थोक मूल्य महंगाई पर कांग्रेस
कांग्रेस ने थोक महंगाई 10 फीसदी के करीब बने रहने पर सरकार को घेरा
कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर भारतीय परिवारों पर आर्थिक बोझ को कम करके दिखाने का आरोप लगाया है। महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आश्वासनों की तुलना जमीनी हकीकत से करते हुए कहा कि "पीएम कहते रहते हैं 'सब चंगा सी' (सब ठीक है), लेकिन असल में 'सब महंगा सी' (सब कुछ महंगा है)"।
चार महीने की महंगाई की लगातार मार
थोक कीमतों पर आधारित महंगाई अगस्त में बढ़कर 9.92 फीसदी पर पहुंच गई, जो जुलाई में 9.78 फीसदी थी। खाने-पीने की चीजों, मैन्युफैक्चर्ड गुड्स और ईंधन व बिजली की बढ़ती कीमतों की वजह से ऐसा हुआ, 14 सितंबर 2026 को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक। रमेश ने बताया कि आधिकारिक आंकड़े दिखाते हैं कि होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) महंगाई लगातार चार महीनों से 10 फीसदी के आसपास बनी हुई है।
खाने की चीजों और मैन्युफैक्चरिंग से कीमतों में उछाल
खाद्य सूचकांक में महंगाई अगस्त में तेज होकर 7.05 फीसदी पहुंच गई, जो जुलाई में 6.65 फीसदी थी। मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स की कैटेगरी में WPI महंगाई अगस्त में 8.37 फीसदी रही, जो सीरीज में सबसे ज्यादा है और जुलाई के 8.29 फीसदी से बढ़ी है। रमेश ने कहा, "सभी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ती रही हैं, जिससे करोड़ों परिवारों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।"
वेतन में गिरावट से परिवारों की मुश्किलें और बढ़ीं
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के डेटा का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने बताया कि महंगाई के हिसाब से एडजस्ट की गई मजदूरी लगातार गिर रही है, अप्रैल से 5.7 फीसदी की गिरावट आई है। ग्रामीण भारत को खासतौर पर जोरदार झटका लगा है, जहां 9 फीसदी की भारी गिरावट देखी गई है, और ग्रामीण मजदूरी नॉमिनल टर्म्स में भी गिरी है।
पश्चिम एशिया संघर्ष से बढ़े दाम का दबाव
WPI इस वित्त वर्ष की शुरुआत से ऊपर की ओर बढ़ रहा है, जिसकी वजह पश्चिम एशिया युद्ध और उससे पैदा हुई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी बताई जाती है, जहां से भारत में ज्यादातर क्रूड ऑयल इम्पोर्ट होता है। इस भू-राजनीतिक बाधा ने ग्लोबल क्रूड और फर्टिलाइजर की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिसका असर खाद्य कीमतों पर भी पड़ा है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
थोक महंगाई (WPI) फिलहाल कितनी है?
अगस्त में थोक महंगाई बढ़कर 9.92 फीसदी पर पहुंच गई है। कांग्रेस के मुताबिक यह लगातार चार महीनों से 10 फीसदी के आसपास बनी हुई है।
कौन सी चीजों की कीमतें सबसे ज्यादा बढ़ी हैं?
खाने की चीजें, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स और ईंधन व बिजली की कीमतें सबसे ज्यादा बढ़ी हैं। मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स में तो महंगाई अगस्त में 8.37 फीसदी रही, जो सीरीज में सबसे ज्यादा है।
महंगाई से आम परिवारों पर क्या असर पड़ा है?
न सिर्फ कीमतें बढ़ी हैं, बल्कि मजदूरी भी गिरी है। CMIE के डेटा के मुताबिक महंगाई के हिसाब से एडजस्ट की गई मजदूरी अप्रैल से 5.7 फीसदी गिरी है। ग्रामीण इलाकों में तो 9 फीसदी की गिरावट आई है।
महंगाई बढ़ने का क्या कारण है?
पश्चिम एशिया में होने वाले संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी के कारण क्रूड ऑयल और फर्टिलाइजर की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
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