तमिलनाडु विधानसभा में अनुसूचित जाति कल्याण को लेकर तीखी बहस
तमिलनाडु विधानसभा में DMK और TVK सरकार के बीच अनुसूचित जाति कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर तीखी बहस।
ट्रेजरी और ओपोजिशन बेंच के बीच अनुसूचित जातियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को लेकर तीखी बहस
तमिलनाडु विधानसभा में गुरुवार को तीखी झड़पें हुईं जब सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने अनुसूचित जातियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में लगातार सरकारों के रिकॉर्ड को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाए।
DMK का आरोप सरकार योजनाओं का नाम बदल रही है
DMK विधायक ई. राजा ने TVK की सरकार पर आरोप लगाया कि उसने पहले 100 दिनों में सिर्फ मौजूदा प्रोग्राम का नाम बदला है। उन्होंने आदि द्रविड़ और आदिवासी कल्याण विभाग का नाम बदलकर सामाजिक न्याय विभाग करने की बात कही। उन्होंने पहले की DMK सरकारों के दौरान शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं का ब्यौरा दिया।
मंत्री ने CAG रिपोर्ट का हवाला दिया, गोधरा का सवाल उठाया
लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन ने जवाब देते हुए 1999 से 2004 के बीच केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की BJP सरकार में DMK की भागीदारी का जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि गोधरा घटना और उसके बाद मुसलमानों पर हुए हमलों को लेकर किसी DMK मंत्री ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया। उन्होंने कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल के आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पिछली DMK सरकार के दौरान अनुसूचित जाति कल्याण के लिए रखे गए फंड का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि समुदाय की मुश्किलें 75 साल से जारी हैं।
DMK विधायक K.N. नेहरू ने रिकॉर्ड का बचाव करते हुए कहा कि फंड कोर्ट के आदेश सहित कई वजहों से खर्च नहीं हो पाता और CAG रिपोर्ट को यह सबूत नहीं माना जा सकता कि पैसा अनुसूचित जाति कल्याण पर खर्च नहीं किया गया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री M. करुणानिधि को पिछड़े वर्ग और अति पिछड़े वर्ग के लिए अलग विभाग बनाने का श्रेय दिया।
मंदिर में पुजारियों की नियुक्ति बनी विवाद की वजह
बहस मंदिरों में अनुसूचित जातियों और अन्य समुदायों से पुजारियों की नियुक्ति पर भी पहुंची। DMK विधायक P.K. शेखरबाबू ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान पेरियार के सिद्धांतों के मुताबिक 32 लोगों को नियुक्ति आदेश जारी किए गए और उसके बाद जो मुकदमा हुआ उसकी वजह बताई। अर्जुन ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने धार्मिक समूहों के दबाव में यह योजना बंद कर दी और DMK पर आरोप लगाया कि वह सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए पेरियार का नाम लेती है।
स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने कहा कि उत्पीड़ित समुदायों को सिर्फ लाभार्थी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके कल्याण के लिए काम करना हर सरकार की जिम्मेदारी है।
विपक्ष के नेता उधयनिधि स्टालिन ने ₹1,000 करोड़ की अयोथी थास पंडितार हाउसिंग स्कीम और अन्नल अंबेडकर ओवरसीज स्कॉलरशिप स्कीम सहित कई पहलों की सूची दी। उन्होंने बताया कि DMK सरकार ने फंड के सही इस्तेमाल को पक्का करने के लिए तमिलनाडु डेवलपमेंट एक्शन प्लान फॉर द शेड्यूल्ड कास्ट्स एंड शेड्यूल्ड ट्राइब्स एक्ट, 2024 बनाया है। अर्जुन ने जवाब देते हुए आरोप लगाया कि DMK ने अपने पांच साल के कार्यकाल में तेलंगाना और बिहार की तरह जाति आधारित जनगणना नहीं करवाई।
DMDK विधायक प्रेमलता विजयकांत ने सदस्यों से ग्रांट की मांगों पर चर्चा के दौरान विषय पर बने रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गरमागरम बहसों से लोगों को कोई फायदा नहीं होगा।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तमिलनाडु विधानसभा में अनुसूचित जाति कल्याण को लेकर क्या विवाद था?
DMK और TVK सरकार के बीच अनुसूचित जातियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के रिकॉर्ड को लेकर तीखी बहस हुई। DMK ने आरोप लगाया कि TVK सरकार सिर्फ मौजूदा प्रोग्राम का नाम बदल रही है, जबकि सरकार ने CAG रिपोर्ट के आधार पर दावा किया कि पिछली DMK सरकार में कल्याण फंड का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हुआ।
DMK विधायकों ने पिछली DMK सरकार के दौरान कौन सी योजनाएं शुरू करने का दावा किया?
DMK विधायकों ने ₹1,000 करोड़ की अयोथी थास पंडितार हाउसिंग स्कीम, अन्नल अंबेडकर ओवरसीज स्कॉलरशिप स्कीम और तमिलनाडु डेवलपमेंट एक्शन प्लान फॉर द शेड्यूल्ड कास्ट्स एंड शेड्यूल्ड ट्राइब्स एक्ट, 2024 जैसी पहलों की सूची दी।
मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति को लेकर क्या विवाद था?
पिछली DMK सरकार ने पेरियार के सिद्धांतों के अनुसार अनुसूचित जातियों और अन्य समुदायों से 32 पुजारियों की नियुक्ति के आदेश जारी किए थे। इसके बाद हुए मुकदमे में TVK सरकार ने कहा कि पिछली सरकार ने धार्मिक समूहों के दबाव में यह योजना बंद कर दी।
मंत्री आधव अर्जुन ने DMK के खिलाफ क्या आरोप लगाया?
आर्जुन ने कहा कि DMK सरकार ने पिछले पांच साल में तेलंगाना और बिहार की तरह जाति आधारित जनगणना नहीं करवाई। उन्होंने CAG रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति कल्याण के लिए रखे गए फंड का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हुआ।
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