बीजेपी सांसद गुलाम अली खटाना ने ओआईसी के भारत-विरोधी प्रस्तावों की निंदा की
वरिष्ठ बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद एर. गुलाम अली खटाना ने बगदाद में 17, 18 अक्टूबर 2026 को हुई ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) काउंसिल ऑफ फॉरेन मिनिस्टर्स की बैठक में अपनाए गए भारत विरोधी
वरिष्ठ बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद एर. गुलाम अली खटाना ने बगदाद में 17, 18 अक्टूबर 2026 को हुई ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) काउंसिल ऑफ फॉरेन मिनिस्टर्स की बैठक में अपनाए गए भारत विरोधी प्रस्तावों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इन प्रस्तावों को बेबुनियाद, दुर्भावनापूर्ण और राजनीति से प्रेरित बताया। साथ ही, उन्होंने पाकिस्तान पर भारत के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण प्रोपेगेंडा चलाने का आरोप लगाया।
गुलाम अली खटाना ने कहा, “मैं बगदाद में 17, 18 अक्टूबर 2026 को हुई ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन काउंसिल ऑफ फॉरेन मिनिस्टर्स की बैठक में अपनाए गए भारत विरोधी संदर्भों की कड़ी और पूरी तरह निंदा करता हूं।” उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों में शामिल दावे बिना आधार के हैं और इन्हें पाकिस्तान ने अपने सीमित राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए तैयार कराया है।
उन्होंने कहा कि यह भारत को बदनाम करने और उसके अंदरूनी मामलों में दखल देने की खुली कोशिश है। खटाना ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि इस्लामिक दुनिया के सामूहिक हितों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाला संगठन एक बार फिर पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का मंच बन गया है।
खटाना ने साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न, अविभाज्य और अटूट हिस्से हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रभाव में तैयार किया गया कोई भी प्रस्ताव, राजनीति से प्रेरित कोई भी कहानी और किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच की अनुचित दखलअंदाजी इस सच्चाई को नहीं बदल सकती।
उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता के दायरे में आने वाले मामलों पर बोलने का ओआईसी के पास न तो कोई वैध आधार है और न ही नैतिक अधिकार। उनके मुताबिक, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर भारत की स्थिति स्पष्ट और अटल है।
गुलाम अली खटाना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि इस दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, बेहतर कनेक्टिविटी, टूरिज्म, निवेश और लोगों तक विकास का फायदा पहुंचाने पर अभूतपूर्व जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग शांति, तरक्की, सम्मान और अवसर के हकदार हैं। उन्हें पाकिस्तान के भू-राजनीतिक खेलों में मोहरे की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए खटाना ने कहा कि मानवाधिकारों पर दुनिया को भाषण देने से पहले उसे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी पाकिस्तान-ऑक्यूपाइड जम्मू-कश्मीर (PoJK) में दमन, हिंसा और बर्बरता के अपने रिकॉर्ड का जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नागरिक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल इस्तेमाल किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इन खबरों में निर्दोष लोगों, महिलाओं और बच्चों की मौत का भी जिक्र है। खटाना ने कहा कि इससे उस देश का दोहरा रवैया सामने आता है, जो अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए भारत के खिलाफ विवाद खड़ा करने की कोशिश करता है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान प्रोपेगेंडा के पीछे अपने आचरण को नहीं छिपा सकता और न ही अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल करके जवाबदेही से बच सकता है। उनके मुताबिक, भारत को लेकर विवाद खड़ा करने के बजाय पाकिस्तान को अपने ही रिकॉर्ड पर जवाब देना चाहिए।
खटाना ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े केवल वही मुद्दे अब भी लंबित हैं, जिनमें पाकिस्तान का भारत के अवैध और जबरन कब्जे वाले इलाकों से हटना और सीमा पार आतंकवाद को समर्थन तुरंत बंद करना शामिल है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इन वास्तविकताओं का सामना करना चाहिए और राजनीति से प्रेरित, तथ्यों के लिहाज से टिकाऊ नहीं होने वाले दावों को सही नहीं ठहराना चाहिए।
ओआईसी की ओर से भारत पर इस्लामोफोबिया से जुड़े आरोप लगाए जाने पर भी खटाना ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ये संकेत और आरोप भी उतने ही निंदनीय हैं। उनके मुताबिक, भारत एक सभ्यतागत राष्ट्र है, जिसने बहुलवाद, साथ रहने और सभी धर्मों के सम्मान के सिद्धांतों को कायम रखा है।
उन्होंने कहा कि भारत के संवैधानिक मूल्य और लोकतांत्रिक संस्थान पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न, सांप्रदायिक हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता और शासन की नाकामियों के लगातार रिकॉर्ड से बिल्कुल अलग हैं। खटाना ने कहा कि धार्मिक सद्भाव पर पाकिस्तान का भारत को भाषण देना दोहरे रवैये और ध्यान भटकाने की कोशिश है।
उन्होंने ओआईसी से पूछा कि वह एक विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय संगठन बने रहना चाहता है या पाकिस्तान के भारत विरोधी एजेंडे के साधन के रूप में काम करता रहेगा। खटाना ने कहा कि एकतरफा, भड़काऊ और राजनीति के तहत तैयार किए गए प्रस्तावों का बार-बार समर्थन ओआईसी की विश्वसनीयता, ईमानदारी और अंतरराष्ट्रीय स्थिति को नुकसान पहुंचा रहा है।
उन्होंने कहा कि जो सदस्य देश बातचीत, शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में सचमुच विश्वास रखते हैं, उन्हें संगठन के इस तरह के इस्तेमाल को खारिज करना चाहिए। साथ ही, उन्हें जवाबदेही और सार्थक सुधार की मांग करनी चाहिए।
खटाना ने कहा कि भारत एक संप्रभु, मजबूत और आत्मविश्वास से भरा देश है। भारत अपने अंदरूनी मामलों में दखल स्वीकार नहीं करेगा और न ही दुर्भावनापूर्ण प्रोपेगेंडा को राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने देगा।
उन्होंने पाकिस्तान और उसके समर्थकों को कहा कि भारत की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं हो सकता। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किया जाने वाला कोई भी दिखावटी प्रदर्शन इस सच्चाई को नहीं बदल सकता।
गुलाम अली खटाना ने ओआईसी से भेदभाव वाला रवैया छोड़ने, पाकिस्तान प्रायोजित प्रोपेगेंडा को खारिज करने और सदस्य तथा गैर-सदस्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करते हुए निष्पक्ष और जिम्मेदार तरीके से काम करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारत मजबूती से खड़ा रहेगा। उनकी बातों में भारत की संप्रभुता को सर्वोच्च, क्षेत्रीय अखंडता को अटूट और राष्ट्रीय संकल्प को अडिग बताया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुलाम अली खटाना ने OIC के प्रस्तावों पर क्या कहा?
उन्होंने बगदाद में अपनाए गए भारत-विरोधी प्रस्तावों की कड़ी निंदा करते हुए उन्हें बेबुनियाद, दुर्भावनापूर्ण और राजनीति से प्रेरित बताया।
OIC की बैठक कब और कहां हुई थी?
OIC काउंसिल ऑफ फॉरेन मिनिस्टर्स की बैठक 17 और 18 अक्टूबर 2026 को बगदाद में हुई थी।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर खटाना की क्या राय है?
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न, अविभाज्य और अटूट हिस्से हैं।
खटाना ने पाकिस्तान पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने पाकिस्तान पर भारत के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण प्रोपेगेंडा चलाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल करके जवाबदेही से बचने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
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