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अमेरिका-जापान ने येन को स्थिर करने के लिए किया सहयोग

अमेरिका-जापान ने मिलकर करेंसी मार्केट में दखल दिया, येन को संभालने की कोशिश अमेरिका और जापान ने मिलकर करेंसी मार्केट में दखल देकर येन को स्थिर करने की कोशिश की है।

अमेरिका-जापान ने येन को स्थिर करने के लिए किया सहयोग
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अमेरिका-जापान ने मिलकर करेंसी मार्केट में दखल दिया, येन को संभालने की कोशिश

अमेरिका और जापान ने मिलकर करेंसी मार्केट में दखल देकर येन को स्थिर करने की कोशिश की है। यह कदम दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक दुर्लभ कदम माना जा रहा है। वॉशिंगटन ने 1998 के बाद पहली बार येन खरीदा है, जो यह दिखाता है कि कमजोर जापानी करेंसी से होने वाले आर्थिक जोखिम को लेकर दोनों देशों की चिंता साझा है।

येन की गिरावट ने मजबूर किया कदम उठाने पर

पिछले शुक्रवार को येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 164 तक गिर गया, जो चार दशकों में सबसे निचला स्तर है। इस कदम के बाद येन तीन महीने के उच्च स्तर 155.2 तक पहुंचा लेकिन फिर से कमजोर होने लगा। बुधवार दोपहर तक यह 157.44 पर था।

ग्लोबल फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी फर्म Ebury के मार्केट स्ट्रैटेजी हेड मैथ्यू रयान ने कहा कि यह कदम अमेरिका और जापान के रिश्तों को थोड़े समय के लिए मजबूत कर सकता है। उन्होंने कहा, "फिलहाल दोनों देशों के हित एक जैसे लग रहे हैं।"

येन क्यों है अहम?

जापान के लिए येन की गिरावट बड़ी समस्या है। कमजोर करेंसी से महंगाई बढ़ने और बॉन्ड मार्केट अस्थिर होने का खतरा है, जो उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं, अमेरिका चाहता है कि उसका ट्रेड डेफिसिट ज्यादा न बढ़े, जो लगातार कमजोर येन से और बढ़ सकता है।

इसी प्राथमिकता ने दोनों देशों के बीच एक दुर्लभ सहयोग का मौका दिया है। दोनों ने येन को स्थिर करने के फायदे को समझा है।

भविष्य अनिश्चित

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से पैदा हुई सकारात्मकता ज्यादा समय तक टिक नहीं सकती। बाजार और पॉलिसी के दबाव के बीच येन की वैल्यू को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। अगर येन फिर कमजोर हुआ, तो अमेरिका और जापान के हितों का तालमेल बिगड़ सकता है और रिश्तों पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल, यह संयुक्त कदम दिखाता है कि ग्लोबल इकोनॉमिक स्टेबिलिटी में येन कितना अहम है और दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रिश्तों को कैसे प्रभावित करता है।

स्रोत: South China Morning Post

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका और जापान ने क्यों मिलकर येन को स्थिर करने का कदम उठाया?

दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने और कमजोर जापानी करेंसी से होने वाले आर्थिक जोखिम को लेकर चिंता साझा करने के लिए।

येन की गिरावट से क्या समस्या हो सकती है?

कमजोर करेंसी से महंगाई बढ़ने और बॉंड मार्केट अस्थिर होने का खतरा है, जो जापान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है।

येन की कीमत किस स्तर तक गिर गई थी?

येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 164 तक गिर गया था, जो चार दशकों में सबसे निचला स्तर है।

क्या अमेरिका और जापान का ये कदम लंबे समय तक प्रभावी रहेगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से पैदा हुई सकारात्मकता ज्यादा समय तक टिक नहीं सकती।

येन की स्थिरता का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर है?

येन की स्थिरता ग्लोबल इकोनॉमिक स्टेबिलिटी में अहम है और यह दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रिश्तों को प्रभावित करती है।

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