किसानों और मजदूरों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ किया जोरदार प्रदर्शन
देशभर में आज किसानों और मजदूरों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
देशभर में आज किसानों और मजदूरों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। श्रम विरोधी चार लेबर कोड को वापस लेने और पुराने श्रम कानूनों की बहाली की मांग को लेकर लखनऊ समेत पूरे उत्तर प्रदेश में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारी न्यूनतम मजदूरी ₹42,000 करने, काम के घंटे आठ तय करने, किसानों की फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (C2+50%) सुनिश्चित करने और बिजली संशोधन विधेयक 2025 समेत कई अन्य नीतियों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
लखनऊ में प्रदर्शनकारियों ने परिवर्तन चौक से राज्यपाल भवन तक मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें केडी सिंह बाबू स्टेडियम के पास रोक दिया। इसके बाद वहां सभा आयोजित की गई, जिसमें एटक, इण्टक, एचएमएस, सीटू और अन्य संगठनों के नेताओं ने सरकार पर मजदूर और किसान विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। सभा में उमाशंकर मिश्र, चंद्रशेखर, प्रेमनाथ राय, और कमलेश यादव जैसे प्रमुख नेताओं ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया।
राज्यपाल कार्यालय को ज्ञापन सौंपने के लिए पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी भेजा गया, जिसमें चंद्रशेखर, एचएन तिवारी और अन्य नेता शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान बेगम हजरत महल पार्क में बिजली कर्मचारियों ने भी निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाई। उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा, "आज पूरे देश का नारा है 'कारपोरेट भारत छोड़ो'। हरियाणा के बिजली कर्मचारी आज रात 12 बजे से 72 घंटे की हड़ताल पर जा रहे हैं।"
इस आंदोलन में तीन लाख से ज्यादा किसान और मजदूर शामिल हुए। गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, वाराणसी समेत कई जिलों में प्रदर्शन हुए। कई जगहों पर रास्ता जाम कर धरना दिया गया और ज्ञापन सौंपे गए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
किसानों और मजदूरों ने आज प्रदर्शन क्यों किया?
किसानों और मजदूरों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। वो चार श्रम कोड को वापस लेने, न्यूनतम मजदूरी ₹42,000 करने, काम के घंटे आठ तय करने, किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (C2+50%) देने और बिजली संशोधन विधेयक 2025 को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
लखनऊ में प्रदर्शनकारियों ने क्या किया?
लखनऊ में प्रदर्शनकारियों ने परिवर्तन चौक से राज्यपाल भवन तक मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें केडी सिंह बाबू स्टेडियम के पास रोक दिया, जहां सभा आयोजित की गई। एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल कार्यालय को ज्ञापन सौंपने भेजा गया।
इस प्रदर्शन में कितने लोग शामिल हुए?
इस आंदोलन में तीन लाख से ज्यादा किसान और मजदूर शामिल हुए। गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, वाराणसी समेत कई जिलों में प्रदर्शन हुए।
बिजली कर्मचारियों ने क्या कदम उठाया?
बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाई। हरियाणा के बिजली कर्मचारी 72 घंटे की हड़ताल पर चले गए।
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