ट्रंप ने आईएमईसी को समर्थन दिया, युद्ध के बीच टिकने की चुनौती
भारत-यूरोप ट्रेड कॉरिडोर IMEC को ट्रंप का समर्थन मिला, लेकिन युद्ध और कमजोर चोकपॉइंट्स के बीच इसके विस्तार पर सवाल हैं।
भारत-यूरोप ट्रेड कॉरिडोर को ट्रंप का समर्थन मिला, लेकिन क्या IMEC युद्ध के बीच टिक पाएगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया समर्थन ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर पर फिर से ध्यान खींचा है। यह तीन साल पुराना प्रोजेक्ट है, जिसके बारे में विश्लेषकों का कहना है कि अगर इसे जारी भू-राजनीतिक टकरावों के बीच टिकना है, तो इसका विस्तार करना जरूरी होगा।
IMEC से क्या करने की उम्मीद है
इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर, यानी IMEC, को पहली बार 2023 में जी20 समिट में सामने रखा गया था।
इसे मौजूदा रूट्स और चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के एक विकल्प के तौर पर पेश किया गया था।
इस प्रोजेक्ट को भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इजराइल और यूरोपीय यूनियन का समर्थन हासिल है।
इसके प्रस्तावित डिजाइन में शिपिंग लेन, रेलवे, एनर्जी पाइपलाइन और डेटा केबल को एक ही कॉरिडोर में जोड़ा गया है।
हालांकि, यह कॉरिडोर अभी भी काफी हद तक काम जारी होने की स्थिति में है।
विश्लेषक कमजोरी क्यों देख रहे हैं
विश्लेषकों का कहना है कि अगर IMEC को कभी ऑपरेशनल बनना है, तो उसे खाड़ी के उन कमजोर चोकपॉइंट्स को बाईपास करना होगा, जहां रुकावट का खतरा ज्यादा है।
यह चेतावनी नई बहस के केंद्र में आ गई है, क्योंकि इस प्रोजेक्ट को जारी भू-राजनीतिक टकरावों के संदर्भ में परखा जा रहा है।
इस कॉरिडोर को चीन की बेल्ट एंड रोड के मुकाबले एक प्रतिद्वंद्वी के तौर पर पेश किया गया है, लेकिन विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि उन टकरावों के बीच टिके रहने के लिए इसका विस्तार जरूरी है।
अभी क्या बनना बाकी है
कुछ मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रस्तावित रूट के कुछ हिस्सों को संभाल सकता है।
लेकिन अहम रेल लिंक, पोर्ट और दूसरे कनेक्शन अभी भी विकसित किए जा रहे हैं।
इसका मतलब है कि ट्रंप के समर्थन ने IMEC पर ध्यान फिर से बढ़ा दिया है, लेकिन इस प्रोजेक्ट की व्यावहारिक क्षमता अब भी इस बात पर निर्भर करती है कि क्या उन गायब लिंक और कमजोर हिस्सों को ठीक किया जा सकता है।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IMEC क्या है?
IMEC यानी इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर एक ट्रेड और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट है, जिसे 2023 में G20 समिट में सामने रखा गया था।
IMEC को किन देशों और समूहों का समर्थन है?
इस प्रोजेक्ट को भारत, अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इजराइल और यूरोपीय यूनियन का समर्थन हासिल है।
ट्रंप के समर्थन से IMEC पर क्या असर पड़ा है?
डोनाल्ड ट्रंप के हालिया समर्थन के बाद IMEC पर फिर से ध्यान गया है, लेकिन प्रोजेक्ट की कामयाबी अब भी अधूरे लिंक और कमजोर हिस्सों को ठीक करने पर निर्भर है।
विश्लेषक IMEC को लेकर चिंता क्यों जता रहे हैं?
विश्लेषकों का कहना है कि IMEC को ऑपरेशनल बनने के लिए खाड़ी के कमजोर चोकपॉइंट्स को बाईपास करना होगा, जहां रुकावट का खतरा ज्यादा है।
IMEC में अभी क्या बनना बाकी है?
प्रस्तावित रूट के कुछ हिस्सों के लिए मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर है, लेकिन अहम रेल लिंक, पोर्ट और दूसरे कनेक्शन अभी भी विकसित किए जा रहे हैं।
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