गोवा मुक्ति आंदोलन: भारत के उपनिवेश-मुक्तिकरण में अहम भूमिका
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यूपीएससी मेन्स उत्तर अभ्यास — जीएस 1: भारत का उपनिवेश-मुक्तिकरण, आज़ादी के बाद राष्ट्र-निर्माण और हड़प्पा की 'डांसिंग गर्ल' मूर्ति (सप्ताह 159)
यूपीएससी एसेंशियल्स इनिशिएटिव मेन्स के उत्तर लेखन अभ्यास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह पहल उम्मीदवारों को यूपीएससी सिविल सर्विसेस सिलेबस के अहम टॉपिक्स पर एक व्यवस्थित तरीका देती है। इसमें जीएस पेपर्स के स्थिर और गतिशील दोनों हिस्सों को कवर किया जाता है। इस हफ्ते का जीएस-1 अभ्यास भारत के उपनिवेश-मुक्तिकरण, आज़ादी के बाद राष्ट्र-निर्माण और हड़प्पा की 'डांसिंग गर्ल' मूर्ति के पुरातात्विक महत्व पर केंद्रित है।
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प्रश्न 1: भारत के उपनिवेश-मुक्तिकरण और राष्ट्र-निर्माण में गोवा मुक्ति आंदोलन का महत्व
भारत की औपनिवेशिक शासन के खिलाफ लड़ाई 1947 में आज़ादी के साथ खत्म नहीं हुई थी। गोवा, दमन और दीव 1961 तक पुर्तगाली शासन के अधीन रहे। गोवा की मुक्ति ने भारत के उपनिवेश-मुक्तिकरण प्रक्रिया को पूरा किया और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
शुरुआत में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए, क्योंकि भारत पहले से ही विभाजन और कश्मीर विवाद जैसी चुनौतियों से जूझ रहा था। लेकिन पुर्तगाल ने बातचीत करने से इनकार कर दिया और गोवा को पुर्तगाल का अभिन्न हिस्सा मानने पर अड़ा रहा। इसके बाद भारत ने सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाया। दिसंबर 1961 में ऑपरेशन विजय के तहत पुर्तगाली शासन का अंत हुआ।
इस आंदोलन ने भारत के औपनिवेशिक संघर्षों में सिविल नाफरमानी की भूमिका को भी उजागर किया। समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया और जूलियाओ डी मेनेजेस ने पुर्तगाली शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। गोवा क्रांति दिवस उनके प्रयासों को याद करता है। गोवा की मुक्ति ने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाया और यह भी बताया कि भारत शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देता है।
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प्रश्न 2: पुरातात्विक अवशेष और हड़प्पा की 'डांसिंग गर्ल' मूर्ति
हड़प्पा की 'डांसिंग गर्ल' मूर्ति एक कांस्य कलाकृति है, जो 1926-27 में मोहनजोदड़ो की खुदाई के दौरान मिली थी। केवल 10.8 सेमी की यह मूर्ति प्राचीन कला का एक उत्कृष्ट नमूना है और सिंधु घाटी सभ्यता के सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी पहलुओं को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
लॉस्ट-वॉक्स कास्टिंग विधि से बनी यह मूर्ति हड़प्पा के उन्नत धातु-कला और शिल्प कौशल को दर्शाती है। इसका आत्मविश्वास भरा रुख, जटिल आभूषण और वास्तविक अनुपात उस सभ्यता की कलात्मक परिपक्वता को दिखाते हैं। हार और कई चूड़ियों जैसे विवरण बताते हैं कि व्यक्तिगत साज-सज्जा का चलन था, जो हड़प्पा की भौतिक संस्कृति की झलक देता है।
इस मूर्ति को लेकर पहचान, स्थिति और दैनिक जीवन पर अलग-अलग व्याख्याएं की गई हैं, हालांकि इतिहासकार अटकलों पर निर्भर रहने से बचने की सलाह देते हैं। यह मूर्ति पुरातात्विक अध्ययन में संदर्भ आधारित विश्लेषण की अहमियत को रेखांकित करती है और याद दिलाती है कि अवशेषों को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए, न कि आधुनिक धारणाओं के आधार पर।
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निष्कर्ष
इस हफ्ते के सवाल भारत के उपनिवेश-मुक्तिकरण और प्राचीन इतिहासलेखन के आपस में जुड़े विषयों को उजागर करते हैं। गोवा मुक्ति आंदोलन आज़ादी के बाद भारत के राष्ट्रीय एकता के प्रयासों का उदाहरण है, जबकि हड़प्पा की 'डांसिंग गर्ल' मूर्ति यह दिखाती है कि पुरातात्विक साक्ष्य प्राचीन समाजों को समझने में कैसे मदद करते हैं। उम्मीदवारों को इन विषयों पर विचार करने और अपनी उत्तर लेखन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
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