रूसी डीजल पर ट्रंप की नरमी से भारत को बढ़त: विश्लेषक
रूसी डीजल की सप्लाई पर ट्रंप की ढील से भारत को सस्ते रूसी कच्चे तेल के विवाद में अमेरिका पर दबाव बनाने का मौका मिल सकता है।
क्या भारत को फायदा होगा? ट्रंप के रूसी डीजल सौदे से नई दिल्ली को दबाव बनाने की ताकत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूसी डीजल के निर्यात पर प्रतिबंधों में ढील देने और नई सप्लाई को दुनिया के बाजारों तक पहुंचने की इजाजत देने के फैसले से भारत को वॉशिंगटन के साथ सस्ते दाम पर खरीदे गए कच्चे तेल को लेकर चल रहे विवाद में ज्यादा बढ़त मिल सकती है। विश्लेषकों ने यह बात कही है।
इस कदम से रूसी ईंधन को लेकर अमेरिकी दबाव में नरमी दिखती है। इससे प्रतिबंधों से जुड़े उस तर्क को भी झटका लग सकता है, जिसका इस्तेमाल वॉशिंगटन रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों से बातचीत में करता रहा है।
सौदे से कूटनीति की नई गुंजाइश
शुक्रवार को ट्रंप की ओर से घोषित किए गए इस सौदे के तहत रूस तुरंत 300,000 टन से ज्यादा डीजल अमेरिका और दुनिया के बाजारों को सप्लाई करेगा।
इसके बाद नवंबर में 500,000 टन और “इसके तुरंत बाद” 1 million tonnes की सप्लाई की जाएगी।
ट्रंप ने कहा कि इसके बाद 3 million tonnes की और सप्लाई “कम समय के भीतर” की जाएगी। यह रूस की रिफाइनरियों की स्थिति पर निर्भर होगी।
अमेरिकी ट्रेजरी ने रूसी डीजल की खेप भेजने पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने वाला एक अस्थायी लाइसेंस भी जारी किया है।
विश्लेषकों ने कहा कि नई दिल्ली के लिए यह घटनाक्रम तुरंत चल रहे ऊर्जा विवाद से कहीं ज्यादा मायने रखता है।
उनका कहना है कि भारत इस कदम का इस्तेमाल वॉशिंगटन पर अपने सस्ते रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर ज्यादा एक जैसी नीति अपनाने के लिए दबाव बनाने में कर सकता है।
यह बदलाव नई दिल्ली को अतिरिक्त कूटनीतिक गुंजाइश भी दे सकता है। भारत रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के लिए बातचीत में मदद करने की अपनी कोशिशें लगातार जारी रखे हुए है।
विश्लेषकों ने कहा कि इसलिए यह फैसला भारत के लिए दो मोर्चों पर मौके बना सकता है। पहला, वॉशिंगटन से ज्यादा एक जैसी नीति की मांग करना और दूसरा, संघर्ष से जुड़े मुद्दे पर अपनी कोशिशों को आगे बढ़ाना।
घोषित डीजल सप्लाई का पैमाना भी प्रतिबंधों में दी गई इस ढील को दुनिया के बाजारों से जुड़े बड़े संदर्भ में रखता है। इसका मतलब यह है कि इसे सिर्फ अमेरिका और रूस के बीच के द्विपक्षीय समझौते तक सीमित नहीं देखा जा रहा है।
ट्रेजरी का यह लाइसेंस अस्थायी है। इसके साथ रूसी रिफाइनरियों की स्थिति की शर्त भी जुड़ी हुई है। डीजल की खेप भेजने के लिए बताए गए ढांचे का यह हिस्सा बना हुआ है।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ट्रंप के रूसी डीजल सौदे से भारत को क्या फायदा हो सकता है?
भारत वॉशिंगटन पर सस्ते रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर ज्यादा एक जैसी नीति अपनाने का दबाव बना सकता है।
रूस अमेरिका और दुनिया के बाजारों को कितने डीजल की सप्लाई करेगा?
रूस तुरंत 300,000 टन से ज्यादा डीजल सप्लाई करेगा। नवंबर में 500,000 टन और उसके तुरंत बाद 1 million tonnes की सप्लाई होगी। इसके बाद 3 million tonnes और भेजने की योजना है।
क्या रूसी डीजल पर प्रतिबंध पूरी तरह हटा दिए गए हैं?
नहीं, अमेरिकी ट्रेजरी ने प्रतिबंधों में ढील देने वाला अस्थायी लाइसेंस जारी किया है। यह रूस की रिफाइनरियों की स्थिति पर निर्भर है।
भारत इस फैसले का कूटनीतिक इस्तेमाल कैसे कर सकता है?
भारत वॉशिंगटन से ऊर्जा नीति पर ज्यादा समान रुख की मांग कर सकता है और रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की अपनी बातचीत की कोशिशों को आगे बढ़ा सकता है।
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